>>: कुंभलगढ़ में जंगल सफारी कराने वाले वन विभाग से मांग रहे 50 लाख...पढ़े पूरा मामला

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जिप्सी संचालकों का आरोप है कि वन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे उनको आजीविका चलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जब से जंगल सफारी शुरू हुई है तब से केवल एक महीने का पैसा ही वन विभाग की ओर से उन्हें मिला है। ऐसे में उनके करीब 50 लाख रुपए बाकी हैं। इसमें गाइड और जिप्सी संचालक शामिल है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अल्पेश असावा का कहना है कि जून महीने से अभी तक जिप्सी संचालकों को पैसा नहीं मिला है। इसके चलते संचालकों में वन विभाग के प्रति नाराजगी है। सभी संचालक ज्यादातर इसी व्यवसाय पर आधारित है। ऐसे में पैसा नहीं मिलने से उन्हें गुजारा चलाने में दिक्कत हो रही है।

ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के बाद से दिक्कत
पिछले साल ऑनलाइन के तौर पर जंगल सफारी बुकिंग की सुविधा शुरू की गई थी, जिससे पर्यटकों का पैसा सीधा वन विभाग में जमा हो जाता है। इसके बाद से संचालकों को पैसा मिलना बंद हो गया। कई बार सभी संचालक वन विभाग ऑफिस में अपनी समस्या लेकर गए, लेकिन उन्हें केवल आगे की तारीख देकर टाला गया।

ऐसे समझें एक जिप्सी संचालक का कितना पैसा अटका

अध्यक्ष अल्पेश ने बताया कि सफारी में चलने वाली कुल 53 जिप्सी हैं, जिनमे एक जिप्सी के साथ गाइड के औसतन महीने के 20 हजार रुपए के करीब बनते हैं। ऐसे में करीब 50 लाख रुपए जिप्सी संचालकों के बकाया चल रहे हैं।
जल्द होगा समाधान
तकनीकी कारण यह समस्या आई थी। लेकिन, अब जल्द ही संचालकों की समस्या को लेकर समाधान किया जा रहा है। इनके खाते में जल्द ही बकाया पैसा आ जाएगा।

जितेंद्रसिंह शेखावत, क्षेत्रीय वन अधिकारी कुंभलगढ़

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