>>: नगर निगम का बजट इस तरह समझें

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नगर निगम : हंगामे के बीच पास हुआ 297 करोड़ का बजट, शहर के विकास पर खर्च होंगे 69 करोड़
- 177.50 करोड़ रुपए वेतन, भत्ते से लेकर सरकारी योजनाओं के अनुदान आदि पर होंगे खर्च

- इस बार निगम 69.12 करोड़ रुपए जुटाएगा, हैरत की बात ये, निगम के पिछले वर्ष के 76 करोड़ बचे
- बोर्ड की बैठक में पार्षद बोले, बजट बढ़ रहा लेकिन जनता के काम नहीं आ रहा, प्रस्तावों पर नहीं होता काम

नगर निगम बोर्ड की बैठक हंगामेदार रही। इस दौरान वर्ष 2024-25 का बजट 297.63 करोड़ पास किया गया। ये बजट पिछले वित्तीय वर्ष से 79 करोड़ ज्यादा है। बजट में 177.50 करोड़ रुपए योजनाओं के अनुदान से लेकर वेतन-भत्ते आदि पर खर्च होंगे। जनता के हिस्से में 69 करोड़ आए हैं। इस पर पार्षदों ने सवाल उठा दिए। कहा कि सदन में जो प्रस्ताव पास होते हैं वह कभी लागू नहीं होते।

इस तरह गर्माया माहौल...सफाई का छाया मुद्दा
पिछले वित्तीय वर्ष में संशोधित बजट 218.02 करोड़ था जो इस बार बढ़ाकर 297.63 करोड़ किया गया है। पहले नगर परिषद का बजट था और ये नगर निगम बनने के बाद पहला बजट है। बोर्ड बैठक मेयर घनश्याम गुर्जर की अध्यक्षता में हुई। वन मंत्री संजय शर्मा, आयुक्त मनीष कुमार रहे। बैठक प्रताप ऑडिटोरियम में रखी गई तो इस पर सवाल उठाते हुए कांग्रेसी पार्षद नरेंद्र मीणा ने कहा, यहां बैठक रखने का क्या औचित्य? इसके अलावा बजट से लेकर शहर के मुद्दों पर सवाल उठाए। इस पर हंगामा हो गया। मेयर घनश्याम गुर्जर ने यह भी कह दिया कि उन्हें पता है कि वह कितने पानी में हैं? इस पर कांग्रेस पार्षदों ने नाराजगी जताई। सफाई का मुद्दा भी गर्माया।

दो साल में नहीं हुआ कोई काम...पानी के लिए फिर होगा संग्राम

बजट पास करने के लिए जैसे ही मेयर ने बोला तो पार्षदों ने कहा कि जब तक चर्चा पूरी न हो जाए, पास न समझा जाए। इस दौरान कांग्रेसी पार्षद विक्रम यादव ने आरोप लगाए कि मेयर ने दो साल में कोई काम नहीं करवाए। बजट में राशि बढ़ाई गई लेकिन जनता के काम फिर नहीं होंगे। पिछले वर्ष का बजट करीब 76 करोड़ बचा लिया गया और आगामी बजट का 51 करोड़ रुपए क्लोजिंग बैलेंस में डाला गया। वेतन-भत्तों पर खर्च करने वाला बजट है। जनता के लिए कुछ नहीं है। भाजपा पार्षद सतीश यादव ने कहा कि सीवर लाइन का काम शुरू ही नहीं हुआ। रोज गंदगी सड़कों पर बह रही है। बजट तनख्वाह के लिए है। जनता के कार्य के लिए नहीं। कहा कि दो-दो बोरिंग का प्रस्ताव पास हुआ। गर्मी आ रही है। हाहाकार मचेगा लेकिन इस पर काम नहीं करवाया गया। दो बैठकों में ये प्रस्ताव पास हुआ। वार्ड 60 को सीवर लाइन डालने के प्रस्ताव में शामिल न करने पर पार्षद ने नाराजगी जताई।


