>>: बसें बदहाल, रोडवेज प्रशासन मौन तो इनकी सुध ले कौन ?

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अलवर. गर्मी में राजस्थान रोडवेज की खटारा बसों का सफर यात्रियों के काफी पीड़ादायक साबित हो रहा है। यात्रियों को टूटी खिड़कियों से धूप और गर्म हवा के थपेड़े झेलने पड़े रहे हैं। बसों का शोर भी यात्रियों को परेशान कर रहा है। वहीं, कई बार इन बसों के बीच रास्ते में खराब हो जाने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अलवर जिले की बात करें तो यहां राजस्थान रोडवेज के अलवर, मत्स्य नगर और तिजारा तीन आगार हैं। इन तीनों आगारों में करीब 250 बसें हैं। इनमें से करीब 100 बसें ऐसी हैं जो कि अपने निर्धारित 10 लाख किलोमीटर पूरे कर चुकी हैं। रोडवेज के रेकॉर्ड के अनुसार ये बसें कंडम हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी इन बसों को रूटों पर चलाया जा रहा है। इन कंडम बसों से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बसों की हालत खराब फिर भी रूट पर चला रहे: अलवर, मत्स्य नगर और तिजारा डिपो काफी बसों की हालात ज्यादा खराब हैं। इन बसों की बॉडी गल चुकी है तथा कई जगह से बसों की बॉडी टूटी पड़ी है। बसों की खिड़कियों के शीशें टूटे पड़े हैं।जिनमें से धूल-मिट्टी, धूप और बारिश का पानी आदि सीटों पर बैठे यात्रियों तक पहुंच रहे हैं। बसों की सीटें टूटी व फटी पड़ी हैं। वहीं, खटारा और टूटी बॉडी के कारण बसों के चलने के दौरान शोर भी काफी अधिक रहता है।

हो रही रास्ते में ब्रेकडाउनअलवर जिले के तीनों आगारों की करीब 100 कंडम बसों में से 30 से 40 फीसदी बसों की हालत ज्यादा खराब हैं। इनमें से कई बसें लक्ष्मणगढ़, नारायणपुर, बहरोड़, सीकरी व खेरली आदि रूटों पर चल रही हैं। ये बसें कभी भी बीच रास्ते में ब्रेक डाउन हो जाती हैं। कभी इनके टायर पंचर हो जाते हैं। कभी कमानी टूट जाती है तो कभी इंजन सीज हो जाता है। इसके बावजूद इन बसों को रूटों पर चलाया रहा है।
जल्द नई बसें मिलेगी

राजस्थान रोडवेज की ओर से जल्द ही 590 नई बसों की खरीद की जाएगी। इसके बाद सभी आगारों को नई बसें मिल सकेंगी।

- रवि सोनी, सहायक निदेशक (यांत्रिक), राजस्थान रोडवेज, जयपुर।

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