>>: Digest for February 28, 2024

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Two Youths In Rajsamand Drown In Pond : राजसमंद में तालाब में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। दोनों युवक 19 फरवरी को लापता हो गए थे। परिवार वालों ने जब इनकी तलाश शुरू की तो ढेलाना भेरुनाथ मंदिर के पीछे तालाब के पास दोनों के जूते, मोबाइल और बाइक मिली थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस और गोताखोरों की मदद से तालाब में तलाशी अभियान चलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद तालाब से दोनों युवकों के शव बरामद किए गए। पुलिस ने दोनों युवकों के शवों का पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, दोनों युवक दोस्त थे और ये राजसमंद आमेट तहसील के प्रसिद्ध ढेलाणा भैरुनाथ मंदिर के पीछे वाले तालाब में संभवत: नहाने के लिए गए और दोनों की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। मामले की जांच कर रहे एएसआई शांतिलाल ने बताया कि दोपहर को सूचना मिली की ढेलाणा भेरुनाथ जी मंदिर के पीछे वाले तालाब के किनारे दो युवकों के कपड़े पड़े हुए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।

स्थानीय लोगों की मदद से दोनों युवको को पानी में ढूंढने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर पुलिस द्वारा राजसमंद से सिविल डिफेंस की टीम को सूचना दी गई। एक घंटे बाद मौके पर पहुंची डिफेंस टीम ने करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद तालाब के दलदल में फंसे दोनों युवको को बाहर निकाला। एएसआई शांतिलाल ने बताया कि मृतकों की पहचान श्रवण नायक और संजय नायक के रूप में की गई है। कर ली गई है तथा दोनों केलवा थाना क्षेत्र के मोखमपुरा व पसुन्द गांव के रहने वाले एक ही समाज के दोस्त थे। श्रवण की तो दस दिन पहले ही शादी हुई थी।

आमेट थाना क्षेत्र के गांव ढेलाणा में चन्द्रभागा नदी पर बने एनिकट में शुक्रवार को डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। सिविल डिफेंस टीम ने ढाई घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शव बाहर निकाल लिए। दोनों तीन दिन से लापता थे। एक युवक की शादी 15 दिन पहले ही हुई थी। दोनों घरों में मातम पसर गया है।

पुलिस ने बताया कि डूबे युवकों की पहचान श्रवण कुमार (21) पुत्र मीठालाल नायक निवासी किशनपुरा, थाना केलवा एवं संजय पुत्र दिनेश नायक उम्र 21 वर्ष निवासी कीरा का ओड़ा थाना केलवा के रूप में हुई। दोनों 19 फरवरी को घर से निकले थे, जो नहीं लौटे। दोनों के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। आमेट पुलिस को सूचना देने के बाद सिविल डिफेंस की टीम भी मौके पर पहुंची। रेस्क्यू टीम ने शव बाहर निकाले। प्रथम दृष्ट्या शव तीन दिन पुरानी दिख रहे थे। केलवा सीएचसी शव लाने के बाद परिजनों ने रिपोर्ट दी, फिर शवों का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से करवाया गया।

मामा को एनिकट के पास दिखे बाइक, जूते और मोबाइल
ढूंढने निकले एक युवक के मामा को तालाब के पास बाइक, जूते और मोबाइल मिले। मामा अनिल ने बताया कि किशनपुरा केलवा निवासी उनका भांजा श्रवण नायक और दूर के रिश्ते में उसका चचेरा भाई संजय नायक यह कहकर घर से निकले थे कि आगरिया के हिम्मत वाल्मीकि ने उसे बुलाया है। हिम्मत वहां मुर्गी-मछलियों का व्यापार करता है। 20 फरवरी को श्रवण की मां से शाम 4 बजे आखिरी बार बात हुई थी। श्रवण ने कहा था कि वे हिम्मत के घर पर हैं। रात वहीं रुकेंगे। इसके बाद दोनों से कोई बात नहीं हो पाई।

ढाई घंटे चला रेस्क्यू
सिविल डिफेंस टीम सुबह 11.30 बजे पहुंची, तब पानी में दोनों के शवों की तलाश शुरू हुई। पहला शव दोपहर 1.30 बजे और दूसरा शव 2 बजे मिला। परिजनों ने बताया कि एक शव मछली पकडऩे के जाल में मिला है।

जिसके घर गया था भांजा, मामा वहां पहुंचे
अनिल ने बताया कि दोनों शुक्रवार को भी घर नहीं आए तो हिम्मत को फोन किया। श्रवण व संजय का फोन नहीं लगने व पूछताछ करने पर हिम्मत टालमटोल करने लगा। उसने कहा कि आप यहां आ जाओ। मामा अनिल आगरिया पहुंचे तो वहां श्रवण और संजय नहीं मिले। बार-बार पूछने पर भी दोनों के बारे में नहीं बताया। अनिल ने कहा कि तू जहां मछली पकडऩे जाता है, वहां ढूंढने चलते हैं। ऐसा कहने पर हिम्मत मामा को तालाब पर लेकर गया, जहां श्रवण और संजय की बाइक, मोबाइल, जूते पड़े थे।

परिजनों को हत्या की आशंका
परिजनों ने हत्या करने का शक जताया है। उनका कहना है कि दोनों लडक़े उसके पास गए थे, लेकिन जब उनके बारे में पूछा तो कुछ भी साफ-साफ नहीं बताया। पुलिस अधिकारी शांतिलाल का कहना है कि परिजनों को हत्या की आशंका है। मामले की जांच की जाएगी।

जितेन्द्र पालीवाल @ राजसमंद शहर में गत वर्ष गणपति महोत्सव और इस साल गणतंत्र दिवस के लिए बनाई गई मिठाई के जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला, उदयपुर में हुई जांच में अमानक पाए गए हैं। ये सैम्पल सर्वेलेंस के तहत चिकित्सा विभाग की खाद्य सुरक्षा इकाई की ओर से लिए गए थे।

हाल ही में आई इनकी जांच रिपोर्ट में नुकती और घी के नमूने अमानक पाए गए हैं। किसी सैम्पल में नुकती को चमकदार बनाने के लिए रसायनयुक्त खतरनाक रंग का इस्तेमाल हुआ तो कहीं घी के दाम पर तेल और वनस्पति घी की मिठाई बनाकर बांट दी गई। दोनों उत्सवों के लिए सैकड़ों किलो मिठाई तैयार की गई थी। आशंका है कि नगर परिषद और अन्य संस्थाओं ने भी इनमें से बड़ा हिस्सा खरीदा।
कुछ पार्षदों ने बताया कि शुद्ध देसी घी से निर्मित मिठाई के दाम पर नगर परिषद ने मिलावटी मिठाई खरीदकर आमजन में बांट दी। चिकित्सा विभाग के अनुसार नुकती और घी के ये सैम्पल नियमित सर्वेलेंस कार्रवाई के तहत लिए गए थे, ताकि यह जांचा जा सके कि बाजार में उत्सवों पर बन रही मिठाइयों का मानक स्तर क्या है। जानकारी मिली कि गणतंत्र दिवस के लिए शहर के एक मैरिज गार्ड में बने किचन में बड़े पैमाने पर मिठाई बनी, जहां मौके पर परात में करीब 200 किलो नुकती पड़ी थी, वहीं बच्चों में बांटने के लिए पॉलीथिन के छोटे पैकेट्स में भी नुकती रखी थी।

