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विवि ने हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को बांट दिए अंग्रेजी के पेपर Wednesday 14 February 2024 05:53 AM UTC+00 शिक्षा विभाग... स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षा में हुई चूक, कई लोग आ गए कठघरे में
राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षा में एक बार फिर चूक हुई है। हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम का पेपर थमा दिए गए। ये मामला विश्वविद्यालय तक पहुंचा तो कई लोग कठघरे में आ गए। मंगलवार को विद्यार्थियों की कंप्यूटर परीक्षा का पेपर अंग्रेजी माध्यम में मिला। इसे देखकर सभी विद्यार्थी चौंक गए। पेपर हल करने में विद्यार्थियों के पसीने आ गए। क्योंकि विद्यार्थियों की ओर से हिंदी माध्यम में दाखिला लिया गया था और परीक्षा के दौरान पेपर अंग्रेजी माध्यम में मिला। बताया जाता है विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आयोजित सेमेस्टर परीक्षा के दौरान ये विश्वविद्यालय की दूसरी गलती सामने आई है। इससे पहले विश्वविद्यालय ने जारी किए एडमिट कार्ड में परीक्षा का समय गलत प्रिंट किया था और अब कम्प्यूटर परीक्षा में केवल एक माध्यम में पेपर को देकर सभी विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इसको विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्वीकारा। पेपर दोनों माध्यमों (हिंदी और अंग्रेजी) में होना चाहिए था, लेकिन पेपर केवल अंग्रेजी माध्यम में ही प्रिंट हुआ है। परीक्षा को लेकर छात्र नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों का भविष्य खराब करने पर तुला हुआ है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों की गलती विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ती है। इसमें स्नातक से लेकर पीएचडी करने वाले विद्यार्थी शामिल हैं। दोबारा हो सकती है परीक्षाविश्वविद्यालय गडबडियों को लेकर लगातार चर्चाओं में रहता है। अब स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर विवादों में आ गया है। हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम पेपर थमाने के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारी विद्यार्थियों की कुंडली खंगालने में जुट गए हैं। इसमें विद्यार्थियों की गिनती लगाई जा रही है कि प्रथम सेमेस्टर के दौरान कितने विद्यार्थियों ने हिंदी में व कितने विद्यार्थियों ने अंग्रेजी में दाखिला लिया है। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन हिंदी माध्यम वाले विद्यार्थियों की दोबारा परीक्षा करवा सकता है। इसमें अंग्रेजी माध्यम से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा। प्रो. शील सिंधु पांडेय, कुलपति, मत्स्य विश्वविद्यालय। |
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