>>: सुविवि : पदान्नति पर तेज हुई तकरार, शिक्षक बोले हमें प्रमोशन दो, फैकल्टी चेयरमैन ने दिया इस्तीफा

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मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय में शिक्षकों की पदोन्नति पर तकरार तेज हो गई है। शिक्षकों की पदोन्नति अर्से से बकाया है, इसे लेकर मंगलवार को आईक्यूएसी (इंटरनल क्वालिटी असेसमेंट सेल) की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया। बैठक में फैकल्टी चेयरमैन सोशल साइंस प्रो. एस. के. कटारिया ने पद से इस्तीफा देने के साथ ही पदोन्नति प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया। ऐसे में पदोन्नति पर निर्णय नहीं हो सका। इस सेल में सभी कॉलेजों के डीन व फैकल्टी चेयरमैन शामिल होते हैं। बैठक में शिक्षकों ने दबाव बनाया था कि इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। गौरतलब है कि वर्ष 2018 से ये पदोन्नति लंबित है।

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राज्य सरकार ने मांगे थे पदोन्नति के आवेदन

राज्य सरकार ने गत दिनों 1300 से अधिक कॉलेज शिक्षकों को प्रोफेसर बना दिया, वहीं दूसरी बार फिर से इसके आवेदन मांगे हैं। जबकि दूसरी ओर सुविवि ने पांच साल से पदोन्नति प्रक्रिया रोक रखी है। मंगलवार को इसके लिए लंबे समय बाद आईक्यूएसी की बैठक बुलाई गई तो शिक्षको को प्रमोशन की आस बंधी, लेकिन बैठक में इस पर निर्णय नहीं हो सका।

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140 से अधिक शिक्षक इन्तजार मेंविवि के विभिन्न पदों के लिए 140 शिक्षक पदोन्नति की राह तक रहे हैं। विवि में फरवरी 2022 में पदोन्नति के आवेदन मांगे गए थे, सवा साल तक उस पर कोई प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई। मंगलवार को हुई बैठक हंगामेदार रही, एक ओर शिक्षक जल्द प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बना रहे थे, वहीं दूसरी ओर फैकल्टी ने कई सवाल खडे़ करते हुए खुद का इस्तीफा रजिस्ट्रार सीआर देवासी को सौंप दिया, हालांकि इसे अभी स्वीकार नहीं किया है।

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ये आ रहा है पेंच :

शिक्षकों का कहना है कि यूजीसी की पदोन्नति सबंधित 2018 की गाइड लाइन में वार्षिक प्रगति रिपोर्ट एपीआर का प्रावधान है, जिसे पदोन्नति फार्म के साथ भर कर जमा करवा दिया गया है, जबकि यहां सरकारी कर्मचारियों द्वारा भरी जाने वाली एसीआर (वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रपत्र) और एपीआर (वार्षिक परफोरमेंस रिपोर्ट ) को मिलाने का प्रयास कर बेवजह पदोन्नति प्रक्रिया टाल रहे हैं। शिक्षकों का मानना है कि किसी विवि में एसीआर का प्रावधान नही हैं। शिक्षकों को कुलपति ने पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण करने का आश्वासन पिछले दिनों दिया था।

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इसलिए प्रयास : कुलपति बनने के लिए दस वर्ष का प्रोफेसर पद का अनुभव होना जरूरी होता है। साथ ही यूपीएससी, आरपीएससी, थिसिस मूल्यांकन व अन्य संस्थाओं में कार्य करने के लिए प्रोफेसर होना आवश्यक है। 2018 से ही प्रमोशन बकाया होने के कारण सुखाडिया विवि के शिक्षक अन्य विवि और कॉलेज शिक्षा से पिछड़ रहे हैं।

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पदोन्नति के लिए जरूरी एपीआर भरकर दे दी गई है, लेकिन जानबूझकर इसे रुकवाया जा रहा है। जल्द ही इस पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे।

डॉ. बालू दान बारहठ, प्रदेश मंत्री, एबीआरएसएम, राजस्थान

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इस्तीफे की जानकारी मुझे नहीं मिली है। नियमों की पूरी जानकारी लेकर प्रक्रिया पूर्ण करेंगे। पदोन्नति रोकना हमारा उद्देश्य नहीं है।

प्रो आईवी त्रिवेदी, कुलपति सुविवि

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नोन टीचिंग कर्मचारियों की 1 अप्रेल को वरिष्ठता सूची जारी कर देते हैं। वहीं जून में हम विभागीय पदोन्नति समिति का इस पर निर्णय कर लेते हैं। लेकिन शिक्षकों का आईक्यूएसी के माध्यम से निर्णय होता है। एसीआर व एपीआर में कोई खास अंतर नहीं है। कई बार रिपोर्ट को लेकर मूल्यांकन में पारदर्शिता नहीं होने से शिकायतें व आरोप सामने आते हैं।

सीआर देवासी, रजिस्ट्रार

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