इन मौके पर बड़े पैमाने पर अमानक मिठाइयोंं की आशंका
सरकारी व निजी स्तर पर बड़े प्रशिक्षण, सरकारी कार्यक्रम, चुनाव, त्योहार, उत्सव, मेलों के समय अमानक मिठाइयां बनने की सम्भावना ज्यादा रहती है। खाद्य सुरक्षा विभाग को राज्य सरकार की ओर से प्रतिमाह सर्वेलेंस के तहत 15 और एक्ट में कार्रवाई के लिए 10 नमूनों को संग्रहित करने के निर्देश हैं।

यह हैं चार रिपोर्ट
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. 24 जनवरी, 2024 को एक मैरिज गार्डन में बनी मिठाई के लिए गए सैम्पल जांच रिपोर्ट में अमानक पाए गए। नुकती में डाला गया टाटे्रजिन कलर मानक स्तर से अधिक था। इसी सैम्पल के घी में ब्यूटीरो-रेफ्रेक्टोमेट (बीआर) स्तर 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक 44.80 था। यानि घी मिलावटी था।
2. 24 जनवरी, 2024 को लिए गए नुकती के ही एक और सैम्पल की जांच रिपोर्ट में बीआर रजें 56.3 है, जबकि आइडल रेंज 40 से 44 के बीच होनी चाहिए। घी की गुणवत्ता खराब पाई गई। आयोडिन (वनस्पति) वैल्यू 25-38 के बीच होनी चाहिए, जबकि यह 95.80 थी। यह भी नमूना अमानक निकला।
3. 4 जनवरी, 2024 लिए गए घी का नमूना जांच में अमानक निकला। देसी घी और वनस्पति में फर्क दर्शाने वाला बोडोइन टेस्ट पॉजिटिव पाया गया, जबकि यह नेगेटिव होना चाहिए। आयोडिन वैल्यू आइडल रेंज 25-38 की तुलना में 41.9 मिली। सैपोनिफिकेशन टेस्ट वैल्यू 205-235 की बजाय 194.51 मिली। यह घी में फैट को दर्शाता है।
4. 22 सितम्बर, 2023 (गणेशोत्सव) पर लिए नुकती का नमूने जांच में अमानक पाया गया। इसमें मैटेनिल येलो कलर मिला, जो प्रतिबंधित है। अगर फूड कलर भी इस्तेमाल हो तो वह पीपीएम तक 100 का ही इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सिंथेटिक कलर स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। यह केवल औद्योगिक उत्पादों में उपयोग हो सकता है।

इनका कहना है...
जांच में जो नमूने अमानक पाए हैं, उनके घी की गुणवत्ता खराब है। हालांकि रिफाइन ऑयल, वनस्पति, पॉम ऑयल खाने में उपयोग आते हैं, लेकिन शुद्ध देसी घी और इनमें कीमत का अंतर होता है। सर्वेलेंस के तहत संग्रहित नमूनों की अमानक रिपोर्ट पर कार्रवाई निर्देशानुसार ही की जाती है। फूड सेफ्टी एक्ट में निर्देश मिलने पर अदालत में चालान पेश किया जाता है।
शशिकांत शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, राजसमंद

जिले में करीब 1800 अधिक मार्बल, ग्रेनाइट, फेल्सपार और क्वाट्र्स की खदान है। मार्बल और ग्रेनाइट की माइंस में ब्लॉक निकलते हैं। उन ब्लॉक को गैंगसा और कटर के माध्यम से स्लेब तैयार किया जाता है। इनकी कटिंग के दौरान मार्बल और ग्रेनाइट की स्लरी निकलती है। उक्त स्लरी के लिए कई स्थानों पर डम्पिंग यार्ड बना रखे हैं, लेकिन कई टेक्ट्रर चालक रात्रि के समय स्लरी को भरकर डम्पिंग यार्ड में डालने के स्थान पर खुली जगह अथवा खाली प्लॉट में डाल देते हैं। इसके साथ ही कुछ लोग जमीन की भर्ती में इसका काम ले रहे हैं। इसके कारण नगर परिषद क्षेत्र के कई स्थानों पर स्लरी भरी हुई दिखाई देने लगी है। इससे जमीन के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसके बावजूद राजस्थान राज्य प्रदूषण विभाग, नगर परिषद सहित जिला प्रशासन भी इस और ध्यान नहीं दे रहा है। इसके कारण इनके हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं।

फैक्ट फाइल (जिले में)
- 350 गैंगसा संचालित
- 800 मार्बल के कटर
- 750 ग्रेनाइट कटर
खदान एक नजर
- 959 मार्बल की माइंस
- 189 ग्रेनाइट की माइंस
- 319 क्वाट्स की खदान
- 376 फेल्सपार खदान
यह हुआ उत्पादन
- 42 लाख टन करीब मार्बल का उत्पादन
- 17.50 लाख टन करीब ग्रेनाइट का उत्पादन
मार्बल स्लरी से यह होता नुकसान
- जमीन का उपजाऊपन खत्म हो जाता है
- आस-पास की फसलों को नुकसान पहुंचता
- मार्बल स्लरी में मवेशी फंसकर मर जाते
- स्लरी से भूमिगत जल भी दूषित होता है

यह हो सकता उपयोग
- स्लरी में प्रचुर मात्रा में होता है कैल्शियम
- स्लरी का सीमेंट फैक्ट्रियों में होता उपयोग
- मुर्गी दाने में कैल्शियम के रूप आता काम
- रंग-रोगन, वॉल पुट्टी बनाने के आती काम
- टाइल्स बनाने में होता है स्लरी का उपयोग
साधारण सभा में गूंजा मुद्दा
नगर परिषद की साधारण सभा में विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने नगर परिषद के अधिकारियों से पूछा की जे.के.मोड ुुपुलिया के किनारे खाली जमीन में स्लरी डाली जा रही है। बारिश के दौरान यह बहकर रोड पर आएगी इससे दुर्घटना हो सकती है। इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा, तो नगर परिषद के अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने तुरंत उक्त स्थान से मार्बल स्लरी हो हटवाने के निर्देश दिए थे।

