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Table of Contents

आज से फरवरी का महीना शुरू हो गया है। फरवरी की शुरुआत रवियोग से होगी। इसके बाद षटतिला एकादशी व्रत, प्रदोष व्रत, देवपितृकार्य, मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्र, बसंत पंचमी, देवनारायण एवं विश्वकर्मा जयंती सहित वैवाहिक एवं शुभ कार्यों की धूम रहेगी। कई महापुरुषों की जयंती और अनेक व्रत एवं त्योहार इस माह रहेंगे।

फरवरी महीने में शुभ मुहूर्त त्यौहार और दिवस

1 फरवरी- भारतीय तटरक्षक दिवस
2 फरवरी- कालष्टमी, स्वामी रामानंदाचार्य जयंती, दस्तकार दिवस
4 फरवरी- विश्व कैंसर दिवस
6 फरवरी- षटतिला एकादशी व्रत
7 फरवरी- प्रदोष व्रत, शीतलनाथ जयंती (जैन )
8 फरवरी- मेरू त्रयोदशी (जैन ), आदिनाथ निर्वाण दिवस, मास शिवरात्रि
9 फरवरी- देवपितृकार्य अमावस्या, मौनी अमावस्या, मेला हरिद्वार व प्रयागराज
10 फरवरी- माघ शुक्ल के गुप्त नवरात्र प्रारंभ, वल्लभ जयंती
11 फरवरी- विश्व विवाह दिवस
13 फरवरी- विनायक चतुर्थी
14 फरवरी- बसंत पंचमी
16 फरवरी- देवनारायण जयंती
19 फरवरी- छत्रपति शिवाजी जयंती
20 फरवरी- जया एकादशी व्रत
21 फरवरी- प्रदोष व्रत, विश्व मातृभाषा दिवस
22 फरवरी- विश्वकर्मा जयंती
23 फरवरी- चांद पूर्णिमा व्रत
24 फरवरी- माघी पूर्णिमा, माघ स्नान समाप्त, गुरु रविदास जयंती, भैरव जयंती
26 फरवरी- वीर सावरकर पुण्य दिवस
28 फरवरी- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पुण्य दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

प्रदेश में अवैध खनन पर चल रहा हथोड़ा...यहां बस थोड़ा-थोड़ा
- जयपुर की टीम एक घंटे में लगा गई करोड़ों की पेनॉल्टी
- डीग, भीलवाड़ा, उदयपुर, जयपुर, टोंक आदि जिलों में हुई हैं बड़ी कार्रवाई
- अलवर में सबसे मजबूत टीम, पर कार्रवाई के नाम पर 15 दिन में 3 करोड़ की ही पेनॉल्टी
- खान विभाग के अलावा पुलिस, परिवहन व वन विभाग को अवैध खनन के सब अड्डे पता लेकिन बड़ी कार्रवाई करने से कतरा रहे, 15 दिन में एफआईआर भी करीब इतनी ही कराई

सीएम भजनलाल शर्मा के निर्देश पर पूरे प्रदेश में अवैध खनन पर हथोड़ा चल रहा है। बड़ी कार्रवाइयां हो रही हैं लेकिन यहां केवल नाम का ही अभियान चल रहा है। 15 दिन में 5 विभागों ने मिलकर करीब 3 करोड़ की पेनॉल्टी लगाई हैं और 15 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई हैं। खनन माफियाओं से मिलीभगत का खेल जयपुर के अफसरों को समझ में आया तो उन्होंने एक ही घंटे में एक ही जगह छापा मारा और 8.87 करोड़ की पेनॉल्टी लगाकर चली गई। इससे साफ हो गया कि यहां बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। हैरत तो ये है कि जिला प्रशासन इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है लेकिन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

इस तरह आई जयपुर से टीम, सोता रह गया खान विभाग
हाल ही में जयपुर से वरिष्ठ खनि अभियंता प्रताप मीणा के नेतृत्व में टीम तिजारा के हसनपुरा माफी पहुंची और देखते ही देखते 2.01 लाख टन चेजा पत्थर का अवैध खनन पकड़ लिया। 8.87 करोड़ की पेनॉल्टी लगाई। यहां का खान विभाग सोता रहा। भनक तक नहीं लगी। जिले में अवैध खनन पर कार्रवाई खान विभाग के अलावा पुलिस, परिवहन, वन व प्रशासन संयुक्त रूप से कर रहे हैं। अब तक कोई बड़ी कार्रवाई जिले के उच्चाधिकारियों को नहीं मिली जिसे प्रदेश स्तर पर प्रस्तुत कर वाहवाह लूट सकें जबकि अवैध खनन से तमाम पहाड़ खत्म हो गए। सूत्र कहते हैं कि यहां की टीम कागजों का पेट भरने के लिए ही निरीक्षण कर रही है जबकि खान विभाग को सब अवैध अड्डे पता हैं।

