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3 फायरिंग कर भागे, देसी कट्टा और 6 कारतूस मिले

ग्रामीणों की पिटाई से उसकी मौत हो गई। चोर के पास से एक देसी कट्ठा, 6 कारतूस और सरिया मिला है।रुदावल थाना प्रभारी महावीर प्रसादने बताया कि गांव कंजौली निवासी अवाती कोली के घर रात में सवा दो बजे चार चोर घुसे जिन्हें पड़ोसी ने देख लिया। जाग होने पर चोर दोराउण्ड फायरिंग करते हुए खेतों में भाग गए।

एक चोर लकड़ियों के ढेर में छिप गयाजिसे ग्रामीणों ने पकड़ लिया और उसे बंधक बनाकर पीटना शुरू कर दिया। सूचना पर रुदावल पुलिस मौके पर पहुंची और चोर को सीएचसी लेकर आई जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बताया कि मृतक चोर की शिनाख्त अलीगढ़ यूपी हाल गांव गुज़रबलाई निवासी राजु बावरिया पुत्र बदन सिंह बावरिया के रूप में हुई है।

सुचना पर पुलिस के के आलाधिकारी, एमआईयू, एफएसएल व डॉग स्काउड की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए।

दो दिन में दूसरी घटना
सोमवार को दौसा जिले के आलूदा की ककरोड़ा ढाणी में चोरी व लूट की वारदात को अंजाम देने आए पांच बदमाशों ने ग्रामीणों पर फायरिंग कर दी थी, जिसके एक युवक घायल हो गया। गुस्साए ग्रामीणों ने दो बदमाशों की लाठी- डंडों से जमकर पिटाई की, जिससे एक की मौत हो गई।