खुले में अथवा प्लॉट में स्लरी डालना गलत
मार्बल और ग्रेनाइट की स्लरी को खुले में अथवा प्लॉट आदि में नहीं डाला जाना चाहिए। इसके लिए डम्पिंग यार्ड बने हैं वहां पर इसे डाला जाना चाहिए। इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।
- रवि शर्मा, अध्यक्ष मार्बल गैंगसा एसोसिएशन राजसमंद
पर्यावरण, जीव-जंतु और सभी को है नुकसान
पडत जमीन (खाली) पर स्लरी डाली जाती है तो उस स्थान और उसके आस-पास के कुछ क्षेत्र में कोई भी वनस्पति पनक नहीं सकेगी। इसके साथ ही छोटे-छोटे छिद्रों से पानी का जमीन में रिसाव होता है, जिससे भू-जल स्तर बढ़ता है वह पूरी तरह से बंद हो जाएगा। जीव-जतुंओं को भी नुकसान होगा। इससे पारिस्थितिक तंत्र भी गड़बड़ा सकता है।
- डॉ. विश्वनाथ नंदी, कृषि अनुसंधान अधिकारी मृदा विज्ञान, राजसमंद

आमेट थाना क्षेत्र में नगर के समीप चंद्रभागा नदी किनारे आमेट-देवगढ़ रोड पर दो कारों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया। दोनों कारों की भिड़त से उनके टायर बाहर निकल गए और कारों को भी नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।

कार की चपेट में आने से बाइक सवार युवती घायल
कुंवारिया कस्बे के फोरलेन पर स्थित अंबेडकर सर्किल के निकट शुक्रवार दोपहर के समय कार की चपेट में आने से बाइक सवार युवती घायल हो गई। पुलिस के अनुसार कुंवारिया निवासी हेमा बाइक से अंबेडकर सर्किल की ओर जा रही थी कि कार ने उसे चपेट में ले लिया। इससे बाइक सवार युवती घायल हो गई। दुर्घटना की सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस के कार्मिक रामसिंह व आनमोल आहारी मौके पर पहुंचे। वे घायल का प्राथमिक उपचार करके जिला चिकित्सालय ले गए। बताया गया कि युवती के पांव पर गंभीर चोट लगी है।

Bhim Hospital news भीम उपखंड मुख्यालय स्थित राजकीय उप जिला चिकित्सालय में गत 2 वर्षों से विशेषज्ञों के विभिन्न पद रिक्त होने से मरीज को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में 39 फीसदी पद खाली पड़े हैं।

उपखण्ड मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञों के पद रिक्त होने एवं संसाधनों की उपलब्धता के अभाव में भर्ती मरीजों को उपचार सम्बंधी दिक्कतें हो रही हैं। विशेष तौर से ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाएं गड़बड़ा रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई के लिए नवीन स्वीकृत भवन का निर्माण कार्य भी वर्तमान में बंद है।

हालात ये हैं कि अस्पताल में वरिष्ठ विशेषज्ञ व सामान्य चिकित्सकों के कुल 28 में से 14 चिकित्सक यानि आधे पद खाली हैं। चिकित्सालय में औसतन प्रतिदिन 600 से ज्यादा मरीज आते हैं। कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त होने ने मरीज दूसरे शहरों के सरकारी व निजी अस्पतालों का रुख करते हैं।

ये प्रमुख पद हैं खाली
उपजिला अस्पताल में वरिष्ठ विशेषज्ञ (शल्य), कनिष्ठ विशेषज्ञ (शल्य), कनिष्ठ विशेषज्ञ (मेडिसन), कनिष्ठ विशेषज्ञ (नेत्र-रोग), कनिष्ठ विशेषज्ञ (शिशु-रोग), कनिष्ठ विशेषज्ञ (अस्थि-रोग), कनिष्ठ विशेषज्ञ (नाक, कान, गला), चिकित्सा अधिकारी (दन्त), वरिष्ठ रेडियोग्राफर, सहायक रेडियोग्राफर, लैब टेक्निशियन, मशीन विद मैन पद खाली हैं, वहीं ट्रॉमा इकाई में कनिष्ठ विशेषज्ञ (निश्चेतन), चिकित्सा अधिकारी स्नात्कोत्तर (हड्डी-रोग) के एक-एक, ईसीजी टेक्निशियन का एक और नर्सिंग ऑफिसर के पांच पद खाली हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में चिकित्सा अधिकारी के 4, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के 2, नर्सिंग ऑफिसर के 8 पद खाली पड़े हैं।

फैक्ट फाइल...
80 में से 59 कर्मचारी ही कार्यरत हैं पीएमओ भवन में
10 में से 8 पद ट्रॉमा इकाई में हैं खाली
22 में से 15 पद खाली हैं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में

पंचायत समिति राजसमंद के ग्राम पंचायत पसुन्द में आरक्षित भूमि पर संचालित डम्पिंग यार्ड संचालन का अनुबंध 31 जनवरी 2024 को समाप्त हो गया था। ग्राम पंचायत पसुन्द में 2 अक्टूबर 2023 को आयोजित ग्राम सभा की बैठक के प्रस्ताव संख्या 7 अनुसार डंपिंग यार्ड को ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित करने का निर्णय लिया गया था, जो विधि सम्मत नहीं पाया गया। साथ ही ग्राम पंचायत पसुन्द की बैठक 19 जनवरी 2024 के प्रस्ताव संख्या 4 में विभिन्न वाहनों के दरों के लिए राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम 2012 एवं नियम 2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पारित प्रस्ताव भी विधि सम्मत नहीं होने से राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 की धारा 92 में वर्णित शक्तियों का प्रयोग करते हुए ग्राम पंचायत पसुन्द की ओर से पारित प्रस्ताव को जिला कलक्टर ने रद्द कर दिया है।

राजस्व आय की ना हो हानि
डंपिंग यार्ड में प्राप्त होने वाली गीली स्लरी की अनुमानित मात्रा एवं आय के साथ ही सूखी स्लरी के विक्रय से अनुमानित राशि की गणना उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से प्राप्त रिपोर्ट अनुसार आरक्षित दरों पर निर्धारित करने एवं आगामी वर्ष के लिए निविदा प्रक्रिया संपन्न होने तक डंपिंग यार्ड पसुन्द के संचालन विकास अधिकारी पंचायत समिति एवं तहसीलदार की ओर से निगरानी की जाएगी। जिला कलक्टर के आदेशानुसार दोनों अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि डंपिंग यार्ड विधि सम्मत संचालित होता रहे तथा किसी भी प्रकार के राजस्व आय की हानि नहीं हो।
यह होंगे कमेटी में, सात दिन में देनी होगी रिपोर्ट
कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार उपखंड अधिकारी, परियोजना अधिकारी लेखा जिला परिषद गौरव सोमानी सदस्य, उपविधि परामर्शीय कलक्ट्रेट राकेश ओझा सदस्य, विकास अधिकारी संगीता व्यास सदस्य सचिव, खनिज अभियंता द्वितीय राजसमंद गोपाल बच्छ सदस्य होंगे। यह कमेटी आरक्षित डंपिंग यार्ड का भौतिक सत्यापन करते हुए प्रतिदिन प्राप्त होने वाली गीली स्लरी की अनुमानित मात्रा एवं आय के साथ ही सूखी स्लरी विक्रेता से अनुमानित राशि की गणना का रिकॉर्ड तैयार करेगी। कमेटी द्वारा गणना उपरांत आरक्षित दरों का निर्धारण कर दरों को रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत करेंगे। गीली स्लरी होने से पर्यावरण नुकसान डम्पिंग यार्ड के आसपास सभी वृक्षारोपण के साथ ही किसी प्रकार के राजस्व हानि नहीं होने आदि के सुझाव सहित जांच वस्तुस्थिति की रिपोर्ट सात दिवस में कलक्टर को भिजवाना सुनिश्चित करेगी।