प्रदेश में यहां हुई बड़ी कार्रवाई
- प्रदेश में कई जगहों पर बड़ी कार्रवाई अवैध खनन पर सामने आई। इसमें डीग में एक ही दिन में 12.26 करोड़ की पेनॉल्टी लगाई गई। यहां 2.92 लाख टन अवैध खनन पकड़ा।

- उदयपुर में एक ही दिन में टीम ने करीब 50 हजार मीटि्रक टन अवैध खनन पकड़ लिया। फैल्सफार के 29 वाहन जब्त किए।
- भीलवाड़ा में एक ही घंटे में 500 टन अवैध खनन पकड़ लिया। करोड़ों की पेनॉल्टी लगाई गई।

- जयपुर में 17-18 जनवरी को 210 लोगों पर एफआईआर कराई गई। 90 लोग गिरफ्तार किए गए। करोड़ों की पेनॉल्टी लगाई।
- टोंक में पूर्व विधायक लपेटे में आए। उन पर बड़ी पेनॉल्टी लगाई। कई अन्य जिले भी कार्रवाई करके नजीर बने।

जिले में यहां अवैध खनन की मंडियां
जिले में तमाम जगहों पर अवैध खनन की मंडियां चल रही हैं। सूत्र कहते हैं कि तिजारा व रामगढ़ हरियाणा सीमा से सटे हैं। यहां की पहाडि़यों में अवैध खनन बड़े पैमाने पर होता है। माफिया हरियाणा भी भाग निकलते हैं और बिक्री भी खनन की वहीं करते हैं। भिवाड़ी में आधा दर्जन पहाड़ इसी कारण खत्म हो चुके हैं। कहरानी, भिवाड़ी, ग्वालदा, लारखुर्द, टपूकड़ा-खुशखेड़ा, सारे कलां, नाखनोल आदि जगहों पर अवैध खनन होता है। जटियाना, गिरवास, अगवानी, ठेकड़ा व शाहपुर की अरावली की पहाडिय़ों में भी यही हाल है। नीमराणा, बहरोड़ से रोड़ी हरियाणा के बावल, नीमराना, घीलोठ, शाहजहांपुर आदि जगहों पर जाती हैं। खोहर, बसई, रैवाणा और कायसा में गोचर, सिवायचक और गैरमुमकिन पहाड़ी में खनन होता है। सूत्र कहते हैं कि जिलेभर से हजारों ट्रक, ट्रैक्टर, डंपर आदि अवैध खनन में लगे हैं। विभाग सीएम के इस अभियान को ईमानदारी से चलाए तो सबसे बड़ी सफलता अलवर में मिलेगी। तमाम लोग तो शिकायत करके थम चुके हैं लेकिन उनके क्षेत्रों में अवैध खनन बंद नहीं हुआ।


अवैध खनन पर कार्रवाई तेजी से चल रही है। 3 करोड़ से ज्यादा की पेनॉल्टी लगाई है। वाहन भी जब्त किए हैं। एफआईआर भी करवाई हैं। आगे भी कार्रवाई करेंगे।
- राजेंद्र सिंह, खनि अभियंता, खान विभाग

अवैध खनन पर कार्रवाई को लेकर संबंधित विभागों से कहा गया है। काफी कार्रवाई हुई हैं। इस कार्य की समीक्षा की जा रही है। आगे और बड़ी कार्रवाई होंगी।
- प्रतिक जुईकर, एसडीएम अलवर

अलवर। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ अब उच्च शिक्षा का ढांचा भी बिगड़ता जा रहा है। कॉलेजों में विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले स्थाई प्रोफेसरों की कमी चल रही है। प्रदेश में पिछली कांग्रेस सरकार की ओर से नए कॉलेजों को खोला गया है। अब इन कॉलेजों का आलम इस प्रकार से है कि दो-तीन प्रोफेसरों के भरोसे ही कॉलेज को संभाला जा रहा है। कॉलेजों में स्थाई स्टॉफ नहीं होने के कारण विद्या संबल के माध्यम से प्रोफेसरों की नियुक्ति आयुक्तालय ने की। अब इन प्रोफेसरों के ऊपर रोजगार का संकट मंडरा रहा है। क्योंकि महज 27 दिनों के बाद विद्या संबल के माध्यम से नियुक्त किए गए प्रोफेसरों का समय पूरा हो जाएगा। उसके बाद बेरोजगार हो जाएंगे।

