>>: जहाजपुर विधायक और कलक्टर में नोंक-झोक, भीलवाड़ा प्रशासन को बताया झूठ का पुलिंदा

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जिला कलक्टर सभागार में हुई दिशा समिति की बैठक हंगामेदार रही। सांसद सुभाष बहेडिया की अगुवाई में हुई बैठक में जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा ने कोटड़ी की जनता के साथ विकास कार्य में भेदभाव करने का आरोप लगाकर कलक्टर आशीष मोदी को जमकर आड़े हाथों लिया। इससे विधायक और कलक्टर में नोंक-झोक हुई। बैठक का बहिष्कर कर जा रहे विधायक को प्रशासन ने रोका। विधायक ने नेता के दबाव में कोटड़ी में विकास कार्य नहीं होने देने तक का प्रशासन पर आरोप लगाया।


जानकारी के अनुसार दिशा समिति की शाम साढ़े तीन बजे कलक्ट्रेट सभागार में बैठक शुरू हुई। सांसद बहेडिया और कलक्टर मोदी की अगुवाई बैठक में कई मुद्दे उठे। इस दौरान विधायक मीणा ने कोटड़ी पंचायत समिति में विकास कार्य बजट जारी नहीं करने का आरोप लगाते हुए बताया कि प्रशासन सदन को गुमराह कर रहा है। कोटड़ी में विकास कार्य नहीं होने को लेकर दस बार प्रशासन को पत्र लिखा। इसके लिए जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी बताया। लेकिन नेता के दबाव में कलक्टर कार्य नहीं होने दे रहे। इससे कलक्टर भी आवेश में आ गए और उन्होंने कहा कि इसके लिए एक भी चिट्ठी नहीं लिखी गई। अगर ऑफिस में चिट्ठी लिखी गई और उसकी पावती हो तो बता दीजिए। इस दौरान विधायक के पडोस में बैठक कोटड़ी प्रधान करणसिंह बेलवा ने कहा कि वे खुद कलक्टर से बजट स्वीकृति के लिए मिलकर गए। सारे कार्य प्रोसेडिंग में पड़े हुए हैं। 29 महीने से एक रुपया भी कोटड़ी के लिए स्वीकृत नहीं किया गया। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार का करोड़ों का पैसा पड़ा हुआ है। एक रुपया जारी नहीं किया जा रहा। क्षेत्र में जाकर जनता को शक्ल दिखाना मुश्किल हो रहा।

नहीं बोलने दोगे तो बैठक में रहने का क्या फायदा
हंगामे को देखते हुए सांसद बहेडिया ने विधायक को शांत करने का प्रयास किया तो मीणा ने कहा कि समस्या को लेकर नहीं बोलने दोगे तो बैठक में रहने का क्या फायदा। इस पर विधायक बहिष्कार कर बैठक से जाने लगे। जिनको अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेश गोयल ने शांत करके बैठाया। बैठक में कोटड़ी में विकास को लेकर किया जा रहे भेदभाव का मुद्दा छाया।

पांच माह से विधवा लगा रही चक्कर, जनप्रतिनिधि की बात तक नहीं सुनते
विधायक मीणा ने कहा कि पांच माह पूर्व कैलाशी देवी गुर्जर की मौत हो गई। उसके परिजन मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए सचिव से लेकर मंत्री तक के चक्कर लगवा चुके, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा रहा है। यहां तक विधायक का कहना था कि वह प्रमाण पत्र के लिए खुद मंत्री और उच्चाधिकारियों से मिले। लेकिन उनकी भी बात नहीं सुनी। विधायक ने सचिव पर आरोप लगाया कि प्रमाण पत्र बनाने के लिए पांच लाख रुपए की रिश्वत मांग रहा है।

 

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