सड़कें उखाड़कर फेंक दी, ठेकेदारों पर मेहरबानी क्यों
वार्ड 60 के पार्षद ने आरोप लगाए कि सड़कें उखाड़कर फेंक दी लेकिन काम नहीं हो रहा है। एक ठेकेदार पर कार्रवाई कर दी लेकिन इंजीनियर आदि पर कार्रवाई नहीं हुई। पार्षद अरुण जैन ने ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए। कहा कि इंजीनियर भी निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के दोषी हैं? उन्हें क्यों बचाया गया। पार्षद सीताराम चौधरी ने कहा कि रोड टूटे हैं। बनाए नहीं गए। नेताओं के इशारे पर प्रस्ताव कैंसिल कर दिए गए। काम न होने पर पार्षद सुमन चौधरी विरोध स्वरूप जमीन पर बैठ गईं। उन्हें बमुश्किल आश्वासन देकर उठाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी है लेकिन हम गुलाम नहीं हैं। महिला पार्षदों को अफसर नहीं सुनना चाहते। पार्षद मैठी ने भी कई मुद्दे उठाए। मेयर से कहा कि नस दबाने की कोशिश न करें, वह ईमानदार पार्षद हैं। दबेंगे नहीं।

बोर्ड की बैठक नाम की...पास हो रहे प्रस्तावों पर आज तक नहीं हुआ काम, कहां गई बोरिंग

पार्षद अजय पूनिया ने कहा कि दो-दो बोरिंग बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था लेकिन इस पर काम नहीं हुआ। नाम की बैठकें हो रही हैं। सदन के पास किए हुए काम नहीं हो रहे हैं। मेयर पर आरोप लगाया कि जब से उन्होंने कुर्सी संभाली है तब से पार्षद सबसे अधिक बेइज्जत हुए हैं। पार्षद संजय ने सीवर लाइन डालने वाली सूची से उनके वार्ड का नाम काटने पर आपत्ति दायर की। पार्षद मुकेश सारवान ने मुद्दा उठाया कि सफाई कर्मियों की नियुक्तियों को रोका गया। कच्ची बस्तियों के पट्टे जारी नहीं किए गए। सफाई कर्मियों की पदोन्नति नहीं हो पाई है। पार्षद देवेंद्र कौर ने कहा कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इसलिए वह जमीन पर बैठ गईं। उन्हें भी बमुश्किल उठाया गया।


यहां से कमाएगा नगर निगम

कर राजस्व 2.30 करोड़, राजस्व एवं क्षतिपूर्तियों से 41.98 करोड़, निकाय संपत्ति किराये से 46 लाख, शुल्क एवं उपभोक्ता प्रभार से 6.84 करोड़, भाड़ा प्रभार से 1.12 करोड़, राजस्व अनुदान, अंशदान से 6 करोड़, अर्जित ब्याज से 80 लाख रुपए खजाने में आएंगे। कुल राजस्व 59.51 करोड़ आएगा। इसके अलावा 147 करोड़ रुपए पूंजीगत मद में रखा गया है। ये सरकार आदि जगहों से कई मदों में मिलता है।


यहां खर्च होगा
संस्थापन व्यय के रूप में 43.02 करोड़, प्रशासनिक व्यय में 3.04 करोड़, परिचालन एवं संधारण पर 11.46 करोड़, कार्यक्रम व्यय पर 47 लाख, अंशदान व अनुदान पर 10.12 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कुल 69.12 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 43.02 करोड़ रुपए वेतन, भत्तों पर खर्च होगा। कार्यालय के बिजली बिल, फोन, डाक व्यय, अतिथि सतकार, औषधि आदि पर 55 लाख रुपए खर्च होंगे। निर्वाचन व्यय 10 लाख रखा गया है। सीसी सड़कों पर 18.50 करोड़, डामर सड़कों पर 15 करोड़, उद्यानों की मरम्मत पर साढ़े तीन करोड़ रुपए खर्च होंगे।

सफाई व्यवस्था हुई महंगी...45.84 करोड़ खर्च होंगे
सफाई व्यवस्था महंगी हो गई है। इस पर 45.84 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के स्थाई कर्मियों के वेतन, भत्तों पर 28 करोड़, ठेकेदार से सफाई करवाने पर 14.54 करोड़, नालों की सफाई पर 2.50 करोड़, 168 मूत्रालयों की सफाई पर 60 लाख, 29 शौचालयों की सफाई पर 20 लाख रुपए खर्च होंगे। हालांकि शहर की सफाई व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। हर कोई सवाल खड़े कर रहा है। वहीं रोशनी व्यवस्था पर 2 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

शहर के विकास के लिए 297.63 करोड़ का बजट सदन से पास हो गया है। पिछले वर्षों के मुकाबले काफी बजट बढ़ा है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में पूरे शहर का विकास होगा। सड़कों से लेकर रोड लाइटों का काम होगा। सफाई व्यवस्था और सुधरेगी। बोरिंग आदि पर भी हम काम करेंगे। पार्षदों ने जो सुझाव दिए हैं हम उन पर काम करेंगे।
- घनश्याम गुर्जर, मेयर

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