भीम कस्बे के सरकारी अस्पताल परिसर में डीएमएफटी योजना अंतर्गत 28 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई भवन का निर्माण कार्य करीब 6 माह से अधरझूल में है।चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की योजना के तहत 50 बेड का की यह चिकित्सा इकाई पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी।

भवन निर्माण कार्य के तहत केवल नींव की खुदाई हुई है, जिसके लिए आठ लाख 50 हजार रुपए एवं भूमि समतलीकरण के लिए तीन लाख रुपए सहित कुल 11.50 लाख रुपए का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया है, लेकिन उसके बाद से वर्तमान में कार्य ठप पड़ा है।- यह बनना था भवन में

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक भवन, डॉक्टर्स चैंबर, ऑपरेशन थिएटर, अल्ट्रासाउंड रूम, डिस्पेंसरी, गायनिक रूम, ओपीडी पार्किंग, शिशु एवं मातृ गहन चिकित्सा इकाई, वार्ड सहित अन्य कक्ष बनने हैं। उप जिला चिकित्सालय, भीम के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के अनुसार एमसीएच विंग के लिए डीएमएफटी योजना अंतर्गत 28 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे, जिसका पीडब्ल्यूडी ने टेंडर जारी किया था। वर्तमान में कार्य बंद होने के कारण शेष राशि सरकार ने डीएमएफटी मद में प्रत्याहारित कर ली है।

विवादग्रस्त हो गई जमीन, अदालत में चल रहा वाद
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भीम के प्रधानाचार्य विजेंद्रसिंह शेखावत ने बताया कि विद्यालय की भूमि पर एमसीएच विंग भवन निर्माण कार्य रुकवाने को लेकर 2 सितम्बर, 2023 को प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को पत्र प्रेषित किया था। स्थानीय विद्यालय के दक्षिणी परिसर में स्थित कृषि संकाय के विद्यार्थियों के प्रायोगिक कार्य के लिए भूमि के खसरा संख्या 10515 बटा 9900 भूमि आवंटन विवादग्रस्त होने के कारण अपर जिला न्यायालय में दायर वाद का निस्तारण होने तक वादग्रस्तस्थल की मौके व अभिलेख स्थिति यथावत बनाए रखने का आदेश जारी हुआ था। इस पर अस्थायी निषेधाज्ञा जारी की गई है।

उप जिला चिकित्सालय के लिए नंदावट में 25 बीघा भूमि आवंटन प्रक्रियाधीन
इधर, उपजिला चिकित्सालय के लिए नंदावट में 25 बीघा भूमि का आवंटन प्रस्तावित है। तहसीलदार अनिता सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत टोगी के राजस्व गांव नंदावट में राजकीय चिकित्सालय के लिए भूमि आवंटन की फाइल जिला कलक्टर कार्यालय में लम्बित है। टोगी पटवारी हंसराज मीणा ने बताया कि अस्पताल के लिए सत्र 2018-19 के आराजी संख्या 2641-1843 में 10 बीघा जमीन पूर्व में आवंटित की गई थी। वर्तमान समय में नंदावट के आराजी संख्या 2546-1419 में 5 बीघा व 2667-1419 में 10 बीघा जमीन आवंटित की गई है, जिसमें उपकारागृह भीम के लिए आवंटित भूमि भी शामिल है। खसरा संख्या 1420 में 4 बीघा एवं 2673-1419 में 6 बीघा कुल 25 बीघा भूमि आवंटन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। उप कारागृह भीम को 1420 एवं 2544-1420 में से 15 बीघा भूमि आवंटन का प्रस्ताव जिला कलक्टर कार्यालय को भेजा गया।

राज्य सरकार ने भीम को जिले का पांचवां नगर निकाय तो एक साल पहले घोषित कर दिया, लेकिन इसकी झोली में न तो संसाधन है, न स्टॉफ, न कोई बजट का बंदोबस्त। यही वजह है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के अंतरिम बजट घोषित होने के बाद राज्यभर में स्थानीय निकायों की बजट बैठकें खत्म हो चुकी हैं, लेकिन भीम नगरपालिका में कोई हलचल ही नहीं है।नगरपालिका क्षेत्रवासियों को बजट बैठक की उम्मीद लगी हैं, लेकिन स्थानीय निकाय अधिकारी, कर्मचारी, संसाधनों और बजट की कमी का सामना कर रहा है।

जिले के सबसे बड़े उपखंड मुख्यालय की भीम ग्राम पंचायत को 66 वर्ष बाद गत वर्ष बजट में राज्य सरकार ने नगर पालिका का दर्जा दे दिया था, लेकिन एक साल के अंतराल में जमीनी हालातों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

जिले की राजसमंद नगर परिषद, आमेट, नाथद्वारा और देवगढ़ नगरपालिकाओं में वित्तीय वर्ष 2024-25 की बजट प्रस्ताव बैठकें आयोजित हो चुकी हैं, लेकिन भीम नगरपालिका रामभरोसे चल रही है। मौजूदा सत्ताधारी दल के विधायक हरिसिंह रावत ने विधानसभा में प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम-295 के अंतर्गत नवगठित नगरपालिका भीम के कार्यालय निर्माण एवं विभिन्न विकास कार्यों के संबंध में हालात सुधारने का मुद्दा भी उठाया था, लेकिन कहीं कोई असर नजर नहीं आ रहा है।

आय-व्यय की दशा-दिशा तय नहीं
बजट को लेकर कोई दशा-दिशा तय नहीं होने से नगरपालिका की वित्तीय स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। आगामी वर्ष के आय-व्यय को लेकर जनता में भी असमंजस का माहौल है। नगरपालिका की आय के स्रोत, विकास और पूंजीगत के मद्देनजर पार्षदों में भी भ्रामक स्थिति बनी हुई है।

इनका कहना है...

