कभी सर्वे, शिविर तो कभी प्रशिक्षण, वितरण में मसरूफ गुरुजी, पाठशाला में पढ़ाई ठप
- सरकारी पाठशालाओं के शिक्षक नया सत्र शुरू होने के बाद से लगे गैर शैक्षणिक कार्यों में
- महंगाई राहत शिविर से लेकर हाउस होल्ड सर्वे, ओलंपिक, युवा महोत्सव सहित दो दर्जन के करीब गतिविधियों में जुटे शिक्षक
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. कभी कोई सर्वे तो कभी कोई शिविर। किसी दिन खेल आयोजन का जिम्मा तो किसी दिन कोई प्रशिक्षण। इनसे समय मिला तो स्कूल और विद्यार्थियों से जुड़ी योजनाओं के कार्य निपटाने एवं गतिविधियों में व्यस्त रहे। अब जो वक्त बचता है, वह विद्यार्थियों को पढ़ाने में खर्च हो रहा है। यह स्थिति है नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों की।
रही-सही कसर ग्रामीण एवं शहरी ओलम्पिक ने पूरी कर दी है। पहले सत्र की शुरुआत के दो ढाई महीनों में केवल विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिताओं से जुड़ा कामकाज ही होता था। इस बार तो विद्यालयी खेलकूद से पहले ही कई सप्ताह से शिक्षक ओलम्पिक खेल आयोजन में व्यस्त हैं। शिक्षक संगठनों की माने तो तीन से चार दर्जन तरह की गतिविधियां एवं कार्यों की जिम्मेदारी शिक्षकों पर हैं। इनमें करीब आधी तो ऐसी हैं जिनका अध्यापन कार्य व विद्यार्थियों से सीधा कोई वास्ता नहीं है।
पढ़ाई से कम वास्ता
शिक्षक संगठनों के अनुसार पिछले दो माह में शिक्षकों ने अध्यापन से इतर तीन दर्जन से भी ज्यादा ऐसे कार्य किए हैं, जिनका पढ़ाई से ज्यादा कोई वास्ता नहीं था। इनमें से कई कार्य तो अब भी किए जा रहे हैं। शिक्षकों ने हाउस होल्ड सर्वे, महंगाई राहत शिविर, प्रशासन गांवों के संग शिविर, युवा महोत्सव, एफएलएन व प्रधानाचार्य ट्रेनिंग, गुड टच बेड टच ट्रेनिंग, आईपीआर अचल सम्पत्ति, स्वीप कार्यक्रम, मतदाता जागरुकता, दूध वितरण, मोबाइल वितरण, सडक़ सुरक्षा व संविधान की शपथ, आधार ऑथेंटिकेशन, जनाधार ऑथेंटिकेशन आदि कार्य संपादित किए हैं।
यह निरंतर जिम्मे
कई ऐसे कार्य हैं जो शिक्षकों के नियमित रूप से एवं निरंतर जिम्मे हैं। हालांकि यह कार्य व गतिविधियां शिक्षा से ही जुड़ी हुई हैं। इनमें आईसीटी लैब, ब्रॉड बैंड कनेक्शन, नवोदय फॉर्म, इंस्पायर अवार्ड, नो बैग डे, अब्दुल कलाम व्यक्तित्व विकास योजना, नि:शुल्क पुस्तक वितरण, उड़ान सैनेटरी नेपकिन योजना, डिजिटल प्रवेशोत्सव, विधानसभा प्रश्न, शाला सिद्धि, उपचारात्मक शिक्षण, छात्रवृत्ति, पालनहार योजना, आपकी बेटी योजना, राजश्री, यशस्वी योजना, दीक्षा पर कॉइन इक_ा करो योजना, विफ्स टेबलेट वितरण योजना, ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना, डायल फ्यूचर योजना, बोर्ड आवेदन फॉर्म, शाला दर्पण पर विद्यार्थी उपस्थिति, स्टाफ उपस्थिति आदि कार्य शामिल हैं।
खेलों में व्यस्त
जब से नया शिक्षा सत्र शुरू हुआ है, तब से शिक्षक खेलों में व्यस्त हैं। विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन में वैसे भी कई सप्ताह तक शिक्षक व्यस्त रहते हैं। अब ग्रामीण व शहरी ओलम्पिक खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन का अतिरिक्त भार भी पूर्णत: शिक्षा विभाग और शिक्षकों के ही जिम्मे है। ऐसे में शिक्षा सत्र से लेकर अब तक का समय प्रवेशोत्सव, खेल आयोजन आदि में ही बीता है।
भूलते जा रहे मुख्य कार्य
राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा के प्रदेश प्रवक्ता बसन्त कुमार ज्याणी कहते हैं कि पिछले कुछ समय से शिक्षकों पर निरंतर गैर शैक्षणिक कार्यों का जिम्मा डाला जा रहा है। स्थिति यह है कि शिक्षा विभाग में पढ़ाई के अलावा अन्य तमाम कार्यों की ऐसी भरमार है कि शिक्षक भूलते ही जा रहे हैं कि हमारा मुख्य कार्य क्या है। विद्यालयों में अध्यापन कार्य गौण होता जा रहा है। यह स्थिति शिक्षा के लिए चिंताजनक है।