चाक निराश, हाथ हताश

Wednesday 24 May 2023 10:27 AM UTC+00

pots news bharatpur भरतपुर. गर्मियों में यदि कहीं मिट्टी का घड़ा रखा दिख जाए तो हमारी बांछे खिल जाती है और ठंडे पानी की आस हमें यहां खींच ही लाती है। आज भले ही आधुनिक युग में ठंडे पानी के लिए फ्रिज और वाटरकूलर आ गए हों, लेकिन देशी मटकों की बात ही कुछ और होती है। लेकिन इन मटकों को गढऩे वाले हमारे देशी इंजीनियर इन्हें बनाने में किन समस्याओं से जूझ रहे हैं। इससे किसी को कोई वास्ता नहीं होता। यही कारण है कि आधुनिकीकरण के इस युग में अब भरतपुर जैसे शहर में भी देशी घड़ा बनाने की पीली और काली मिट्टी की कमी होने लगी है। इसके चलते सदियों से मिट्टी के घड़े सहित अन्य उत्पाद बनाने वाले कुंभकार अब दूसरे शहरों से बने मिट्टी के बर्तनों पर आश्रित हो गए हैं।
इन दिनों शहर में अनेक चौराहों पर मटके बिक रहे हैं। लेकिन इन घड़ों में शहर का देशी घड़ा कहीं गुम हो गया है। अधिकतर जगह बिक रहे ये घड़े अहमदाबाद, जयपुर और सीकर सहित अन्य शहरों के हैं। शहर के कुंभकारों के अनुसार वर्तमान में शहर और उसके आसपास पीली और काली मिट्टी की उपलब्धता लगभग समाप्त हो गई है। इसके चलते अब उन्हें घड़ा बनाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए अधिकतर कुंभकार अब गुजरात के अहमदाबाद और प्रदेश के जयपुर, सीकर से आ रहे मटकों पर आश्रित हैं और इन्हें ही बेच रहे हैं। ऐसे में कई कुंभकार आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अब अपने पेशे से ही दूरी बना रहे हैं।
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कई बार बताई समस्या नहीं हुआ समाधान
प्रजापति विकास सेवा समिति भरतपुर के शहर अध्यक्ष सोहनलाल का कहना है कि मटका बनाने में काली और पीली मिट्टी का उपयोग होता है। यह मिट्टी चिकनी होती है। पहले शहर के कुछ इलाकों में मिट्टी मिल जाती थी और वे खोदकर ले आते थे। इसके अलावा कुओं और नलकूपों की खोदाई में भी चिकनी मिट्टी बाहर आती थी। लेकिन अब मिट्टी न मिलने से कुंभकार पेशे से दूरी बना रहे हैं। सोहनलाल ने बताया कि वे मिट्टी उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग को भी मिलकर ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन उनकी समस्या पर सुनवाई नहीं हो रही।
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बाहर के मटके बेचना मजबूरी
शहर के कुंभकार ओमप्रकाश ने बताया कि मिट्टी के बर्तनों को बनाने वाली चिकनी मिट्टी की वर्तमान में शहर में उपलब्धता बहुत कम हो गई हैं। इसके चलते कुंभकार अब देशी मटकों को बनाने की बजाय बाहर के मटकों को बेचने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि बाहर से मटके खरीदकर बेचने में उन्हें माल एक साथ लेना होता है। इसमें टूट-फूट की जिम्मेदारी भी उनकी होती है। दूसरा इन्हें खरीदकर बेचने के लिए अधिक पूंजी की जरूरत होती है। इसलिए कई कुुंभकार पुश्तैनी कार्य से दूरी बना रहे हैं।
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भरतपुर। गुर्जर समाज को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इसके तहत इस चुनावी साल में गुर्जर समाज एकबार फिर पटरियों पर बैठ सकते हैं। गुर्जर आरक्षण आंदोलन की 15वीं बरसी के मौके पर गुर्जर समाज एकबार फिर फिर हुंकार भरेगा। इसको लेकर राज्य सरकार को भी चेतावनी दी गई है। भरतपुर के बयाना के पीलूपुरा में आयोजित कार्यक्रम में गुर्जर नेता विजय बैंसला सहित समाज के कई नेता और बड़ी संख्या में समाजबंधु शामिल हुए। इस दौरान गुर्जर नेता विजय बैंसला ने कहा कि अभी तक राजस्थान सरकार ने समाज की कई मांगें पूरी नहीं की हैं। बैकलॉग जैसे कई मांगे अभी तक विचाराधीन हैं। अब समाज इन सभी मांगों को लेकर सरकार के साथ वार्ता करेगा है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार के साथ सकारात्मक बात होगी और सरकार जल्द ही मांगें पूरी करेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि समाज की मांगे पूरी नहीं हुई तो समाज फिर से सड़क और पटरी पर बैठ सकता है।

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गुर्जर समाज के लोगों ने हाल ही में पीलूपुरा शहीद स्थल पहुंचकर श्रृद्धांजलि दी। इस मौके पर गुर्जर नेता विजय बैंसला और अन्य लोग यहां धरना दे रहे 372 रीट अभ्यर्थियों से भी मिले। विजय बैंसला ने कहा कि अभी तक वर्ष 2013 से 2018 तक की भर्ती के बैकलॉग का मामला, प्रक्रियाधीन भर्तियों में 5 फीसदी आरक्षण, 35 फीसदी शिथिलता का मामला जैसी मांगे अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि एक बार फिर सरकार के साथ वार्ता होने वाली है। उसके आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे। विजय बैंसला ने बताया कि 30 मई को कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की प्रतिमा का कोटा में अनावरण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे।

आपको बता दें कि पीलूपुरा गुर्जर आरक्षण आंदोलन की 15वीं बरसी पर हिंडौन स्टेट हाईवे स्थित स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजय बैंसला सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों और गुर्जर समाज के सैकड़ों लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही 2 मिनट का सामूहिक मौन रखकर आंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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इस दौरान आयोजित हुई सभा में रीट 2018 भर्ती में बाकी 4 फीसदी आरक्षण मिलने के बाद एमबीसी वर्ग के लिए रिजर्व रखे गए 372 पदों पर नियुक्ति का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। अधिकतर वक्ताओं ने अपने सम्बोधन में इस मुद्दे को लेकर सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए एक बार फिर से आंदोलन करने की बात कही।