मैंने 9 अक्टूबर, 2023 को कार्यग्रहण किया था। पालिका की साधारण सभा नहीं हुई है। पूर्व की ग्राम पंचायत के संसाधनों एवं सफाईकर्मियों से साफ-सफाई एवं बिजली व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट को लेकर शीघ्र ही बैठक बुलाई जाएगी।
कैलाशराम पंचारिया, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका, भीम

नगरपालिका क्रमोन्नत हुए करीब एक वर्ष होने के बाद साधारण सभा नहीं हुई है। किसी तरह के विकास के कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए गए हैं और राज्य सरकार से हमें कोई बजट भी नहीं मिला है।
यशोदा कंवर, पालिकाध्यक्ष, भीम

राजसमंद पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने पदभार ग्रहण करते ही जिले के पुलिस महकमे में व्यापक फेरबदल किए हैं। चार अलग-अलग जारी तबादला सूचियाें में जिले में 15 थानाधिकारियों को इधर-उधर कर दिया है। 7 पुलिस निरीक्षक, 28 उपनिरीक्षक, 36 एएसआई और 276 कांस्टेबल के भी स्थानांतरण किए हैं।पुलिस निरीक्षकों की सूची के अनुसार योगेश चौहान को नाथद्वारा थानाधिकारी के पद से राजनगर, लीलाधर मालवीय को राजनगर से नाथद्वारा, हनवंत सिंह सोढ़ा को आमेट से भीम थानाधिकारी, सुनील शर्मा को श्रीनाथजी पुलिस थाना नाथद्वारा से रेलमगरा, पदस्थापन को प्रतीक्षारत श्याम सिंह रतनू को कांकरोली थानाधिकारी बनाया है। पदस्थापन को प्रतीक्षारत लक्ष्मणराम विश्नोई को महिला अपराध अनुसंधान सेल और दलपत सिंह को श्रीनाथजी मंदिर पुलिस थानाधिकारी के पद पर भेजा गया है।

पुलिस उप निरीक्षकों की तबादला सूची जारी कर कमलेन्द्र सिंह को देवगढ़ से आमेट थानाधिकारी, ओमसिंह को कुंवारिया से केलवा, सोनाली शर्मा को पुलिस लाइन से थानाधिकारी कुंवारिया, सुरेन्द्र सिंह को साइबर क्राइम थाना से खमनोर, कैलाश सिंह को चारभुजा से कांकरोली थाने में, भवानीशंकर को खमनोर से दिवेर थानाधिकारी, प्रताप सिंह को पुलिस लाइन से चौकी कामलीघाट, विशाल गवारिया को पुलिस लाइन से थानाधिकारी केलवाड़ा, सुआलाल को पुलिस लाइन से थाना साइबर क्राइम में, अक्षय कुमार को पुलिस लाइन से थाना भीम में, विजेन्द्र सिंह को मानव तस्करी प्रकोष्ठ से थानाधिकारी देलवाड़ा, गोवर्धन सिंह को थाना नाथद्वारा से थानाधिकारी चारभुजा, रमेशलाल को थानाधिकारी देलवाड़ा से राजनगर द्वितीय थानाधिकारी, प्रीति रतनू को पुलिस लाइन से देवगढ़ थानाधिकारी सहित कुल 28 उप निरीक्षकों के तबादले किए हैं। 276 कांस्टेबलों को स्वैच्छिक और प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर जिलेभर में भेज गया है। 36 सहायक उप निरीक्षक भी बदले गए हैं। सभी पुलिस अधिकारी व जवानों को तत्काल प्रभाव से ज्वॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्थान स्टेट कृषि विपणन बोर्ड की ओर से ईनाम परियोजना के तहत मोबाइल क्लीनिंग एण्ड सार्टिंग मशीन उपलब्ध कराने के आदेश अप्रेल 2020 में जारी हुए थे। इसके तहत अगस्त 2021 में करीब 20 लाख रुपए की लागत से यह मशीन उपलब्ध कराई गई। इस मशीन के उपलब्ध कराने के बाद से अभी तक एक बार भी इसका उपयोग नहीं हो सका है। यह मशीन आई है तब से अभी तक एक ही जगह खड़ी है। ऐसे में यह मशीन अब चालू है अथवा खराब हो गई इसकी जानकारी कृषि उपज मंडी के कार्मिकों को भी नहीं है। उल्लेखनीय है कि पछले साल जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं की बिक्री के लिए कोई काश्तकार नहीं पहुंचा था। इसके कारण पिछले साल भी यह मशीन किसी काम नहीं आई।किसी ने नहीं दिखाई रुचि
मोबाइल क्लीनिंग एण्ड सॉर्टिंग मशीन के किसी काम नहीं आने पर सरकार के निर्देशानुसार मशीन को किराए पर देने के लिए दो बार निविंदा भी आमंत्रित की गई, लेकिन किसी भी प्राइवेट कम्पनी एवं समर्थन मूल्य पर खरीद करने वाली संस्थाओं ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसके कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

यह आती है काम
जानकारों के अनुसार इस मशीन से समर्थन मूल्य पर की गई खरीद की ग्रेडिंग की जाती है। खरीद में मशीन के माध्यम से कच्चा दाना, छोटा दाना अलग करने, मिट्टी के कण और लकड़ी आदि के टुकडों को अलग करने आदि के काम आती है। इसका उपयोग एफसीआई आदि करते हैं।
सिर्फ दो कार्मिक, सचिव का हुआ स्थानातंरण
कृषि उपज मंडी की खाली पदों के चलते स्थिति खराब है। यहां पर 12 पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ एक एलडीसी एवं एक कम्प्यूटर ऑपरेटर कार्यरत है, ऐसे में 10 पद रिक्त चल रहे हैं। प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से गार्ड लगा रखे हैं। मंडी सचिव का पद भी 2016-17 से खाली चल रहा है। वर्तमान में इसका अतिरिक्त प्रभार कुलदीप सिंह के पास था, उनका भी गत दिनों स्थानातंरण देवली हो गया। इसके कारण यह पद भी खाली चल रहा है।

कुंवारिया कस्बे के सदर बाजार में आमेट रोड किनारे मधुमक्खियां और भंवर इन दिनों हजारों की संख्या में मरे हुए पाए गए। इससे पर्यावरणप्रेमियों में चिंता है। उन्होंने मौसम के लगातार बदलते मिजाज, कृषि कार्यों में बढ़ते कीटनाशकों के उपयोग और पर्यावरण की प्रतिकूलता को इसकी वजह बताया है।

कस्बे के एक तीन मंजिला मकान के ऊपरी हिस्से में मधुमक्खियोंं ने छत्ता बना रखा था। इस छत्ते से विगत 10 दिनों में सैकड़ों मधुमक्खियां हर रोज जमीन पर गिरकर तड़पते हुए दम तोड़ रही हैं। मधुमक्खियों के इस तरह मरने को लेकर पर्यावरणप्रेमियों ने चिंता व्यक्त की है।

पर्यावरणप्रेमी गिरिराज काबरा ने बताया कि बदलते मौसम व पर्यावरण की प्रतिकूलता के असर से मधुमक्खियां मर रही हैं। यह भी आशंका जताई कि संचार तकनीकी भी मधुमक्खियां मरने का कारण हो सकती है। संचार कंपनियों के टॉवरों के रेडिएशन से भी पर्यावरण पर नकारात्मक असर हो सकता है।

