>>: अब यहां पर पैंथरों ने 1838 मवेशियों को बनाया शिकार...पढ़े पूरा मामला

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राजसमंद जिला अरावली की पहाडिय़ों से घिरा हुआ है। यहां का अधिकांश भू-भाग पहाड़ी है। वन क्षेत्र में कुंभलगढ़ और रावली टॉडगढ़ अभ्यारण भी आता है। वनक्षेत्र 508.60 वर्गकिमी क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें असंख्य वन्यजीव है। वर्ष 2022 की वन्यजीव गणना के अनुसार 223 पैंथर बताए गए हैं। इसके अलावा 20-25 बाहरी क्षेत्र में बताए थे, लेकिन अब स्थिति इसके विपरित हो गई है। पैंथरों की संख्या 400 से 450 के बीच होने का अनुमान है। इसके कारण अब यह ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्र में भी स्वच्छ विचरण करते दिखाई दे रहे हैं। पैंथरों के मवेशियों पर हमले आदि के मामले बढ़ते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि शहरी क्षेत्र के किशोर नगर पर सडक़ पर बछड़े पर झपट्टा मारते और धोईंदा स्थित रैगर मोहल्ले की छत पर विचरण करता पैंथर सीसीटीवी में कैद हो चुका है। वन विभाग भी पैंथर के लगातार होने वाले मूवमेंट के चलते पिंजरे आदि लगाते हुए परेशान होने लगा है।

475 मृत मवेशियों का 27.13 लाख का भुगतान लम्बित
वन विभाग की ओर पैंथर के हमले से मवेशियों की मौत होने पर मुआवजा दिया जाता है। इसी प्रकार आमजन पर हमला कर घायल होने पर और उसकी मौत हो जाने पर भी मुआवजे के रूप में निर्धारित राशि का भुगतान किया जाता है। पैंथर के हमले से इस वित्तीय वर्ष में 132 पशुओं की मौत पर 8.06 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद अब 475 मवेशियों की मौत पर 27.13 लाख का भुगतान बजट के अभाव में लम्बित चल रहा है। इसमें बकरे-बकरी, भेड़, गाय के बछड़े, गाय-भैंस आदि मवेशी शामिल है।
पैंथर की संख्या बढ़ी, दस पिंजरे नए और बनवाए
जिले में पैंथरों का मूवमेंट लगातार बढ़ता जा रहा है। वन्यजीव गणना 2022 में इनकी संख्या 223 के करीब थी, लेकिन अब बढ़ गई है। पैंथर के मवेशियों एवं आमजन को नुकसान पहुंचाने पर मुआवजा दिया जाता है। पैंथरों का मूवमेंट बढऩे के कारण 10 नए पिंजरे और बनवाए गए हैं, जबकि पहले ही पर्याप्त मात्रा में पिंजरे उपलब्ध है।
- डॉ. आलोक गुप्ता, उप वन संरक्षक वनविभाग राजसमंद

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