'तिरंगा गर्ल' के नाम से पहचान बनाने वाली तंजीम मेरानी एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, कुछ मांगों को लेकर चल रहे उनके अनशन को राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने आश्वासन देकर मंगलवार को ख़त्म करवा दिया। हैरानी इस बात की भी कि उनकी मांग पूरी करवाने का आश्वासन मंत्री जी ने सिर्फ मौखिक रूप से ही नहीं दिया, बल्कि इसे लेकर बाकायदा एक लिखित आश्वासन दिया गया है।
इन मांगों को लेकर चला अनशन
'तिरंगा गर्ल' तंजीम मेरानी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर पाबंदी की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से अनशन पर बैठीं हुईं थीं। जयपुर के मानसरोवर में पांच दिन से चल रहा अनशन कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर के आश्वासन के बाद ख़त्म हो गया। तंजीम का कहना है कि मुस्लिम परिवारों में लड़कियों को हिजाब पहनने जैसी रूढ़िवादी परम्पराओं से बाहर आकर शिक्षा के लिए प्रेरित करना ज़रूरी है।
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मंत्री ने लिखित पत्र में ये लिखा
कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने तंजीम मेरानी का ना सिर्फ अनशन ही तुड़वाया, बल्कि राज्य स्तर पर कई बड़े फैसले लेने तक का आश्वासन दिया। मंत्री दिलावर ने लिखित पत्र में लिखा, 'आपकी देशभक्ति की भावना और राष्ट्रीय सेवा के जज्बे को देखकर मैं अभिभूत हूं। शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस कोड के पालन समान नागरिक संहिता और नागरिकता संशोधन कानून को लागू करवाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर आपके आह्वान से समाज में सकारात्मक संदेश गया है।
मंत्री ने लिखा, 'राजस्थान में शिक्षण संस्थानों के लिए ड्रेस कोड निश्चित है। शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में सभी विद्यार्थियों को निर्धारित पोशाक अर्थात यूनिफॉर्म में ही आने का आदेश हैं। आपकी मांगों और 5 दिनों के अनशन पर संज्ञान लेते हुए मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड संबंधी नियम का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं समान नागरिक संहिता के संबंध में ड्राफ्ट कमेटी बनाने का विषय शीघ्र मंत्री परिषद की बैठक में रखा जाएगा और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।

क्यों बनी 'तिरंगा गर्ल' की पहचान?
तंजीम मेरानी ने सिर्फ 12 साल की उम्र में जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था। तभी से उनका नाम 'तिरंगा गर्ल' के तौर पर जाना जाने लगा। वे मुस्लिम समाज से हैं, लेकिन अपने ही समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने को लेकर मुखर रहती हैं।
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जान से मारने की मिली धमकियां
तंजीम कहती हैं कि उन्हें सामाजिक बुराइयों को दूर करने की मुहीम चलाने के लिए कई बार विरोध का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें तेज़ाब हमले और जान से मारे जाने तक की धमकियां मिल चुकी हैं। समाज के ही कुछ संगठनों ने उनके खिलाफ फतवा तक जारी किया है।