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मच्छर के डंक और मौसम की दोहरी मार से पड़ रहे बीमार Thursday 16 November 2023 06:10 AM UTC+00 जैसलमेर मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छर जनित डेंगू और मलेरिया बुखार ने अब भी अनेक लोगों को जकड़ रखा है। जिला अस्पताल सहित निजी चिकित्सालयों और चिकित्सकों के क्लिनिकों में बुखार रोगियों के बड़ी संख्या में पहुंचने का दौर जारी है। दूसरी ओर मौसम की मार भी लोगों पर भारी पड़ रही है। जैसलमेर के सरकारी अस्पताल में बुखार पीडि़तों के लिए जाने वाले रक्त नमूनों में डेंगू और मलेरिया दोनों किस्म के बुखार की पुष्टि हो रही है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में गत मंगलवार को एक दिन में आए जांच नतीजों में जैसलमेर निवासी एक व्यक्ति मलेरिया पीएफ का रोगी पाया गया। गौरतलब है कि यह मस्तिष्क ज्वर होता है और इसे बहुत गंभीर माना जाता है। इसी तरह से 3 जने मलेरिया पीवी के रोगी पाए गए। जानकारी के अनुसार 3 पीवी व 1 पीएफ के रोगी कुल 38 जनों की जांच में सामने आए हैं। वहीं दूसरी तरफ डेंगू बुखार भी अब तक अपना असर दिखा रहा है। मंगलवार को सामने आई 35 बुखार पीडि़तों की जांच में 6 जने डेंगू से ग्रस्त पाए गए हैं। इनमें 4 कम उम्र के बच्चे व दो वयस्क हैं। जानकारी के अनुसार गत दिनों चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के उपनिदेशक ने जैसलमेर का दौरा करने के दौरान चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया था कि प्रत्येक बुखार पीडि़त की मलेरिया और डेंगू जांच अवश्य करवाई जाए। इस बीच जैसलमेर में सर्दी का असर शुरू होते ही मौसमी बीमारियों ने भी लोगों को चपेट में लेना आरंभ कर दिया है। बड़ी संख्या में लोग सर्दी-जुकाम, बुखार आदि से पीडि़त हो रहे हैं। दिवाली से पहले और इस दौरान यकायक मौसम में तब्दीली आई है। दिन-रात के तापमान में गिरावट के कारण हल्की ठंडक ने दस्तक दे दी है। जबकि लोग अभी तक गर्मी वाले मूड में दिखाई दे रहे हैं और बहुत कम जनों ने ही गरम व ऊनी कपड़े निकाले हैं। यही कारण है कि सर्दी-जुकाम की जकड़ में आने वालों की तादाद में बढ़ोतरी हुई है। जिला अस्पताल सहित निजी चिकित्सकों के पास रोजाना करीब डेढ़ से दो हजार लोग जांच व उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के पास मरीजों की कतारें लग रही हैं।
अलग से बॉक्स में लगाएं - ट्रोमा के साथ ओपीडी की नई व्यवस्था दूसरी ओर जवाहिर चिकित्सालय में बहिरंग मरीजों को देखने की व्यवस्था यानी ओपीडी का स्थान बदल कर ट्रोमा सेंटर के हॉल में कर दिया गया है। यहां पहुंचने वाले मरीजों को एकबारगी तो नई व्यवस्था के बारे में पता ही नहीं चलता। पीएमओ डॉ. रविन्द्र सांखला ने बताया कि चिकित्सकों की कमी को देखते हुए और मरीजों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा प्रदान करने के लिए यह नवाचार किया गया है। जब उनसे पूछा गया कि इस नई व्यवस्था से ट्रोमा सेंटर की व्यवस्थाओं पर विपरीत असर पडऩे की बात कही जा रही है क्योंकि वहां आपातकालीन अवस्था में आने वाले मरीजों के उपचार में बाहरी लोगों की भीड़ से कई बार बाधा उत्पन्न हो सकती है, इस पर डॉ. सांखला ने कहा कि बहुत कम मौके ही ऐसे आते हैं जब ट्रोमा सेंटर में सडक़ हादसों जैसे आपातकालीन मौके होते हैं। बाकी समय में चिकित्सक यहां बैठ कर आसानी से मरीजों को देखकर उनका जरूरी उपचार कर सकते हैं। डॉ. सांखला ने कहा कि यह एक प्रयोग किया गया है। यह सफल रहने पर इसे लगातार जारी रखा जाएगा और ज्यादा दिक्कत आने पर ओपीडी की पुरानी व्यवस्था लागू की जा सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैसे यह व्यवस्था आमजन के हित में है। उन्हें यहां हर समय चिकित्सक की सेवा मिल सकेगी। पीएमओ ने बताया कि वर्तमान में मौसमी बीमारियों के चलते मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
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