>>: लापरवाही: कैसे हो कोठारी प्रदूषण मुक्त, एसटीपी से सीधे नदी में जा रहा दूषित पानी

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अफसरों की नाकामी से कोठारी नदी प्रदूषण मुक्त नहीं हो पा रही। गंदगी और कचरे से अटी नदी मैला ढोने का जरिया बन गई है। प्रदूषण मुक्त करने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की पालना भी नहीं हो रही। नदी में प्रतिदिन 35 एमएलडी दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। जबकि शहर में दो एसटीपी लगी है। उनका संचालन सही नहीं हो रहा। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी की अनदेखी के चलते आरयूआईडीपी के अधिकारी नदी को प्रदूषित करने से नहीं चूक रहे।

 

दो एसटीपी फिर भी दूषित पानी नदी में
नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कुवाड़ा में दो एसटीपी संचालित हैं, ताकि नदी का जल प्रदूषित न हो। लेकिन एसटीपी सीवरेज के पानी को पूरी तरह से बिना ट्रीट करे नदी में प्रवाहित कर रहे है। इससे ट्रीट होकर निकलने वाला पानी भी नदियों की सेहत में सुधार नहीं पा रहा है। शहर से रोजाना औसतन 35 से 40 एमएलडी सीवरेज निकलता है। इसके निस्तारण के लिए एक एसटीपी का संचालन जिंदल कर रही तो दूसरी आरयूआईडी। सीवरेज लाइन से शहर के 42 हजार से अधिक घरों को जोड़ा गया है। लेकिन शहर का बड़ा हिस्सा सीवर लाइन से अछूता है। ऐसे में यहां का सीवरेज सीधे नदी में जा रहा है। हालांकि सीवरेज को एसटीपी से जोड़ने का काम जारी है, लेकिन इसमें पूरी सफलता नहीं मिली है। इस कारण मजबूरी में पूरी तरह से बिना ट्रीट हुए पानी को नदी में छोड़ा जा रहा है। यह नदी आगे जाकर बनास तथा बनास से बीसलपुर में मिलती हैं।

बीओडी 10 से कई अधिक
प्रदूषण नियंत्रण मंडल बोर्ड के अनुसार पानी में बीओडी अर्थात बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड की मात्रा 10 से कम होनी चाहिए। लेकिन सही ढंग से ट्रीट नहीं कर सीधे प्रवाहित किए जा रहे सीवरेज में यह 32 तक पहुंच गई। इसके कारण पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर रहा है।

परिषद को जारी करेंगे नोटिस
एसटीपी का पानी कोठारी नदी में छोड़ रहे है इसे लेकर नगर परिषद पर न्यायालय में केस दायर करेंगे। बीओडी 10 से अधिक है तो नोटिस जारी करेंगे।
विनय कट्टा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल बोर्ड

ठेकेदार के खिलाफ करेंगे कार्रवाई
एसटीपी से 42 हजार सीवरेज कनेक्शन जुड़े है। इससे 24 एमएलडी पानी को ट्रीट किया जा रहा। एसटीपी का संचालन सही नहीं कर रहे है तो ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इसकी रिपोर्ट की जांच भी करवाते है।
मोहनलाल मीणा, अधीक्षण अभियन्ता, आरयूआईडीपी

पानी की जांच करवाएंगे
सीवेज को ट्रीटमेंट प्लांट में ठीक तरह से शोधन करने के बाद पानी को नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। ट्रीटमेंट किए पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है तो उसकी जांच करवाएंगे।
हेमाराम चौधरी, आयुक्त नगर परिषद

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