मधुमक्खियां नहीं रही तो पर्यावरण को होगा नुकसान
पर्यावरणप्रेमी महेन्द्र टांक ने बताया कि पर्यावरण की समृद्धि को बनाए रखने में मधुमक्खियों का महत्वपूर्ण किरदार होता है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि अगर किसी कारण पृथ्वी पर मधुमक्खियां समाप्त हो जाए तो कृषि एवं मानव का विकास बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। पर्यावरणप्रेमियों ने बताया कि कृषि कार्यों में बढ़ते कीटनाशकों के उपयोग व रेडियेशन से भ्रमर और मधुमक्खियों की प्रजनन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। इस कारण इनकी संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। कृषि में कीटनाशकों के सम्पर्क में आने से तथा विकिरण की तीव्रता के कारण इनके पंखों और शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे इनकी छत्ता निर्माण क्षमता कम हो जाती है और विकिरण के कारण ये मार्ग से भी भटक जाती हैं।

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बताया कि मधुमक्खियां और भ्रमर समाप्त होने से पर्यावरण व वनस्तपति के विकास पर सीधा पड़ता है। मधुमक्खियां फूलों से परागकण की निशेचन प्रक्रिया के तहत एक से दूसरे स्थान तक परिवहन में महत्वपूर्ण सहयोग करती है। मधुमक्खियां ही नहीं रहेंगी तो पुष्प के परागकण का निशेचन व परिवहन ठप हो जाएगा, जिससे पर्यावरण व कृषि कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव दिखाई पड़ेगा।

इनका कहना है...

ग्लोबल वॉर्मिंग व पर्यावरण असंतुलन तो कारण है ही, साथ ही कृषि, फल व फूल उत्पादन के लिए पेस्टिसाइड जैसे कीटनाशकों का अंधाधुंध भी मधुमक्खियों के जीवन के लिए अधिक घातक है। मधुमक्खियों की संख्या जितनी अधिक घटेगी, उससे फल, फूल व फसल उत्पादन में बाधा उत्पन्न होगी। कृषि कार्यों में पेस्टिसाइड का उपयोग बहुत संयमित ढंग से करना चाहिए।
डॉ. शिवलाल चावला, पुष्प विज्ञान प्राध्यापक एवं विशेषज्ञ, नवसारी

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार प्रदेश में आएमएस 2024-25 के दौरान समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद का कार्य 10 मार्च से 30 जून तक किया जाएगा। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के लिए पंजीयन का कार्य ऑनलाइन जारी है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है। सरकार की ओर से इस पर 20 जनवरी से खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिए गए हैं। काश्तकारों को अधिकाधिक रजिस्ट्रेशन कराने के लिए काश्तकारों को विविध तरीकों से प्रेरित किया जा रहा है। इसके बावजूद अभी तक सिर्फ पांच ही काश्तकारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उल्लेखनीय है कि खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन 20 जनवरी से 25 जून तक सुबह 7 से शाम 7 बजे तक ऑनलाइन पंजीयन करा सकेंगे। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद के लिए 2400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

जिले में यहां होगी खरीद
जिले के कांकरोली, मदारा और कुरज में खरीद की जाएगी। इसी प्रकार रेलमगरा, नाथद्वारा, जीएसएस राज्यावास, जीएसएस ओड़ा, जीएसएस पीपली डोडियाना, जीएसएस कोटड़ी और जीएसएस कुंवारिया में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद केन्द्र बनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिले में पिछले साल भी गेहूं के समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए केन्द्र बनाए गए थे, लेकिन नाममात्र के रजिस्ट्रेशन हुए थे।
मार्च के पहले सप्ताह से होगी कटाई
जिले में इस बार गेहूं की 31530 हेक्टेयर में बुवाई हुई है। वर्तमान में फसलों की स्थिति अच्छी बताई जा रही है, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी के कारण गेहूं का दाना छोटा रहने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके कारण इसकी क्वालिटी भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि गेहूं की कटाई अगले माह के प्रथम सप्ताह से शुरू होगी, जबकि कई स्थानों पर अगेती फसलें होने के कारण कटाई का कार्य शुरू हो गया है।

Ambani family at Shrinathji Temple अंबानी परिवार की मुखिया कोकिलाबेन के 89वें जन्मदिन पर शनिवार को प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में भव्य छप्पनभोग मनोरथ हुआ। आयोजन में शामिल होने अम्बानी परिवार के तमाम सदस्य व मित्रगण नाथद्वारा पहुंचे। कोकिला बेन ने प्रभु श्रीनाथजी को सोने का हार पधराया।


श्रीनाथजी को छप्पनभोग मनोरथ में 351 प्रकार के व्यंजनों का भोग धराया गया। विशेष मनोरथ के लिए मुंबई से विशेष विमान से उद्योगपति मुकेश अंबानी, पत्नी नीता अंबानी, बड़े पुत्र आकाश अम्बानी शनिवार सुबह डबोक हवाईअड्डा उतरे एवं वहां से सडक़ मार्ग से नाथद्वारा पहुंचे। कोकिला बेन, छोटे पुत्र अनिल अंबानी, पुत्रवधू टीना एवं बेटी के अलावा कथा मर्मज्ञ रमेश भाई ओझा शुक्रवार शाम को श्रीनाथजी की नगरी में पहुंच गए थे।


सभी ने श्रीनाथजी मंदिर में डोल तिबारी एवं रतन चौक तक धराए प्रसाद के छप्पनभोग मनोरथ के दर्शन किए। प्रसाद उठाने के बाद सभी ने डोल तिबारी श्रीनाथजी एवं ठाकुरजी की गोद में बिराजित निधि स्वरूप लाड़ले लालनजी के दर्शन किए। वे फागोत्सव की गुलाल से भी सराबोर हो गए। तिलकायत पुत्र विशाल बावा ने ठाकुरजी को लाड़ लड़ाते हुए आरती उतारी, तब तक अंबानी परिवार के सदस्य प्रभु के सम्मुख हाथ जोडक़र दर्शन करते रहे। कोकिला बेन ने ठाकुरजी के सम्मुख भेंट अर्पित की।

कोकिला बेन को दी बधाई
मंदिर से बाहर आकर मुकेश अम्बानी, नीता, आकाश आदि ने कोकिलाबेन को जन्मदिन की बधाइयां दी। फिर सभी मोतीमहल व लालनजी बगीचा में पहुंचे, जहां स्वागत परंपरानुसार विशाल बावा ने सभी के सिर पर फेंटा बांध रजाई ओढ़ाई व प्रसाद प्रदान किया। फिर सभी मेहमान वल्लभ विलास कॉटेज पहुंचे, जहां दोपहर का भोज रखा गया। भोजन के बाद सभी सदस्य अलग-अलग वाहनों से मुम्बई जाने के लिए उदयपुर के डबोक हवाईअड्डे के लिए रवाना हो गए।

