>>: Monsoon Update: अगस्त महीने में मानसून ने तरसाया, लेकिन सितंबर में होगी झमाझम बारिश, IMD का नया अलर्ट

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सांगोद। सांगोद तहसील क्षेत्र में इस बार बारिश का आंकड़ा सात सौ एमएम को भी नहीं छू सका। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कई बार क्षेत्र में बारिश का आंकड़ा पांच सौ एमएम को भी नहीं छू पाया था। वहीं इस बार सावन के दो माह थे तो लोगों को भरपूर बारिश की उम्मीद थी। लेकिन सावन के दोनों महीने खासकर अगस्त माह ने लोगों को बारिश के लिए खूब तरसाया। इस माह अंतिम हल्की बारिश 20 अगस्त को 15 एमएम दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद बारिश नहीं हुई। बीते दस दिनों से क्षेत्र में आसमान से बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरी। कई बार आसमान में काली घटाओं का जमावड़ा भी लगा, लेकिन लोगों की आंखें बारिश को तरसती रही।

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बता दें कि मानसून की ट्रफ लाइन खिसक कर हिमालय की तलहटी में चली गई है। इस वजह से राजस्थान में मौसम शुष्क हो गया है। मौसम विभाग का अलर्ट है कि 1-7 सितम्बर तक राजस्थान के कई जिलों में हल्की से कम बारिश होगी। पर मानसून पर लगा ब्रेक सितम्बर के दूसरे सप्ताह में टूट सकता है। मानसून ब्रेक टूटने के बाद सितंबर महीने के दूसरे सप्ताह में झमाझम बारिश की संभावना है। उल्लेखनीय है कि सांगोद क्षेत्र में इस साल अभी तक महज 666 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो औसत बारिश से भी काफी कम है। गत वर्ष क्षेत्र में 1253 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। हालांकि छह साल पहले वर्ष 2017 में भी पूरे मानसूनी सीजन में महज 523 एमएम बारिश हुई थी। हालांकि उस दौरान बारिश नियमित अंतराल में होती रही जो लोगों को अखरी नहीं। इस बार बारिश का अंतराल ज्यादा होने से बारिश लोगों की परेशानी और चिंता दोनों बढ़ा रही है।

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पहले भी हुई ऐसी स्थिति
बारिश का बीते 64 सालों का इतिहास देखें तो क्षेत्र में इससे पहले भी कई बार बारिश का आंकड़ा पांच सौ एमएम को भी नहीं छू पाया। स्थानीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष में दर्ज वर्ष 1959 से अभी तक की बारिश के रिकॉर्ड में वर्ष 1968 में तो क्षेत्र में महज 418 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद वर्ष 1980 में 423 एमएम, वर्ष 2002 में 439 एमएम, वर्ष 2009 में 476 एमएम, वर्ष 2010 में 415 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इन बीते 64 सालों में 14 बार बारिश ने एक हजार एमएम से ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड भी बनाया। वर्ष 1959 के बाद सांगोद क्षेत्र में सबसे ज्यादा बारिश वर्ष 2011 में हुई थी। इस दौरान क्षेत्र में 1634 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इससे पहले वर्ष 1961 में भी 1540 एमएम बारिश हुई थी।

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