पहले से नियुक्त प्रोफेसरों को लेकर कोई नोटिफिकेशन नहीं

आयुक्तालय ने अब तक विद्या संबल के माध्यम से पढ़ाने वाले प्रोफेसरों की नियुक्ति के आदेश जारी नहीं किए हैं और न ही अब तक कोई नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रदेश में विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों की संख्या एक हजार है। हालांकि, वहीं, विद्या संबल योजना के माध्यम से प्रोफेसरों की भर्ती जारी है। इसको पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगेगा। ये भर्ती एक हजार 900 पदों पर चल रही है।

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ये है स्थिति:

प्रदेश की 190 कॉलेजों में विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों के द्वारा विद्यार्थियों को पढाया जा रहा है। इनकी संख्या एक हजार है। अब इनका कार्यकाल पूरा होने वाला है। आयुक्तालय की ओर से विद्या संबल के माध्यम नोडल कॉलेज और राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के माध्यम से कॉलेजों में नियुक्ति की गई। वहीं, सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों को हटा दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होगी। राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में भी विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले प्रोफेसरों की कमी चल रही है।

सत्र प्रभावित होने की संभावना

प्रदेश में इस सत्र से पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर पद्धति को लागू किया गया। ऐसी स्थिति में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं के बाद फिर से दूसरे सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। ये आदेश जयपुर विश्वविद्यालयों की ओर से जारी किए गए हैं। वहीं, अगर विद्या संबल के माध्यम से लगे प्रोफेसरों को हटा दिया गया तो आगे आने वाला सत्र प्रभावित होगा।

अलवर। उस मां की क्या मनोस्थिति होगी जिसने अस्पताल में दूसरी बार अपने बच्चे को जन्म के बाद उसे खो दिया। मामला राजकीय महिला अस्पताल अलवर का है। नवजात के परिजन ने चिकित्सक सहित स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

पीड़ित काला कुआं निवासी प्रेम प्रकाश भाटिया ने बताया कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां चिकित्सकों ने दबाव डालकर उससे ऑपरेशन के लिए लिखवाया। जबकि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हो रही थी और ऑपरेशन की जरुरत नहीं थी।

इसके बाद 29 जनवरी को सुबह 8 बजे ऑपरेशन से उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। इसके बाद से उसकी बच्ची लगातार रो रही थी और मां का दूध भी नहीं पी रही थी। इसके साथ ही उसकी पत्नी को भी दर्द हो रहा था, लेकिन चिकित्सक से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी वह देखने के लिए नहीं आया। इसके बाद मंगलवार रात करीब 2 बजे नवजात बालिका की मौत हो गई।

नर्सिंग स्टाफ ने कहा, इंजेक्शन खत्म हो गया

पीड़ित का आरोप है कि उसकी बच्ची के जन्म के बाद हाथ व पैर पर टीके लगाए गए थे। इसके अगले दिन जब वह बच्ची को गोद में लेकर इंजेक्शन लगवाने गया नर्सिंग स्टाफ ने बच्ची के पैर में तो इंजेक्शन लगा दिया, लेकिन हाथ में लगने वाले इंजेक्शन के खत्म होने की जानकारी दी। नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हो गए हैं, बच्ची ठीक है, अगले दिन इंजेक्शन लगवा लेना।

इस संबंध में पीड़ित की ओर से कोतवाली थाने में डॉ. टेकचंद सहित अन्य नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।

2012 में बेटे की भी हो चुकी मौत

पीड़ित ने बताया कि इससे पहले साल 2012 में उसके ऑपरेशन से बेटा हुआ था। उसका वजन भी साढ़े 3 किलो था। तब भी उसने इसी चिकित्सक को दिखाया था, लेकिन उस दौरान भी चिकित्सक की लापरवाही से 3 दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।

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Mushroom Farming : अवधेश सिंह/मालाखेड़ा (अलवर)। जिले के बिजवाड़ नरूका गांव में हजारीलाल सैनी बटन मशरूम की खेती कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। इनसे खेती करने की जानकारी हासिल करने के लिए दूर-दूर से किसान आते हैं। यहां तक कि शहर के लोग भी अपने खाली पड़े प्लॉट पर इस प्रकार की व्यवस्था कर मशरूम की खेती करने का मानस बनाने लगे हैं। सैनी ने कभी किराए का मकान लेकर खेती शुरू की थी, जहां आज वह खुद करोड़ों रुपए के मकान का मालिक बन गया है। कड़ी मेहनत से दिन-रात इसी खेती में लगने से यह मुकाम हासिल किया है।

प्रति रेक 25000 रुपए बचत
सैनी ने बताया, वह 20 बाई सात के चार बड़े-बड़े हॉल में 64 रेक पर मशरूम की खेती कर रहा है। एक रेक से लगभग चार क्विंटल उत्पादन हो जाता है। इस पर लागत 15 हजार रुपए आती है और 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक्री हो जाती है। इस तरह प्रति रेक 25 हजार रुपए की बचत हो जाती है।

