>>Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment! |
जारिए आंवले की कौनसी किस्म लगाना है फायदेमंद, होगी लाखों की कमाई, पढे़ यह खबर Saturday 23 December 2023 06:44 AM UTC+00 आंवले की बहुत सी प्रजातियां हैं लेकिन अलवर के लोगों को चकैया वैरायटी का आंवला पसंद आ रहा है। कोरोना के बाद पिछले तीन साल में ही आंवला का रकबा 40 हेक्टेयर में बढ़ गया है। नीमराणा, कोटकासिम, बहरोड़ आदि क्षेत्रों में भरपूर पैदावार हो रही है। 30 हेक्टेयर से बढ़कर 60 हेक्टेयर में हो रहा उत्पादन वर्ष 2005 से 2009 तक अलवर में आंवला की पैदावार 1600 हैक्टेयर में हो रही थी। इससे भाव कम हो गए और लोगों ने आंवले के पौधे हटा दिए। इससे आंवले की पैदावार घट कर आधी से भी कम रह गई। वर्ष 2010 -11 सेे 2020-21 तक मात्र 30 हेक्टेयर में ही आंवला लगा था। पैदावार से भाव फिर से बढ़ गए। कोरोना के बाद आंवला की पैदावार 60 हेक्टेयर में होने लगी है। जिले में चल रही है तीन प्रोसेसिंग यूनिट आंवले के अच्छे उत्पादन के चलते जिले में आंवला प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई गई है। जिसमें आंवला के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बीबीरानी व कोटकासिम के समीप धर्मदेव आर्य ने एक हजार मेटि्रक टन की प्रोसेसिंग यूनिट लगाई है। इसमें आंवला कैंडी, आंवला मुरब्बा, पाउडर, त्रिफला, आंवला पाचक सहित अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही एमआईए में एक हजार मेटि्रक टन की आंवला यूनिट लगाई गई है। नीमराणा में 60 मेटि्रक टन की यूनिट लगाई गई है जो कि फायदे का सौदा साबित हो रही है। औषधीय गुणों के चलते बढ़ी मांग अलवर में आंवला की पैदावार में लोग फिर से रूचि ले रहे हैं। आंवला का उत्पादन जो बहुत कम हो गया था, वह कोरोना के बाद अब फिर से बढ़ने लगा है। जिले में 60 हेक्टेयर में आंवला की पैदावार हो रही है। कम लागत में देशी फल मिलते हैं। चकैया वैरायटी की पैदावार हो रही है। लीलाराम जाट, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग, अलवर। |
| You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at rajisthanews12@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription. |