पिछले साल बिपरजॉय तूफान के तहत हुई बारिश, मानसून की बारिश, गोमती नदी चलने एवं खारी फीडर से लगातार पानी की आवक होने के कारण राजसमंद झील छलक गई थी। इसके पश्चात नवम्बर माह में जल वितरण समिति की बैठक हुई। बैठक में 16 नवम्बर से बायीं और दायीं नहर खोलने का निर्णय लिया गया। दायीं नहर नियत समय पर खुल गई, लेकिन बायीं नहर को खोलने वाले सिस्टम में तकनीकी खामी के चलते 19 नवम्बर को खोला गया। नहरों से लगातार पानी की निकासी जारी है। उल्लेखनीय है कि नहरों को खोला गया था तब झील का जलस्तर 29.80 फीट था। बायीं नहर को एक बार खोलने पर 28 दिन और दायीं नगर से 32 दिन पानी की निकासी की जाती है।
पांच दशक से अधिक पुरानी नहरें और सलूस
जानकारों के अनुसार झील से दो नहरें निकल रही है। इसमें जलचक्की के निकट बनी नहर स्टेट टाइम की बताई जा रही है। इससे कुछ गांवों में ही पानी पहुंचता है। इरिगेशन पाल से निकलने वाली बायीं नहर और सलूस का 1966-67 में निर्माण हुआ था। इसके पश्चात समय-समय पर नहरों की मरम्मत कराई गई थी, अब स्थिति बहुत खराब हो गई है।

फैक्ट फाइल
- 2.82 किमी. चौड़ाई और 6.4 किमी लम्बाई झील की
- 30 फीट पूर्ण गेज और 3786 एमसीएफटी भराव क्षमता
- 45 राजसमंद के गांव में 10,144 हेक्टेयर में होती सिंचाई
- 07 नाथद्वारा के गाांव की 467 हेक्टेयर में होती है सिंचाई
- 700 एमसीएफटी पीएचईडी के लिए रखा जाता है रिजर्व
चार साल पहले 39 लाख से कराई नहरें दुरुस्त
जल संसाधन विभाग की ओर से डिस्ट्रीक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट योजना के तहत दायीं नहर की मरम्मत और सुदृढिकऱण का कार्य करवाया गया था। इसके तहत 14 जून 2018 को कार्य प्रारंभ हुआ था, जो 13 मार्च 2019 को पूरा हुआ था। इस पर करीब 39,81,980 रुपए खर्च हुए थे। इसके पश्चात से इनका रख-रखाव नहीं होने के कारण नहरों के आस-पास खाली प्लॉट, मकान और रोड पर पानी व्यर्थ ही बह रहा है।

27 को बंद होगी नहर, फिर अंतिम बार खुलेगी
रबी की फसल की सिंचाई के लिए नहरें खुली हुई है। अब 27 फरवरी को बंद की जाएगी। किसानों की मांग पर 5-7 दिन बाद फिर से नहरों को फिर खोली जाएगी। इस सीजन में अंतिम बार नहर को खोला जाएगा। उल्लेखनीय है कि झील में 16.50 फीट पानी पेयजल के लिए रखा जाएगा।
रिसाव से भर रहा पानी, प्रस्ताव करा रहे तैयार
नहरों में रिसाव हो रहा है। क्षतिग्रस्त नहरों को दुरुस्त कराने के लिए प्रस्ताव तैयार करवाए जा रहे हैं। स्वीकृति मिलने पर टेण्डर आदि लगाए जाएंगे। वर्तमान में सिंचाई के लिए नहर खुली हुई है, इसे 27 को बंद किया जाएगा।
- प्रतीक चौधरी, एक्सईएन सिंचाई विभाग राजसमंद

मोबाइल चिकित्सा इकाईयों को भीम विधायक हरि सिंह रावत, जिला प्रमुख रतनी देवी जाट, जिला कलक्टर डॉ. भंवरलाल, जिला परिषद सीईओ राहुल जैन, प्रधान अरविंद सिंह, समाजसेवी माधवलाल जाट सहित अन्य अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर चार मोबाइल वेटनरी चिकित्सा इकाइयों को रवाना किया। जिले को ऐसी 10 मोबाइल चिकित्सा इकाइयां प्रात हुई है। ये चिकित्सा इकाइयां एक फोन कॉल पर दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचकर पशुओं का उपचार करेंगी। इसके लिए पशुपालक को हेल्पलाइन नंबर 1962 डायल करना होगा। अगर कहीं किसी पशु का एक्सीडेंट होता है तब भी इस नंबर पर फोन करके चिकित्सा इकाई को बुला सकते हैं।
फैक्ट फाइल
- 10.87 लाख जिले में कुल पशु
- 4.79 लाख करीब गौवंश-भैंसवंश
- 5.50 लाख बकरे-बकरी
- 58 हजार भेड़ व अन्य पशु

पशुपालकों को यह मिलेगा फायदा
- पशु का घर बैठे उपचार करेगी
- 50 तरह की दवाईयां दी जाएगी
- छोटी सर्जरी आदि हो सकेगी
- गौबर-मूत्र, रक्त परीक्षण की सुविधा
- टीकाकरण और गर्भधारण की सुविधा
मोबाइल चिकित्सा इकाई का किया अवलोकन
हरी झंडी दिखाने के बाद अतिथियों ने मोबाइल चिकित्सा इकाइयों का अवलोकन किया। इसमें दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग डॉक्टर अजय अरोड़ा सहित विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला कलेक्टर ने इन इकाइयों का सफल संचालन करते हुए अधिक से अधिक पशुपालकों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए हैं।

शहर के राजनगर से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित है। वर्तमान में यहां पर 20 ट्रेड संचालित है। स्थिति यह है कि यहां पर उपनिदेशक, समूह निदेशक, यूनिट इंस्टेक्टर (अनुदेशक), सहायक प्रशासनिक अधिकारी, कनिष्ठ लेखाकार एवं अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी सहित 20 पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 4 ही पद स्थायी रूप से भरे हुए हैं। इसके अलावा सभी 16 पदों पर अस्थाई कार्मिक कार्यरत है। स्थायी कार्मिकों के अभाव में जिम्मेदारी भी तय नहीं हो पाती है। इसके कारण विद्यार्थियों के साथ अनुदेशकों को भी परेशानी होती है। इसी प्रकार कुंभलगढ़ में आठ ट्रेड संचालित है। इसमें एक स्थायी अनुदेशक कार्यरत है। रेलमगरा में भी अतिथि अनुदेशक के भरोसे आईटीआई संचालित हो रही है। इसके बावजूद इस और ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
यह पड़ता है फर्क
- आरपीएससी से चयनित अनुदेशक प्रतिभावान होते हैं
- अतिथि अनुदेशक जैसे मिलते हैं उन्हें रखना मजबूरी होता है
- अस्थायी जॉब होने के कारण जिम्मेदारी तय नहीं कर सकते है।

