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सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन में अटक गया पेंच Saturday 06 January 2024 06:12 PM UTC+00
मियाद निकली तो प्रस्ताव हुआ अमान्य इको सेंसेटिव जाेन के सम्बन्ध में प्रावधान है कि यदि प्रस्ताव 725 दिन में अंतिम प्रकाशन नहीं हो पाता है तो वह प्रस्ताव अमान्य हो जाता है। पूर्व में तैयार किए गए सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन के प्रस्ताव का 725 दिन में अंतिम प्रकाशन नहीं हो पाया। पूर्व में यह प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष लंबे समय तक विचाराधीन रहा। इस पर आमजन की आपत्ति भी मांगी गई और बाद में टिप्पणी के साथ केन्द्र सरकार को भेजा गया, लेकिन इस प्रक्रिया में अनिवार्य 725 दिन की अवधि पूरी हो गई, इस कारण प्रस्ताव को अमान्य कर नए सिरे से सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन का प्रस्ताव तैयार कर गत 2 नवम्बर को प्रारूप प्रकाशन के बाद 60 दिन में आमजन से आपत्ति मांगी गई। यह अवधि भी पूरी हो चुकी है। अब राज्य सरकार अपनी टिप्पणी के साथ इस प्रस्ताव को फिर केन्द्र सरकार के समक्ष भेजेगी, जिसके बाद ही केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम अधिसूचना जारी हो सकेगी। अब और कितना इंतजार सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम प्रकाशन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। कारण है कि इस प्रस्ताव पर आमजन की प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। उसके बाद भी राज्य सरकार इस प्रस्ताव को केन्द्र को भेजेगा, फिर बाद में सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम अधिसूचना जारी हो सकेगी। इको सेंसेटिव जोन प्रस्ताव का प्रारूप दिशा सरिस्का बाघ रिजर्व से सरिस्का और जमवारामगढ़ रिजर्व से उत्तर- पूर्व समान रूप से 0 किमी 01 किमी से 24 किमी दक्षिण- पूर्व 0 किमी से 01 किमी 01 किमी से 10 किमी दक्षिण- पश्चिम 0 किमी से 01 किमी समान रूप से 01 किमी उत्तर- पश्चिम समान रूप से 0 किमी 01 किमीसे 19 किमी अधिसूचना में देरी से जिले को यह नुकसान सरिस्का टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम अधिसूचना में देरी से अलवर जिले को सबसे बड़ा नुकसान रोजगार एवं राजस्व का हो रहा है। इस प्रस्ताव की देरी का सबसे बड़ा प्रभाव खनन क्षेत्र एवं मिनरल उद्योगों पर पड़ रहा है। वहीं सरिस्का की भूमि पर अतिक्रमण, ग्रामीणों से जमीनी विवाद के साथ ही होटल व्यवसाय भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। इसका सीधा असर सरिस्का के पर्यटन पर भी पड़ रहा है। |
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