>>: किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही ये खेती, कोरोना के बाद से कई राज्यों में बढ़ी सबसे ज्यादा डिमांड

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Agriculture News: अलवर जिले के लोगों को आंवले की खेती रास आने लगी है। इसके चलते अलवर में आंवले का उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। इन दिनों जिले भर में आंवले की भरपूर आवक होने से हर तरफ पेडों पर लदे आंवले नजर आ रहे हैं। उत्पादन इतना बढ़ा है कि अलवर से बिहार, यूपी, गुजरात सहित अन्य राज्यों में आंवला भेजा जा रहा है। आंवले की बहुत सी प्रजातियां हैं लेकिन अलवर के लोगों को चकैया वैरायटी का आंवला पसंद आ रहा है। कोरोना के बाद पिछले तीन साल में ही आंवला का रकबा 40 हेक्टेयर में बढ़ गया है। नीमराणा, कोटकासिम, बहरोड़ आदि क्षेत्रों में भरपूर पैदावार हो रही है।

30 हेक्टेयर से बढ़कर 60 हेक्टेयर में हो रहा उत्पादन : वर्ष 2005 से 2009 तक अलवर में आंवला की पैदावार 1600 हैक्टेयर में हो रही थी। इससे भाव कम हो गए और लोगों ने आंवले के पौधे हटा दिए। इससे आंवले की पैदावार घट कर आधी से भी कम रह गई। वर्ष 2010 .11 सेे 2020.21 तक मात्र 30 हेक्टेयर में ही आंवला लगा था। पैदावार से भाव फिर से बढ़ गए। कोरोना के बाद आंवला की पैदावार 60 हेक्टेयर में होने लगी है।
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जिले में चल रही तीन प्रोसेसिंग यूनिट
आंवले के अच्छे उत्पादन के चलते जिले में आंवला प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई गई है। जिसमें आंवला के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बीबीरानी व कोटकासिम के समीप धर्मदेव आर्य ने एक हजार मेट्रिक टन की प्रोसेसिंग यूनिट लगाई है। इसमें आंवला कैंडी, आंवला मुरब्बा, पाउडर, त्रिफला, आंवला पाचक सहित अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही एमआईए में एक हजार मेट्रिक टन की आंवला यूनिट लगाई गई है। नीमराणा में 60 मेट्रिक टन की यूनिट लगाई गई है जो कि फायदे का सौदा साबित हो रही है।
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औषधीय गुणों के चलते बढ़ी मांग
अलवर में आंवला की पैदावार में लोग फिर से रूचि ले रहे हैं। आंवला का उत्पादन जो बहुत कम हो गया था, वह कोरोना के बाद अब फिर से बढ़ने लगा है। जिले में 60 हेक्टेयर में आंवला की पैदावार हो रही है। कम लागत में देशी फल मिलते हैं। चकैया वैरायटी की पैदावार हो रही है।
लीलाराम जाट, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग, अलवर

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