>>: Digest for February 16, 2024

>>

Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment!

You are receiving a digest because your subscriptions have exceeded your account's daily email quota. Your quota has automatically reset itself.

Bhim CHC issue पत्रिका अभियान : राजसमंद का भीम उप जिला अस्पताल : तमगे नहीं, तस्वीर बदले, 500 से 700 मरीजों का प्रतिदिन का है आउटडोर, पर्याप्त स्टॉफ, न सुविधाओं का विस्तार, ब्यावर जाने को मजबूर मरीज और घायल

भीम उपखंड मुख्यालय पिछले दो साल में एकसाथ कई तमगे पा चुका है, लेकिन हालातों में तब्दीली आनी अभी बाकी है। भीम के सरकारी अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उप जिला चिकित्सालय बने 2 वर्ष हो गए, लेकिन अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है।

राज्य सरकार ने अस्पताल का दर्जा जरूर बढ़ा दिया है, पर जमीनी स्तर पर इलाज की सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं आया। छोटी-मोटी परेशानी होने पर भी मरीजों को ब्यावर रैफर कर दिया जाता है।
वर्तमान में इस अस्पताल में हर रोज औसतन 700 मरीज उपचार के लिए आते हैं। यां मरीजों की काफी भीड़ लगी रहती है। वक्त के साथ मरीजों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। मौजूदा समय में हालात ऐसे हैं कि तकरीबन सभी वार्ड में रोगी भर्ती हैं।

चार जिलों की सीमा पर भीम अस्पताल
भीम का सरकारी अस्पताल चार जिलों की सीमा पर स्थित है। यहां सर्वाधिक आवाजाही रहती है। दुर्घटना के लिहाज से अति संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। भीलवाड़ा जिले के करेड़ा व आसींद क्षेत्र में बसे लोग, अजमेर जिले के टॉडगढ़ व जवाजा क्षेत्र, पाली जिले के कुछ ग्राम पंचायत के लोगों की आबादी इसी चिकित्सा केंद्र पर निर्भर रहती है। इस दृष्टि से भीम अस्पताल में सुविधाओं का बेहतर होना जरूरी है। स्थान के अभाव में रोगियों घायलों को ब्यावर रैफर करना पड़ता है।

राजसमंद से 100, ब्यावर से 70 किमी दूर
राजसमंद जिला से भीम 100 किलोमीटर एवं ब्यावर से 70 किलोमीटर दूर है। अन्य कोई विकल्प नहीं होने की स्थिति में दुर्घटना में गम्भीर घायल लोगों की कई बार मृत्यु हो जाती है। समय पर उपचार नहीं मिल पाने पर यहीं उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं की जरूरत महसूस होती है।

उप जिला अस्पताल बनने पर भी सुविधाएं नहीं
दो साल पहले उप जिला अस्पताल की घोषणा होने के बावजूद ट्रोमा यूनिट में ब्लड बैंक यूनिट, डिजिटल ईसीजी और अन्य चिकित्सा सुविधाएं स्थापित नहीं हुई हैं।

डॉक्टर्स क्वार्टर छोडिय़े, बैठने के पर्याप्त कमरे भी नहीं
उप जिला चिकित्सालय में 21 चिकित्सक एवं नर्सिंगकर्मी सेवारत हैं। चिकित्सकों के बैठने के के लिए ही पर्याप्त कमरों का अभाव है। तकरीबन एक कमरे में चार-पांच डॉक्टर बैठते हैं, जिससे मरीजों को देखने के लिए भीड़ लग जाती है। मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

केवल गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी
सोनोग्राफी, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक यूनिट की व्यवस्था ही नहीं है। सोनोग्राफी गर्भवती महिलाओं के लिए ही है, यह कहकर बाकी मरीजों को वंचित किया जाता है। आधे समय सोनोग्राफी मशीन बंद रहती है। खराब होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। मजबूरी में लोग बाहर मुंहमांगी कीमत पर सोनोग्राफी करवाते हैं।

पार्किंग व्यवस्था नहीं, फंसती है एम्बुलेंस
उप जिला चिकित्सालय में प्रवेश करते ही दुपहिया वाहन एवं कार आदि वाहनों के भारी जमावड़े से एम्बुलेंस खड़ी होने तक की जगह नहीं होती है। कई बार मरीजों को सडक़ से ही स्ट्रेचर पर डालकर अंदर ले जाना होता है या हाथों पर उठाकर वार्ड में ले जाना पड़ता है।

