>>Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment! |
यूआईटी 25 साल में यहां नहीं लगा पाई एक भी ईंट Saturday 03 February 2024 06:01 AM UTC+00 नया अलवर बसाने के लिए 1200 बीघा जमीन घेरकर बैठी यूआईटी...25 साल में एक ईंट तक नहीं लगाई - वर्ष 1998 में देसूला, बहाला, दिवाकरी, एमआईए क्षेत्र में खरीदी गई थी जमीन, दो बार किया अवार्ड - इस जमीन पर बिल्डरों की नजर, 40 बीघा में कुछ समय पहले यूआईटी ने खुद हटाया था कब्जा नगर विकास न्यास (यूआईटी) ने 25 साल पहले नया अलवर बसाने का जो सपना जनता को दिखाया था, वह वहीं का वहीं है। यूआईटी ने साकेत, रोहिणी कॉलोनी बसाने के लिए 1200 बीघा जमीन खरीदी थी लेकिन इसमें एक ईंट तक नहीं लगाई गई। चाहरदीवारी तक नहीं की गई। यही कारण रहा कि 40 बीघा एरिया में अतिक्रमण हो गया जो कुछ समय पहले हटाया गया। इस जमीन पर फिर से बिल्डरों की नजर है लेकिन यूआईटी कॉलोनी बसाने के लिए आगे कदम नहीं बढ़ा पा रही है। इस तरह यूआईटी ने ली जमीन, किया अवार्ड यूआईटी ने वर्ष 1998 में साकेत, रोहिणी बसाने के लिए देसूला, बहाला, दिवाकरी, कैमाला गांव के अलावा एमआईए के पास का एरिया अवाप्त करने का निर्णय लिया। इन क्षेत्रों की करीब 1200 बीघा जमीन ली गई। इसके लिए प्रशासन ने अवार्ड भी घोषित कर दिया। जमीन पर कब्जा लेना था लेकिन वर्ष 2002 में यूआईटी ने जमीन लेने से मना कर दिया। कारण बताया कि यूआईटी के पास पैसे नहीं हैं। यूआईटी ने 3 साल तक इस जमीन को अपने से दूर रखा लेकिन वर्ष 2005 में फिर इस जमीन पर नजर गई। जमीन लेने की इच्छा जाहिर की। अवार्ड फिर किया गया। इस जमीन पर पूरी तरह यूआईटी कब्जा आज तक नहीं कर पाई। कुछ किसान हाईकोर्ट इसलिए पहुंच गए थे कि यूआईटी बार-बार निर्णय बदल रही थी। 10 हजार से ज्यादा बनने थे आवास मालूम हो कि इस कॉलोनी में दस हजार से अधिक आवास बनने थे, जो अपने में प्रदेश की सबसे बड़ी कॉलोनी होती। आधुनिक सुविधाओं से ये लबरेज होनी थी। आईटी पार्क से लेकर विदेशी कंपनियां के दफ्तर भी इस कॉलोनी में खोले जाने थे। इस जमीन के दूसरे हिस्से में मॉल आदि बनाने की भी योजना थी जो अब हवा में है। -- प्रतिक जुईकर, सचिव, यूआईटी |
| You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at rajisthanews12@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription. |
