>>: राजस्थान का ये सरकारी स्कूल, अच्छे-अच्छे निजी स्कूल को भी देता है मात

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यादवेन्द्र सिंह राठौड़/सीकर। ग्रामीणों की सहभागिता और सहयोग मिले तो सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों से बेहतर बन जाते हैं। इसका उदाहरण है जिला मुख्यालय के समीप ग्राम पंचायत गोकुलपुरा का महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल। भामाशाहों ने इस स्कूल में बीते तीन साल में डेढ़ करोड़ रुपए दान किए, जिससे स्कूल की सूरत ही बदल गई।

ग्रामीणों और स्टाफ के सहयोग स्कूल की किसी भी कक्षा में एक भी सीट खाली नहीं रहती। स्कूल का खुद का मोबाइल ऐप और वेबसाइट है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन क्लास की सुविधा भी मिल रही है। ऑनलाइन ई-कटेंट भी उपलब्ध कराया जाता है। ग्रामीणों ने इस स्कूल में 9 कक्षाकक्ष, डिजिटल लाइब्रेरी, साइंस लैब, स्मार्ट क्लास रूम, खेल मैदान, कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी कैमरे, चारदीवारी, ट्यूबवेल, हॉल और शेखावाटी की स्थापत्य कला के अनुसार मुख्य द्वार का निर्माण कराया है।

यह भी खास
बच्चों को इंग्लिश स्पोकन क्लासेज और राष्ट्रीय स्तर के योगा टीचर से हर दिन योग सिखाया जाता है।

हर साल अच्छा रिजल्ट, जिसकी वजह एक सीट पर प्रवेश के लिए 50 से अधिक आवेदन आए थे।

हाल ही में इस स्कूल का चयन पीएमश्री योजना में हुआ है जिसके तहत अब स्कूल में दो करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य होंगे।

निजी स्कूलों की तर्ज पर प्रतिदिन सह-शैक्षणिक गतिविधियां भी होती है। फिलहाल यहां 487 बच्चों का नामांकन है।

हर खेल के लिए अलग मैदान
यह जिले का एकमात्र ऐसा सरकारी स्कूल है जहां मलखम्भ के 13, टग ऑफ वार में 10 और योगा में 3 खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है। स्कूल में फुटबॉल मैदान, बास्केटबॉल, बैडमिंटन कोर्ट, हॉकी, वॉलीबाल ग्राउंड, दो टेबल टेनिस टेबल सेट, क्रिकेट ग्राउंड, 400 मीटर रनिंग ट्रेक बना हुआ है।

71में से सम्मानित 11 भामाशाह इसी स्कूल के
शिक्षा विभाग की ओर से जिले के 71 भामाशाहों को सम्मानित किया गया था। इनमें से 11 भामाशाहों ने महात्मा गांधी स्कूल गोकुलपुरा में विकास कार्य कराए हैं। इनहीं भामाशाहों की बदौलत इस सरकारी स्कूल की सूरत बदली है।

स्टाफ ने वेतन से दिए तीन लाख रुपए
स्कूल प्रिंसिपल मंजू ढाका ने बताया कि महात्मा गांधी स्कूल में सुविधाएं बढ़ाने में स्टाफ भी पीछे नहीं है। यहां के स्टाफ ने अपने वेतन से लगभग तीन लाख रुपए दिए हैं। अध्यापक देवेंद्रसिंह खीचड़ ने बताया कि ग्रामीणों की सहभागिता के दम पर यह संभव हो सका है।

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