भरतपुर. Jal Jeevan Mission Yojana के तहत शुरू की गई हर घर जल पहुंचाने की योजना के तहत चार साल में सेवर, नदबई और कुम्हेर ब्लॉक के 135 गांवों से से 66 गांवों में पानी पहुंच गया है, लेकिन हकीकत में नल से पानी निकल ही नहीं रहा है। कहने को तो 45 मिनट की जलापूर्ति होती है, लेकिन गांव के कुछ इलाकों में मुश्किल से दो मिनट ही पानी पहुंच रहा है, जिसमें एक बाल्टी पानी भी नहीं भर पाते हैं। ऐसे में भीषण गर्मी के बीच लोग पानी के लिए भटक रहे हैं। उन्हें निजी खर्चे से टैंकर और आरओ से पानी भरना पड़ रहा है। कुछ लोग तो दूसरों के टैंकर से एक-दो बाल्टी पानी भरकर दिन व्यतीत कर रहे हैं।
जल जीवन मिशन योजना का कार्य शुरू हुआ तो लोगों को लगा कि अब तो जलापूर्ति पूरी मिलेगी। इसी आस में लोगों ने जन सहयोग राशि जमा कराकर कनेक्शन भी करा लिए और नलों से पानी भी शुरू हो गया। सर्दियों में पानी ठीक आ रहा था, लेकिन गर्मी शुरू होने के साथ ही पानी छोडऩे लग गया। अभी हालात यह हैं कि नल से एक बाल्टी पानी भी नहीं निकल रहा है।
सेवर ब्लॉक में शामिल बछामदी में एक ओर तो पर्याप्त जलापूर्ति हो रही है, लेकिन उसी गांव में दूसरी ओर पानी ही नहीं पहुंच रहा है। कहने को तो 45 मिनट जलापूर्ति होती है, लेकिन करीब आधे गांव में मुश्किल से दो मिनट नल आते हैं, ऐसे में एक बाल्टी पानी भी हाथ नहीं आता है। ऐसे में लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
लोगों का कहना..
स्थानीय लोग संजय झा एवं बच्चू सिंह का कहना है कि सर्दियों में ठीक ठाक पानी मिल रहा था, लेकिन गर्मी शुरू होने के साथ ही किल्लत शुरू हो गई। गांव के आधे हिस्से में तो जलापूर्ति पर्याप्त हो रही है, लेकिन आधे में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में निजी खर्चे से टैंकर मंगवाना पड़ रहा है। पिछले दो महीने से यहीं हालात हैं। पीने के लिए आरओ से मंगाते हैं तो नहाने-धोने के लिए टैंकर मंगाते हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं तो टैंकर मंगवाने की भी स्थिति में नहीं हैं, ऐसे में वह तो किसी का टैंकर आता है तो दो-चार बाल्टी पानी उसी में लेकर समय व्यतीत कर रहे हैं।
ब्लॉक के इन गांवों की स्थिति....
ब्लॉक वर्क ऑर्डर (गांव) जलापूर्ति शुरू (गांव)
सेवर 87 33
कुम्हेर 40 11
नदबई 108 22
कुल 135 66

इनका का कहना...
गर्मियों में पानी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में आपूर्ति कम हो जाती है। फिर भी बछामदी से अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसा है तो दिखवाकर जलापूर्ति पूरी कराएंगे। फिलहाल चम्बल की जलापूर्ति नहीं होने के कारण भी ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं। उसका जल मिलने के बाद जलापूर्ति पर्याप्त हो जाएगी।
-हरीश गुप्ता, जेईएन, पीएचईडी विभाग, भरतपुर।

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