>>: Video फुटपाथ परिवार काट रहा जिन्दगी, बेटियों को पढ़ाने का जुनून

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चन्द प्रकाश जोशी

अजमेर. रिक्शा एवं मोटरसाइकिल से बनाई जुगाड़ की गाड़ी में दिन में खिलौने की दुकान और रात में यही आशियाना। सड़क किनारे दिनभर पति खिलौने बेचकर आजीविका के लिए कुछ कमाता है तो वहीं फुटपाथ पर तिरपाल बिछाकर पत्नी कमला अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाती नजर आती है। बेटियों की जिन्दगी संवारने का खुबसूरत ख्वाब आंखों में लिए छह सदस्यों का यह परिवार फिलहाल घुमंतु जिंदगी बसर कर जिंदगी की जंग लड़ रहा है और दुश्वारियों से लोहा ले रहा है. . .।
अजमेर शहर के किश्चियनगंज क्षेत्र में सड़क किनारे जुगाड़़ की गाड़ी में एक युवक खिलौने बेचता मिला। मोटरसाइकिल व रिक्शानुमा गाड़ी के ऊपर खिलौने टंगे मिले तो दो बच्चे गाड़ी में सोते-बैठे नजर आए। वहीं युवक की पत्नी कमला अपनी दोनों बेटी किरण (10), लक्ष्मी (6) को पढ़ाती मिली। मूल रूप से राजसमंद के पास बागड़ौला निवासी दयाराम ने बताया कि वह खिलौने बेचकर अपना परिवार पाल रहा है। जब गांव में रहता है तो बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। लेकिन कर्जा होने और काम धंधा नहीं होने से साल में पांच-छह महीने अजमेर में खिलौने बेचने आता है।


क्यू फॉर क्वीन. .एल फॉर लेक

कमला ने बताया कि वह आठवीं तक पढ़ी हुई हैं। पति खिलौने बेचते हैं तब दिन में दो-तीन घंटे बेटे-बेटियों को अंग्रेजी, गणित व हिन्दी आदि पढ़ाती हैं। छोटी बेटी को क्यू फॉर क्वीन, एल फॉर लेक पढ़ाती मिली। उसने हिन्दी-अंग्रेजी का बेटी को उच्चारण करवाया। कमला बेटियों की जिन्दगी संवारना चाहती हैं। बेटे देवेन्द्र (13) एवं जितेन्द्र (7) को भी पढ़ाती है ताकि वे भी काबिल बन सकें।


जुगाड की गाड़ी ही आशियाना

दयाराम ने बताया कि गाड़ी में ही चाय-खाना बनाने का सामान है। इसी में सो जाते हैं। वैशालीनगर, क्रिश्चियनगंज व आसपास के क्षेत्र में खिलौने बेचकर परिवार का गुजर-बसर करते हैं। जो बचत होती है, उसे कर्जा चुकाने में देते हैं। लॉकडाउन के बाद हालात कमजोर हो गई।

बच्चों की सुरक्षा की रहती है चिंता

दयाराम व कमला ने बताया कि रात होने पर वे मदारगेट व स्टेशन पर चले जाते हैं। वहीं गाड़ी खड़ी कर देते हैं। सभी वहीं सो जाते हैं। दयाराम ने बताया कि बच्चों व परिवार की सुरक्षा की चिंता रहती है। यह क्षेत्र रात में भी चमन रहता है। लोग आते-जाते रहते हैं, इसलिए वहां थोड़ी नींद निकाल लेते हैं।

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