विधायक बोले— सीएम, चिकित्सा मंत्री से मिलूंगा
भीम अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने मेरा पूर्व में भी प्रयासरत रहा। इस कार्यकाल में इसे जिला अस्पताल बनाने की प्राथमिक है। मैंने कलक्टर से वार्ता कर जमीन आवंटन का प्रस्ताव तैयार कर कार्यवाही पर काम शुरू किया है। चिकित्सा मंत्री एवं मुख्यमंत्री से मिलकर बेहतरीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।
हरिसिंह रावत, विधायक भीम

Kiran Maheshwari college Kunwaria कुंवारिया तहसील मुख्यालय के समीप फियावड़ी गांव के बस स्टॉप पर स्थित स्व. किरण माहेश्वरी महाविद्यालय के नए भवन में शिक्षण कार्य प्रारंभ होने पर महाविद्यालय में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

स्व. किरण माहेश्वरी महाविद्यालय का संचालन कस्बे के राउमावि के छोटे-छोटे कमरों में होने से विद्यार्थियों को होने वाली परेशानी को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान पत्रिका के गत 7 जनवरी के अंक में लोकार्पण के तीन माह बाद भी नई ईमारत में स्थानांतरित नहीं हुआ कॉलेज, स्कूल में संचालन, शीर्षक के साथ प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। खबर के प्रकाशित होने पर महाविद्यालय प्रशासन, उच्च शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए स्व. किरण माहेश्वरी महाविद्यालय कुंवारिया के नए भवन में शिक्षण कार्य सुचारू रूप से प्रारंभ करवा दिया है। ज्ञात रहे कि स्व किरण माहेश्वरी महाविद्यालय कुंवारिया के नवनिर्मित भवन का 6 अक्टूबर 2023 को पूर्व विधानसभाध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने लोकार्पण कर दिया था परंतु लोकार्पण के कई दिनों के बाद भी महाविद्यालय के नए भवन में कॉलेज का संचालन प्रारंभ नहीं हो रहा था।

शिक्षकों व स्टॉफ की है कमी
महाविद्यालय में विषय को पढाने के लिए गेस्ट फैकल्टी के माध्यम से शिक्षकों की पूर्ति की जा रही है, जिनका कार्यकाल फरवरी अंत में समाप्त हो जाएगा। ऐसे में फरवरी के बाद विद्यार्थियों को कौन पढ़ाएगा इसकी भी स्पष्ट रूपरेखा तय नहीं है। महाविद्यालय में मात्र प्राचार्य का कार्य देख रहे कार्मिक ही स्थायी हैं। महाविद्यालय में विषय विशेषज्ञ प्राध्यापक, सुरक्षाकर्मी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, कार्यालय कार्मिक सहित अन्य कार्मिकों की नियुक्ति नहीं है। ऐसे में महाविद्यालय का संचालन में परेशानी होती है।

महाविद्यालय में ढाई सौ से अधिक है विद्यार्थी
स्व. किरण माहेश्वरी महाविद्यालय में वर्तमान में प्रथम वर्ष में 109 विद्यार्थी, द्वितीय वर्ष में 90 विद्यार्थी तथा तृतीय वर्ष में 65 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। महाविद्यालय में वर्तमान में कला संकाय संचालित हो रहा है, जिसमें हिन्दी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीतिक विज्ञान, गृह विज्ञान, अर्थशास्त्र विषय उपलब्ध हैं।

परीक्षा केंद्र नहीं होने से भी परेशानी
स्व. किरण माहेश्वरी महाविद्यालय भले ही नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, परंतु यहां पर परीक्षा केंद्र नहीं होने से ढाई सौ से अधिक विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए जिला मुख्यालय के महाविद्यालय में जाने को विवश होना पड़ेगा। ऐसे में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने परीक्षा केंद्र स्थानीय महाविद्यालय के नवीन भवन में ही आवंटित करने की मांग की है ताकि विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान समय व धन के अव्यय को रोका जा सके।

