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किसी के हक का नहीं ला रहे पानी, सिलीसेढ़ योजना पर बुलंद नहीं आवाज Thursday 27 April 2023 06:05 PM UTC+00 अलवर. पेयजल संकट अलवर जिले की सबसे बड़ी समस्या है और पिछले कुछ समय से यह चुनावी मुद्दा भी बनती रही है, इसके बाद भी जनप्रतिनिधि अलवर शहर एवं आसपास के गांवों की पानी की समस्या के निराकरण के लिए जरूरी सिलीसेढ़ से पानी लाने की योजना पर सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद नहीं कर पा रहे हैं। यह िस्थति तो तब है जब इस योजना में सिलीसेढ़ के पानी पर किसी का हक नहीं मार रहे, बल्कि सिंचाई व अन्य उपयोग के लिए आरक्षित जल के बाद बचे पानी लाने के प्रयास हैं। सिलीसेढ़ बांध में बारिश का पानी एकत्र होकर सिंचाई के उपयोग में आता है। सिलीसेढ़ के पास होटल, रिसोर्ट, आबादी आदि बसने से फसल क्षेत्र के काफी हिस्से का नगरीकरण हो चुका है। इससे सिंचिंत क्षेत्र का दायरा कम हो गया। नगरीकरण के चलते सिंचाई की जरूरत पूरा होने के बाद भी करीब 100 एमसीएफटी पानी बांध में अतिरिक्त रहता है। इसी अतिरिक्त 100 एमसीएफटी पानी को मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग जयपुर ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को पेयजल के लिए आरक्षित करने की सहमति दी है। यानी पेयजल के लिए आरक्षित 100 एमसीएफटी पानी किसी के हक का नहीं होकर सिंचाई की आवश्यकता पूरी होने के बाद बची जल मात्रा है। पेयजल समस्या के निराकरण के लिए सिलीसेढ़ बांध से शहरी जल योजना अलवर के लिए अतिक्ति मुख्य अभियंता जन स्वास्थ्य विभाग एनसीआर क्षेत्र अलवर के माध्यम से करीब 38 करोड़ राशि लागत का प्रस्ताव राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए भेजी गई है, जिसे अभी सरकार की हरी झंडी मिलने का इंतजार है। राजनीति से बड़ी पानी की समस्या अलवर जिले में पेयजल संकट नया नहीं है। लंबे समय से राजनीतिक दल पेयजल संकट निराकरण के लोगों से वादे करते आए हैं, लेकिन इस समस्या के निराकरण के लिए सामूहिक राजनीतिक प्रयास की कमी रही है। यही कारण है कि अलवर जिले में पेयजल संकट निराकरण के लिए बनी सतही जल परियोजनाएं कागजों में दब कर रह गई। चम्बल से पानी लाने, यमुना से लाने, इस्टर्न राजस्थान कैनाल परियोजना और सिलीसेढ़ से अलवर तक पानी लाने की योजनाओं को लेकर जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयास दिखाई नहीं दिए। इसी का परिणाम है कि अलवर जिला लंब समय से पानी की समस्या से जूझता रहा है। आगामी चुनाव में कर सकता है नुकसान पेयजल संकट को लेकर सामूहिक प्रयास नहीं हो पाने का नुकसान जनप्रतिनिधियों को आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है। कारण है कि आगामी समय में पानी चुनावी मुद्दा बनना तय है, ऐसे में पेयजल संकट निराकरण से ऊपर राजनीति को रखने वाले जनप्रतिनिधियों को नुकसान की आशंका भी है। |
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