पंचायत समिति पर खोल दी आईटीआई
जानकारों के अनुसार जिले में हर पंचायत समिति में आईटीआई खोल दी गई है। भीम, देवगढ़ में आईटीआई भवन का निर्माण जारी है, जबकि कुंभलगढ़ और रेलमगरा आईटीआई भवन का निर्माण पूरा हो गया है। इसमें से कई आईटीआई अतिथि अनुदेशकों के भरोसे संचालित हो रही है। राजसमंद आईटीआई में सीटें पूरी नहीं भरने का कारण प्रत्येक पंचायत समिति मुख्यालय पर आईटीआई खुलना माना जा रहा है।
देवगढ़ आईटीआई में यहां संचालित
राजनगर आईटीआई परिसर में ही देवगढ़ आईटीआई संचालित की जा रही है। देवगढ़ में आईटीआई भवन का निर्माण जारी है। राजनगर और देवगढ़ आईटीआई में कुल मिलाकर 20 ट्रेड संचालित हो रही है। इसमें स्टोन प्रोसेसिंग और स्टोन माइनिंग ट्रेड नई शुरू की गई थी, विद्यार्थियों के रुचि नहीं दिखाने के कारण एक भी प्रवेश नहीं हुआ।

उपनिदेशक के पास चार स्थानों का चार्ज
राजनगर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में उपनिदेशक के रूप के पास भीलवाड़ा, गंगापुर और उदयपुर प्रोडेक्शन का भी अतिरिक्त चार्ज है। इसके कारण इन्हें अधिकांश समय बाहर ही रहना पड़ता होगा। ऐसे में मॉनिटरिंग कैसे हो पाती होती इसका स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
फैक्ट फाइल
- 432 स्वीकृत स्वीकृत सीटें
- 269 वर्तमान में सीटें भरी
- 163 सीटें वर्तमान में खाली
- 20 ट्रेड आईटीआई में संचालित
कई पद रिक्त है, लगा रखे अतिथि अनुदेशक
आईटीआई में कई पद रिक्त है, लेकिन अतिथि अनुदेशकों से काम चलाया जा रहा है। देवगढ़ आईटीआई भी यहीं पर संचालित हो रही है। तीन जगह का अतिरिक्त चार्ज है।
- नीरज नागौरी, उपनिदेशक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान राजसमंद

ग्रामीणों ने बताया कि रात ही नहीं, सुबह भी तय समय से पूर्व दुकानें खुल जाती हैं, जबकि राज्य सरकार के निर्देशानुसार नेशनल हाइवे व स्टेट हाइवे से 200 मीटर दूर शराब का ठेका होना निर्धारित है। बीते दिनों विधायक हरि सिंह रावत ने जनवरी माह में विधानसभा एवं जिला परिषद की बैठक में मुद्दा उठाया था। हाइवे पर बरार के समीप कुशलपुरा चौराहे पर शराब ठेका संचालित होने की बात कहते हुए उन्होंने अफसोस व नाराजगी जताई और कार्यवाही की मांग की, लेकिन विभागीय अधिकारियों के कानों पर पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

सत्ताधारी विधायक की आवाज भी बेअसर
खुद सत्ताधारी विधायक की आवाज भी जिम्मेदार अधिकारियों ने सुनना पसंद नहीं किया। मुद्दा उठाने के कई दिन बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग की मिलीभगत से एक वैध दुकान के साथ दस अवैध दुकानें खुलवा रखी हैं।

प्रतिबंधित पंचायत के पास दुकान लगाने की ललक
बरार ग्राम पंचायत में मतदान के तहत पूर्ण शराबबंदी हो चुकी है तथा राजकीय नियमानुसार बरार में शराब ठेका संचालन बंद किया जा चुका है। ऐसे में शराब कारोबारियों का आकर्षण बरार के समीप दुकान खोलने का है।

यहां सडक़ों के किनारे खुली दुकानें
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बली जस्साखेड़ा, टोगी, बालाचाराट, नंदावट, बलाइयां का कुआं, कुण्डाल की गुंआर कूकरखेड़ा, कुशलपुरा आदि अन्य दुकानें एवं भीम-गुलाबपुरा हाइवे, ताल-लसानी मार्ग पर काकरोद-लसानी, ईसरमंड-बदनौर मार्ग, करेड़ा रोड आदि जगहों पर पर सडक़ किनारे शराब की दुकानें खुली हुई हैं। वाहनचालकों व ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बड़े-बड़े ग्लोसाइन बोर्ड लगा रखे हैं। हाइवे किनारे छोटे-मोटे होटल व ढाबों पर भी अवैध तरीके से बिना अनुज्ञापत्र मांस-मदिरा परोसी जा रही है।

Mid Day Meal New order : राजस्थान के सरकारी स्कूल में मिड-डे-मील की गुणवत्ता चेक करने का नया आदेश आया है। नया नियम जानकर आप चौंकेंगे। सरकारी विद्यालयों में बन रहे दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) का पहला निवाला अब विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की माताएं चखेंगी। मिड-डे-मील आयुक्तालय ने सभी स्कूलों को आदेश जारी किए हैं कि मिड-डे-मील में प्रतिदिन पांच माताओं को भोजन चखाकर गुणवत्ता परखी जाए। आदेश के अनुसार अब मिड-डे-मील के निरीक्षण व भोजन की पौष्टिकता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन उस स्कूल में पढ़ने वाले पांच विद्यार्थियों की माताओं को बारी-बारी से विद्यालय में बुलाया जाएगा। यह निरीक्षण महिलाओं के लिए ऐच्छिक होगा।

प्राथमिक स्तर पर सौ ग्राम गेहूं, सौ ग्राम चावल प्रति विद्यार्थी सरकार उपलब्ध करवाती है, जबकि 5.45 पैसे कुकिंग कनर्वजन राशि मिलती है। इसमें मिर्च-मसाला, तेल वगैरह की खरीद होती है। छठी से आठवीं तक 8.17 रुपए कुकिंग कनर्वजन राशि के मिलते हैं, जबकि डेढ़ सौ ग्राम गेहूं, सौ ग्राम चावल सरकार उपलब्ध करवाती है।

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थानाधिकारी भगवान सिंह झाला ने बताया कि मृतक की पहचान नाथद्वारा थाना क्षेत्र के उथनोल में अडगेला निवासी प्रहलादसिंह (26) पुत्र करणसिंह के रूप में हुई है। पुलिस घटनास्थल का मुआयना करने के बाद ट्रांसफार्मर से ऑयल चोरी के प्रयास में करंट लगने से युवक की मौत का संदेह जता रही है। पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। थानाधिकारी ने बताया कि बिजली निगम की ओर से मिली रिपोर्ट पर विद्युत अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में विस्तार से छानबीन की जा रही है।
हमने ऑयल चोरी की रिपोर्ट दी: एईएन
बिजली निगम के खमनोर सहायक अभियंता कार्यालय के एईएन मयंक जोशी ने बताया कि उन्होंने ट्रांसफार्मर से ऑयल चोरी की रिपोर्ट दी है। सेमा चौराहा और खेड़लिया गांव में ऑयल चोरी की रिपोर्ट दी है। एईएन ने बताया कि सेमा में लगे ट्रांसफार्मर से किसी ने ऑयल चोरी कर लिया। खेड़लिया में जहां हादसा हुआ, वहां से ऑयल चोरी का प्रयास किया गया, मगर ये हादसा हो गया।

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