>>: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नही मिल रहा फोन का रिर्चाज, गोद भराई बजट भी चल रहा है बकाया

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टोंक. राज्य सरकार महिलाओं को नि:शुल्क मोबाइल देकर भले ही वाहवाही लूट रही हो। लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्व में दिए मोबाइल का रिचार्ज कराने पर कोई विचार नहीं कर रही है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निजी रुपयों से मोबाइल रिचार्ज करवाना पड़ रहा है। इसी प्रकार आंगनबाडी केन्द्रों पर दो बार सामुदायिक गतिविधियों के आयोजन के लिए मिलने वाली 500 रूपए की राशि भी नहीं मिल रही है।

यह राशि भी आंगनबाडी कार्यकर्ता को अपनी ओर से खर्च करनी पड़ रही है। दोनों ही कार्यों के लिए राशि नहीं मिलने से उन पर आर्थिक भार आ रहा है। राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर होने वाले कामकाज को ऑनलाइन करने के लिए मोबाइल फोन दिए थे। टोंक जिले में भी महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से वर्तमान में कुल 1486 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। टोंक शहरी में 101 व ग्रामीण क्षेत्र में 258 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। इनमें से 248 मिनी आंगनबाड़ी उपकेन्द्र शामिल है।


सितम्बर 2022 में मिले थे मोबाइल:
आंगनबाड़ी केन्द्र के कार्य की ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड करने के लिए उनको सितम्बर 2022 में विभाग की ओर से माबाइल फोन दिए गए थे। तब एक ही बार रिर्चाज के लिए पैसे दिए गए थे। उसके बाद से कम से कम 269 का रिचार्ज हर माह करवाना पड़ रहा है।

हैंग होते हैं मोबाइल:
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनको दिए गए मोबाइल फोन की क्वालटी हल्की है। साथ ही स्टोरेज क्षमता भी कम होने के कारण प्रतिदिन का डाटा अपलोड़ करने पर हैंग होता है। इसलिए कई बार स्वयं के अन्य मोबाइल फोन से काम करना पड़ता है।

ये भरना होता है मोबाइल से:
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्हें कार्य क्षेत्र में होने वाले फील्ड सर्वे, पोषाहार की रिपोर्ट, गर्भवती महिलाओं, किशोरियों व बच्चों का रिकॉर्ड, टीकाकरण व सैनिटरी नैपकिन वितरण के फोटो व डिटेल सब विभागीय एप पर मोबाइल पर ही देना होता है।

मानदेय भी दो बार में:
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दो प्रकार से मानदेय मिलता है। इनमें केन्द्र सरकार की ओर से 4562 व राज्य सरकार की ओर से 4545 रुपए प्रतिमाह मिलता है। लेकिन ये भी समय पर नहीं मिलता है।


ज्ञान समेत बौद्धिक विकास को बढ़ाना
आंगनबाडी केन्द्रों में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। इसका उदे्दश्य बच्चों को बचपन से ही शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता आदि के बारे में बताना होता है। बच्चों में आचरण व व्यवहार के माध्यम से आत्मविश्वास जगाना, रंगों की पहचान, वर्गीकरण, मिलान, संख्या ज्ञान विकास को बढ़ाना है।


सामूदायिक गतिविधि के लिए भी नहीं मिल रहा बजट
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दो बार सामूहिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इनमें आठ माह की गर्भवती महिला की गोद भराई, सुपोषण दिवस, जन स्वास्थ्स दिवस, अन्नाप्राशन व प्रवेश उत्सव आदि के आयोजन किए जाते हैं। इनके लिए प्रत्येक केन्द्र को 500 रुपए का भुगतान दिया जाता है।

जिले में यहां इतने केन्द्र
टोंक जिले में कुल 1486 आंगनबाडी केन्द्र संचालित है। इनमें टोंक शहर में 101 व ग्रामीण में 258, देवली में 210, निवाई में 244, अलीगढ़ में 210, मालपुरा में 284 व टोडारायङ्क्षसह (केकड़ी जिला) में 179 आंगनबाडी केन्द्र है।

इस बढ़ती महंगाई में अल्प मानदेय में घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। मोबाइल रिचार्ज व सामुदायिक गतिविधियों के लिए मिलने वाली राशि के लिए विभाग को कई बार मौखिक व लिखित में कहा है। इसी प्रकार कार्यकर्ता को मानदेय भी दो बार में मिल रहा है। उसको भी सरकार एक ही बार में दे।
शीला विजय, अध्यक्ष टोंक जिला महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ।

-उच्चाधिकारियों को पत्र लिख कर बजट मांगा है। बजट मिलते ही नियमानुसार कार्यकर्ता को राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। दो बार में मिलने वाले मानदेय को भी एक ही बार में दिए जाने के लिए सरकार को पत्र लिखा है।
सरोज मीणा, उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग टोंक।

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