>>: हादसे और वर्चस्व की जंग में हर माह एक पैंथर हार रहा जिदंगी की 'जंग'

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हिमांशु धवल@ राजसमंद. राजसमंद वन विभाग के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों में प्रत्येक माह एक पैंथर जिदंगी जंग हार रहा है। हालांकि इसमें से अधिकांश पैंथरों की मौत का कारण दुर्घटना और वर्चस्व की लड़ाई को माना जा रहा है। पिछले 14 माह में अब तक 14 पैंथरों की मौत हो चुकी है।
भोजन और पानी की तलाश में पैंथर आबादी क्षेत्रों तक पहुंचने लग गए हैं। इसके कारण आए दिन ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग को पिंजरा लगाना पड़ता है। कई बार पैंथर के हमले के कारण ग्रामीण घायल हो जाते हैं। जिले में पिछले दस सालों में इनकी संख्या में इजाफा हुआ है। जानकारों की मानें तो इनकी संख्या एक हजार के करीब बताई जा रही है, जबकि पिछली बार हुई वन्यजीव गणना में 400 के करीब पैंथर दिखाई दिए थे। पैंथरों की संख्या अधिक होने के कारण भोजन-पानी की तलाश में यह ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही वर्चस्व की लड़ाई और हादसों के कारण लगातार इनकी मौत हो रही है। जिले में वित्तीय वर्ष 2022-23 और मई तक 14 पैंथरों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ लोग इनके हमलों में घायल हो चुके हैं।

यह है मौत के कारण
- पैंथरों की दुर्घटनाओं में मौत
- वर्चस्व की लड़ाई के कारण
- बीमारी और वृद्धावस्था मुख्य कारण
फैक्ट फाइल
- 06 पैंथरों को वन विभाग ने छोड़ा सुरक्षित स्थानों पर
- 09 लोग पैथर के हमले में घायल हुए पिछले 14 माह में
- 02 पैंथरों को उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेजा
- 400 पैंथर कुंभलगढ़, टॉडगढ़ आदि में दिखे थे पिछली वन्यजीव गणना में
केस एक : रेलमगरा क्षेत्र में खेतों में खड़ी फसलों को जंगली सूअरों एवं नील गायों से बचाने के लिए काश्तकारों द्वारा लगाए गए फंदे में फंसने से 28 जनवरी 2023 को पैंथर की मौत हो गई थी। क्षेत्र के चराणा से गवारड़ी मार्ग पर मृत मिले पैंथर के शव का पीपरड़ा नर्सरी में पोस्टमार्टम करवाया गया था। इसमें फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए लगाए गए फंदे से ही पैंथर की मौत होने के साथ मृत पैंथर के नाखून एवं खाल सही सलामत होने से किसी भी प्रकार के शिकार की संभावनाओं को नकार दिया गया था।
केस दो : खमनोर के गुर्जरगढ़ गांव की आबादी से आगे जंगल में 12 जून 2022 को आपसी संघर्ष में मादा पैंथर की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान मादा पैंथर के सिर एवं शरीर पर जख्म के निशान मिले थे। इसी प्रकार 23 अप्रेल 2022 को मचींद के जंगल में मादा पैंथर का शव मिला था। पोस्टमार्टम में भूख-प्यास से कमजोर होने के कारण हमलावर पैंथर का मुकाबला नहीं कर पाई थी। उसकी सांस की नली टूट गई थी और मुंह से भी खून निकल रहा था। इसी प्रकार 18 मार्च 2023 को मोर खमनोर की सेमा पंचायत के मलीदा क्षेत्र स्थित डीपी में फंसे मोर को खाने के लिए वह डीपी पर कूद गई। इससे मादा पैंथर की मौत हो गई थी।
जिले में पिछले वित्तीय वर्ष से अब तक करीब 14 पैंथरों की मौत हुई है। इनकी मौत का कारण बीमारी, वृद्धावस्था और दुर्घटना होना है।
- ए. एन. गुप्ता, उपवन संरक्षक, वन विभाग राजसमंद

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