आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार किसी भी व्यक्ति की आय जो उसे ब्याज से प्राप्त होती है, वह अन्य स्रोतों से आय शीर्षक के तहत कर योग्य होती है। ब्याज की आय पर आयकर की दर, किसी व्यक्ति की उस वर्ष में कुल आय के आधार पर जो स्लेब रेट आती है, उससे निर्धारित होती है लेकिन यदि किसी व्यक्ति को बचत खाते से वर्ष में 10000 रुपए तक की ब्याज की आय होती है तो वह कर मुक्त होती है और व्यक्ति यदि वरिष्ठ नागरिक है तो उसके बचत और सावधि सभी खातों में होने वाली ब्याज की आय पर 50 हजार रुपए तक की छूट प्राप्त है। कोई व्यक्ति पीपीएफ या अपनी बेटी के सुकन्या समृद्धि योजना खाते में निवेश करता है तो उससे प्राप्त होने वाले ब्याज की आय कर मुक्त होगी। राष्ट्रीय बचत पत्र पर अर्जित ब्याज की राशि कर योग्य तो होती है, पर उस ब्याज की आय की छूट धारा 80 सी के तहत प्राप्त की जा सकती है। उस आय को कर मुक्त बनाया जा सकता है। बचत खाते से होने वाली ब्याज की आय पर टीडीएस नहीं काटा जाता, पर सावधि खाते से वर्ष में 40 हजार से अधिक ब्याज होने की स्थिति में पूरी राशि पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाता है। इस काटी गई राशि का आयकर रिटर्न भरकर वापस रिफंड लिया जा सकता है या देय आयकर से समायोजित किया जा सकता है। - नितेश नोसादर, इनकम टैक्स एक्सपर्ट