महाविद्यालय तक सडक़ की जरूरत
महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने बताया कि महाविद्यालय भवन फियावड़ी गांव के बस स्टॉप से कुछ दूरी पर बनाया गया है। ऐसे में फोरलेन से महाविद्यालय तक जाने का मार्ग कच्चा होने से धूल-मिट्टी की परेशानी बनी रहती है। विद्यार्थियों ने बताया कि महाविद्यालय तक आने जाने के दौरान वाहनों की भारी परेशानी रहती है। रोडवेज व निजी बसों में विद्यार्थियों को लेते नहीं है, ऐसे में विद्यार्थियों को महाविद्यालय आने व जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के समीप फोरलेन पर बस स्टॉप बनाने तथा रोडवेज व अन्य रूट पर संचालित समस्त बसों व वाहनों का महाविद्यालय के समीप बस स्टॉप के लिए पाबंद कराने की मांग की है।

करवाएंगे समस्याओं का समाधान
स्व. किरण माहेश्वरी महाविद्यालय कुंवारिया में स्टॉफ की समस्या, महाविद्यालय के बाहर रोडवेज बसों के ठहराव सहित विद्यार्थियों की समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन व उच्च शिक्षा से जुडे अधिकारियों से चर्चा करके प्राथमिकता से समाधान निकलवाया जाएगा।
दीप्ति माहेश्वरी, विधायक राजसमंद

उच्च अधिकारियों को करवा रखा है अवगत
महाविद्यालय में स्टॉफ व कार्मिकों की कमी है। इस बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। महाविद्यालय में कार्मिकों की स्थायी नियुक्ति हो जाए तो महाविद्यालय के संचालन में काफी अधिक सहयोग मिलेगा।
सोहनलाल गोसाई, कार्यवाहक प्राचार्य, स्व. किरण माहेश्वरी महाविद्यालय कुंवारिया

Bhim CHC News campaign-2 भीम उपखंड मुख्यालय स्थित राजकीय उप जिला चिकित्सालय में गत 2 वर्षों से विशेषज्ञों के विभिन्न पद रिक्त होने से मरीज को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में 39 फीसदी पद खाली पड़े हैं।

उपखण्ड मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञों के पद रिक्त होने एवं संसाधनों की उपलब्धता के अभाव में भर्ती मरीजों को उपचार सम्बंधी दिक्कतें हो रही हैं। विशेष तौर से ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाएं गड़बड़ा रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई के लिए नवीन स्वीकृत भवन का निर्माण कार्य भी वर्तमान में बंद है।
हालात ये हैं कि अस्पताल में वरिष्ठ विशेषज्ञ व सामान्य चिकित्सकों के कुल 28 में से 14 चिकित्सक यानि आधे पद खाली हैं। चिकित्सालय में औसतन प्रतिदिन 600 से ज्यादा मरीज आते हैं। कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त होने ने मरीज दूसरे शहरों के सरकारी व निजी अस्पतालों का रुख करते हैं।

ये प्रमुख पद हैं खाली
उपजिला अस्पताल में वरिष्ठ विशेषज्ञ (शल्य), कनिष्ठ विशेषज्ञ (शल्य), कनिष्ठ विशेषज्ञ (मेडिसन), कनिष्ठ विशेषज्ञ (नेत्र-रोग), कनिष्ठ विशेषज्ञ (शिशु-रोग), कनिष्ठ विशेषज्ञ (अस्थि-रोग), कनिष्ठ विशेषज्ञ (नाक, कान, गला), चिकित्सा अधिकारी (दन्त), वरिष्ठ रेडियोग्राफर, सहायक रेडियोग्राफर, लैब टेक्निशियन, मशीन विद मैन ेके पद खाली हैं, वहीं ट्रॉमा इकाई में कनिष्ठ विशेषज्ञ (निश्चेतन), चिकित्सा अधिकारी स्नात्कोत्तर (हड्डी-रोग) के एक-एक, ईसीजी टेक्निशियन का एक और नर्सिंग ऑफिसर के पांच पद खाली हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में चिकित्सा अधिकारी के 4, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के 2, नर्सिंग ऑफिसर के 8 पद खाली पड़े हैं।

फैक्ट फाइल...
80 में से 59 कर्मचारी ही कार्यरत हैं पीएमओ भवन में
10 में से 8 पद ट्रॉमा इकाई में हैं खाली
22 में से 15 पद खाली हैं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में

You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at abhijeet990099@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription.