>>: religion-culture: जाने क्याें ये लोग अमरीका व सउदी अरब से आ गए पाली

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ये धर्म के प्रति आस्था व भारतीय संस्कारों की जड़ों से जुड़े रहने का जज्बा ही है कि सात समंदर पार विदेशों में व्यवसायरत व नौकरीपेशा लोग भी देश के तीर्थ स्थलों के दर्शनों के लिए लालायित है। पाली से शत्रुंजय, गिरनार, बाहुबली तीर्थ यात्रा संघ के तहत 25 दिसम्बर को ट्रेन रवाना होगी, जिसके तहत देशभर के आठ तीर्थस्थलों के दर्शन किए जाएंगे। जैन युवा संगठन के तत्वावधान में जाने वाली इस धर्म, आस्था व संस्कारों की ट्रेन में सवार होने के लिए प्रदेश व देशवासी ही नहीं, वरन विदेशों में निवासरत जैन समाज के लोग भी लालायित है। वे अमरीका व सउदी अरब में अपने सारे कामों से अवकाश लेकर हवाई यात्रा कर पाली पहुंचे हैं। अब इंतजार कर रहे हैं, रेल के सीटी बजाने का और उसमें सवार होने का, जिससे वे बच्चों, माता-पिता व सगे-संबंधियों के साथ तीर्थ स्थलों पर भगवान के श्रीचरणों में शीश नवा सके। इसके जरिए वे भारत के ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन कर देश के गौरवशाली इतिहास को जान सकेंगे।

पिछली यात्रा में आया था आनन्द, तो फिर लौटे
श्वेता मेहता सउदी अरब में रहती है। उनके पति भरत मेहता वहां जॉब करते हैं। वे पिछली बार भी तीर्थ यात्रा संघ के साथ थी। इस बार भी पति व दो बच्चों के साथ जा रही है। उनका कहना है कि संघ के साथ यात्रा करने से संस्कारों के साथ धर्म का ज्ञान होता है। सभी के साथ यात्रा करने का आनन्द ही कुछ और होता है। इस तीर्थ यात्रा ट्रेन में सुविधाएं भी सभी तरह की है। इसी कारण वे बच्चों के साथ आई है। उन्होंने बताया कि वैसे तो हम वर्ष में एक बार ही जोधपुर या पाली आते हैं, लेकिन इस बार तीन माह में ही वापस लौटी हूं। यात्रा के वापस पाली आने पर वे 11 जनवरी को ही सउदी लौट जाएंगी।

religion-culture: जाने क्याें ये लोग अमरीका व सउदी अरब से आ गए पाली

तीन वर्ष पहले नहीं जा सका, इस बार नहीं गंवाया मौका
अमरीका के कैलिफोर्निया में रहने वाले कुणाल मूथा वहां एक कम्पनी में प्रोग्राम मैनेजर है। वे तीर्थ यात्रा ट्रेन का हिस्सा बनने के लिए पाली आए है। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले जब तीर्थ यात्रा ट्रेन गई थी। उस समय वे पाली में थे, लेकिन यात्रा पर नहीं जा पाए। इस बार तीर्थ यात्रा स्पेशल ट्रेन जाने का पता लगते ही तुरन्त योजना बनाई और अवकाश लेकर पाली आ गया। उनका मानना है कि इस प्रकार संघ व परिजनों के साथ यात्रा करने से आस्था व धर्म के प्रति भाव जागृत होता है। उनके साथ उनके पिता नौरतन मूथा व मां कुसूमदेवी मूथा भी यात्रा पर जा रहे हैं।

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