>>: जानिए अलवर के बुजर्गाें का स्वस्थ रहने का राज, क्या अपनाते हैं तरीका

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खास बात यह है कि ये बुजूर्ग साइकिल चलाकर पूरी तरह से स्वस्थ है। इनको शारीरिक रूप से कोई परेशानी नहीं है। इन बुजर्गाें का जीवन आज के युवाओं से भी ज्यादा खुशहाल है। शहर में होने वाली साइकिल रैली जैसे आयोजनों में युवाओं से तेज साइकिल चलाते हैँ।इनके ना पैरों में दर्द और ना जोडों में दर्द। ये युवाओं से भी ज्यादा तेज चलते हैं। इसका राज है प्रतिदिन साइकिल चलाना। ये लोग नियमित साइकिल चलाकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं और दुसरों को भी साइकिल चलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

एनईबी निवासी भागचंद बताते हैं मेरे पास 2005 मॉडल की साइकिल है। जिसे मैं पूरी तरह से सही रखता हूं। में प्रतिदिन सुबह 5 बजे साइकिल चलाने के लिए घर से निकलता हूं ओर करीब आठ किमी प्रतिदिन साइक्लिंग करता हूं। दिन के जरूरी काम साइकिल से ही करता हूं। कॉलोनी के दूसरे लोगों को भी साइकिल दिलवाई है। साइकिल चलाने से मेरा वजन कम हो गया हैं।
फ्रंडस कॉलोनी ओमप्रकाश शर्मा बताते हैं कि साइकिल मेरी दिनचर्या का हिस्सा हैं। मेरी रोग प्रतिरोधक क्षमता उन युवाओं से अच्छी है जो कि ज्यादा पैदल नहीं चल सकते, साइकिल भी नहीं चला सकते। साइकिल चलाने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
नरूका कॉलोनी निवासी बाबूलाल गुप्ता बताते हैं कि साइकिल चलाना एक व्यायाम है। यही सोचकर मैं सुबह कंपनी बाग तक साइकिल चलाता हूं। दिन में जहां भी जाता हूं साइकिल से ही जाता हूं। साइकिल चलाने से शरीर की सभी मांसपेशियां काम करती हैं। पहले में पुराने दौर की डंडे वाली साइकिल चलाता था लेकिन अब में आजकल आने वाली नई स्टाइल की साइकिल भी आसानी से चला लेता हूं।

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