>>: दिल्ली और ​​भिवाड़ी की आबोहवा को कौन बिगाड़ रहा

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राजधानी दिल्ली की आबोहवा अलवर व भिवाड़ी को प्रदूषित करती रही है। यही कारण है कि अलवर की हवा में प्रदूषण का स्तर 250 व भिवाड़ी का 450 के पार पहुंच रहा है। खास बात यह कि अलवर में न पराली जलाने की समस्या और न ही उद्योगों का ज्यादा धुआं, फिर भी भिवाड़ी की देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिनती होती रही है।

अलवर एवं भिवाड़ी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल है। इस कारण यहां करीब तीन से चार महीने हवा प्रदूषित रहती है। इसका असर यह हुआ कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ग्रेप की पाबंदियां अलवर के उद्योगपतियों, खान संचालकों, क्रशर संचालकों, ईंट भट्टा संचालकों को झेलनी पड़ती है। इससे बड़ी संख्या में लोगों के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न होता रहा है। वहीं जिले में विकास कार्यों की गति भी धीमी करनी पड़ती है।

अलवर व भिवाड़ी में प्रदूषण की यह वजह

अलवर व भिवाड़ी में प्रदूषण का मुख्य कारण दिल्ली और हरियाणा की आबोहवा है। दिल्ली में प्रदूषण का कारण पंजाब व हरियाणा में जलनी वाली पराली है। जबकि अलवर जिले में कहीं भी पराली जलाने की समस्या नहीं है। वहीं अलवर में उद्योग इकाई भी ज्यादा नहीं है, जो धुआं छोड़ते हो। साथ ही भिवाड़ी में उद्योग भी स्थाई हैं और पूरे साल क्रियाशील रहते हैँ। इसके बाद भी अलवर व भिवाड़ी में प्रदूषण की समस्या अक्टूबर से जनवरी तक ज्यादा रहती है।

अलवर व भिवाड़ी में सड़कों की धूल का प्रदूषण

अलवर व भिवाड़ी में प्रदूषण का मुख्य कारण सड़कों पर वाहनों की आवाजाही से उड़ती धूल है। जिले में सड़कों की हालत खराब होने तथा सड़कों के दोनों ओर मिट्टी पड़ी होने से वाहनों के तेज गति से निकलते समय धूल के गुबार उड़ते हैं। यही प्रदूषण का बड़ा कारण है। साथ ही कई उद्योगों में प्रदूषित धुआं को उपचारित करने के यंत्र नहीं लगा होना भी प्रदूषण का कारण रहा है। लेकिन सबसे बड़ा कारण दिल्ली व हरियाणा की प्रदूषित हवा है।

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