नए भूसे से बनाएं कम्पोस्ट
सैनी गेहूं का तुड़ा, मुर्गी की बीट, गोवंश का गोबर, चोकर, जिप्सम, सेरा, पोटाश तथा डीएपी खाद मिलाकर खाद तैयार करते हैं। इसमें थोड़ा सा यूरिया तथा गोमूत्र भी मिलाते हैं। किसान ने बताया, कम्पोस्ट बनाने के लिए नया भूसा ही प्रयोग करें। धान की पराली अथवा गेहूं के भूसे के स्थान पर सरसों का भूसा भी काम में ले सकते हैं, लेकिन सरसों के भूसे के साथ मुर्गी की बीट का प्रयोग जरूर करें। कम्पोस्ट में नाइट्रोजन की मात्रा लगभग 1.5-2.5 प्रतिशत होनी चाहिए।

ऐसे करें शुरुआत
किसान ने बताया, मशरूम की खेती के लिए बहुत अधिक जमीन की जरूरत नहीं होती है, 10 बाई 10 के तीन- चार कमरों से भी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा बांस व धान की पुआल से बने अस्थाई शेड अथवा झोपड़ी बनाकर भी इसकी खेती की शुरुआत कर सकते हैं। भूसे की लगभग एक फीट मोटी कंपोस्ट की तह बना लें। उसे लगभग एक से दो दिन तक गिला रखें ताकि उपयुक्त नमी बनी रहे। इससे मशरूम का अंकुरण अच्छा होगा। अच्छी पैदावार के लिए 13 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।

Rajasthan Minister Action Against Illegal Mining : अलवर। बिल्ली को दूध की रखवाली। ये कहावत आज वन विभाग पर फिट बैठी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अवैध खनन पर एक्शन करने वाली टीम में वन विभाग को भी शामिल कि या है, लेकिन गुरुवार को वन विभाग में अवैध खनन के पत्थर जाते पकड़े गए। यह कार्रवाई खुद विभाग के ही मंत्री संजय शर्मा ने की। उन्होंने दो लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई है। मंत्री की इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि पूरे जिले में अवैध खनन का खेल बदस्तूर है, लेकिन कार्रवाई करने वाली टीमों के लोग खुद ही इसमें मिले हुए हैं। जिला प्रशासन इस कार्य की मॉनिटरिंग कर रहा है लेकिन उस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दौड़ते ट्रैक्टर को इस तरह पकड़े
वन मंत्री संजय शर्मा गुरुवार की सुबह कहीं दूसरे स्थान से अलवर शहर में प्रवेश कर रहे थे। दोपहर करीब 12 बजे वह रूपबास स्थित जगन्नाथ मंदिर के समीप से निकल रहे थे। उसी दौरान पत्थर से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली तेजी गति से जा रहे थे। इस पर मंत्री को शक हुआ तो उन्होंने ट्रैक्टरों को रुकवाया। चालक से पूछा, पत्थर कहां ले जा रहे हैं? इस पर चालक सही जवाब नहीं दे पाए। यही बोल पाए कि चौकी से ये सामग्री ला रहे हैं और वन विभाग ले जा रहे हैं।

इस पर मंत्री ने चालक से पूछा कि इस सामग्री का कोई रवन्ना है या नहीं, इस पर ट्रैक्टर चालक कुछ नहीं बोल पाए। मंत्री ने अंदाजा लगा लिया कि सब ऐसे ही चल रहा है। उन्होंने अरावली विहार थाना प्रभारी को बुलाया और ट्रैक्टर जब्त करवाए। संबंधित चालक व वन विभाग के संबंधित कार्मिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए। डीएफओ से कहा कि इस मामले में लिप्त अफसरों व कार्मिकों पर कार्रवाई करें। इससे वन विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया।

क्यों नहीं कर रही टीम कार्रवाई...तमाम सवाल खड़े हुए
पूरे प्रदेश में अवैध खनन पर तेजी से कार्रवाई हो रही है लेकिन यहां खान विभाग, वन, पुलिस, परिवहन विभाग कुछ नहीं कर पा रहे। छोटे खनन माफियाओं तक ही कुछ कार्रवाई की हैं। बड़ी मछलियों तक हाथ किसी के नहीं पहुंच रहे। सूत्र कहते हैं कि खान विभाग चाहे तो सबसे अधिक कार्रवाई करके रेकॉर्ड बना सकता है लेकिन वह माफियाओं को कहीं न कहीं बचा रहा है। जिला प्रशासन भी सख्ती नहीं कर रहा है जबकि 12 टीमें जिलेभर में काम कर रही हैं। वन मंत्री का कहना है कि इस मामले में अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह कार्रवाई क रें अन्यथा उन पर कार्रवाई होगी।

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