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बूंदी । 12 वर्ष की उम्र में परिजनों ने देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया। अब जब घर बसाने के लिए तैयार हुई तो परिवार के लोग ही दीवार बनकर खड़े हो गए। युवती ने अपना जीवन साथी भी चुन लिया और वो इस जिस्मफरोशी के जाल से आजाद होकर अपना नया जीवन बसाना चाहती है। हालांकि पीड़िता के एक 5 साल का बेटा है। पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाकर दोनों भाई और बड़ी भाभी व मां के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

देह व्यापार को नहीं करना चाहती
बूंदी जिले के एक गांव की रहने वाली गीता (बदला हुआ नाम) ने बताया कि 2014 में वह 12 वर्ष की थी, तब परिजनों ने आठ लाख रुपए में ढाई साल के लिए ग्वालियर में गिरवी रख दिया। वहीं तीन साल पढ़ा लिखाकर मुंबई में देह व्यापार के दलदल में बेच दिया। तब से वो देह व्यापार के दलदल में हैं। उसे मां, दोनों भाई व बड़ी भाभी ने इस दलदल में धकेला है। अब जब 27 वर्ष की उम्र में गीता इस देह व्यापार को नहीं करना चाहती, लेकिन परिजन उसे इस दलदल से निकलने नहीं दे रहे है। जैसे-तैसे पीड़िता दलालों के चंगुल से छुटकर बूंदी पहुंची।

3 फरवरी को होगा विवाह
उसने बूंदी की एक कॉलोनी में रहने वाले युवक के साथ अपना घर बसाने का निर्णय किया, लेकिन पीड़िता को घर वालों का डर सता रहा है। पीड़िता की माने तो उसने इस बुराई से लड़कर अपना सुकून भरा जीवन जीने का निर्णय कर लिया है। 3 फरवरी को रामनगर में गीता का हिंदू रीति-नीति के साथ विवाह होगा। कई सामाजिक संगठन जन प्रतिनिधि ओर प्रशासनिक ओर पुलिस विभाग के अधिकारी इस विवाह के साक्षी बनेंगे। नवयुगल जोड़े को घर बसाने के लिए कई अभिभाषक परिषद सहित कई सामाजिक संगठन उपहार स्वरुप घरेलु सामान भेंट करेंगे।

फिर प्रताड़ित करने लगे
गीता ने बताया कि गिरवी रखने का समय पूरा होने के बाद वो वापस आना चाहती थी,लेकिन गिरवी रखने वाले प्रताड़ित करने लगे और जैसे-तैसे बूंदी आई तो फिर से परिजनों ने मुंबई भेज दिया। पीड़िता ने बताया कि परिजनों ने इसका कारण गरीबी होना बताया था।

... तो कर लेते दोनों शादी
मुबई में गीता को जिले की एक कॉलोनी के युवक के साथ प्रेम हुआ। चार साल पहले दोनों विवाह कर लेते थे, लेकिन परिजनों के कर्ज उतारने के लिए पीड़िता ने विवाह नहीं किया। दोनों में मुलाकात होने के बाद युवक मुंबई आता-जाता रहा। तीन माह से दोनों इधर उधर छीपे रहे है। पीड़िता का बेटा परिजनों के साथ था,परिजन पीड़िता को फोन कर रहे थे,लेकिन इस दलदल में धकेले जाने के डर से वह नहीं आई। बीते 15 साल में पीड़िता ने 40 से 50 लाख रुपए परिजनों को दे दिए।

छोटी बहन को बचाया, कराई शादी
गीता नौ बाई बहन में सातवें नंबर की थी। परिजनों ने सभी की शादी करा दी। इसका नंबर आया तो परिवार कर्ज तले दबे होने के चलते विवाह नहीं कराने का हवाला दिया। छोटी बहन को इस दलदल में धकेलने की तैयारी थी, लेकिन गीता ने अपने साहस के चलते ऐसा नहीं होने दिया और परिजनों को धमकाया और बाद में उसकी शादी सवाईमाधोपुर में करवाई।

बूंदी की 30 से 40 युवतियां अभी इस दलदल में
पीड़िता ने बताया कि मुंबई में ही बूंदी जिले की करीब 30 से 40 युवतियां है,जो इस दलदल में फंसी हुई है। हालांकि पूर्व में कई तो भाग छूटी तो किसी ने नया जीवन बसा लिया।बूंदी ही नहीं राजस्थान के अन्य जिलों की लड़किया भी इस दलदल में है।

- कंजर समाज में व्याप्त कुप्रथा के चलते बालिकाएं देह शोषण से बाहर आना चाहती है। यह एक अच्छी सोच है कि युवतियां देह व्यापार से निकलकर समाज की मुख्य धारा में आ रही है। समाज के सभी वर्ग मिलकर इसमें सहयोग करेंगे। प्रशासन और पुलिस इनके साथ खड़ी है। दोनों शादी करना चाहते है। 3 फरवरी को विवाह करवाया जाएगा। पीड़िता के बेटे को दस्तयाब कर उसकी मां को सुुपुर्द कर दिया है।
- सीमा पोद्दार,अध्यक्ष,बाल कल्याण समिति, बूंदी

- युवती देह व्यापार के दलदल से निकलना चाहती है। पीड़िता को पूरी तरह से सुरक्षा दी जाएगी। सामाजिक कुरूतियों को खत्म करने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे'।
- जय यादव, पुलिस अधीक्षक, बूंदी

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