>>: हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर सुरेशिया में गरीबों को नहीं मिल रहा मुफ्त राशन, पट्टे की फाइल अटकी, बारहवीं तक का स्कूल भी नहीं

>>

Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment!


-राजस्थान पत्रिका के 'स्पीक आउट' कार्यक्रम में सुरेशिया के लोगों ने बताई समस्याएं
-गलियों में पुलिस गश्त बढ़ाने तथा निराश्रित पशुओं के विचरण को रोकने की मांग रखी
हनुमानगढ़. राजस्थान पत्रिका का 'स्पीक आउट' कार्यक्रम शुक्रवार को जंक्शन के सुरेशिया में हुआ। पुलिस चौकी के नजदीक स्थित गौतम बुद्ध स्कूल में हुए कार्यक्रम में लोगों ने क्षेत्र की समस्याएं बेबाक तरीके से रखी। आसपास रहने वाले लोग उत्साह के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और अपनी समस्याओं को पत्रिका के साथ साझा किया। लोगों का कहना था कि बड़ी आबादी होने के बावजूद विकास के मामले में क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है। स्थिति यह है कि नालियां भी सही तरीके से नहीं बनाई गई है। कुछ जगह टेंडर हो गए हैं। लेकिन नाली निर्माण कछुआ चाल से हो रहा है। मजदूरी करके जीवन बसर करने वाले लोगों को प्रधान मंत्री आवास योजना की किश्तें नहीं मिल रही है। नागरिकों ने बताया कि बरसों से यहां निवास करने के बावजूद नगर परिषद के अधिकारी हमें पट्टा भी जारी नहीं कर रहे हैं। जब अफसरों के पास पट्टे की फाइल लेकर जाते हैं तो वह वह बेचने वाले का शपथपत्र लेकर आने की बात कहते हैं। जबकि सर्वे तथा बिजली-पानी के बिल की अनिवार्यता को दरकिनार रहे हैं। लोगों के पास बिजली व पानी के बिल होने क बाद भी उनके पट्टे नहीं बनाए जा रहे हैं। इसके कारण पीएम आवास योजना में उनका चयन नहीं हो रहा है। गलियों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था यह है कि यदि बिजली लाइन में फाल्ट आ जाए तो एफआरटी टीम समय पर नहीं पहुंचती। सुरेशिया की आबादी अधिक शिक्षित नहीं है। इसलिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाने की प्रक्रिया भी वह नहीं समझते। इस स्थिति में घंटों बिजली गुल रहती है। कुछ लोगों ने बताया कि उनके नाम खाद्य सुरक्षा सूची में शामिल नहीं हो रहे। पोर्टल भी बंद पड़ा है। इस स्थिति में गरीब लोग मुफ्त की राशन योजना से वंचित हो रहे हैं। कुछ महिलाओं का कहना था कि उनकी पेंशन भी अटकी हुई है। समय पर पेंशन नहीं मिलने से उनके लिए गुजर बसर करना मुश्किल हो रहा है। सोलर एनर्जी फर्म संचालक कपिल सहारण ने बताया कि सुरेशिया में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। यहां पर मजदूर परिवार के लोग बच्चों को शिक्षा से जोडऩे में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का दायित्व है कि वह ऐसे लोगों को समझाएं। आवश्यकता के हिसाब से उनका आर्थिक सहयोग भी करें। इससे समाज में अच्छे बदलाव आएंगे।

बेटे का बना, बाप भटक रहा प्रमाण को
सरकारी तंत्र की अजीबो-गरीब कार्यशैली हमेशा सामने आती रहती है। पत्रिका स्पीक आऊट में सुरेशिया निवासी दयाशंकर ने बताया कि मेरे बेटे का जाति प्रमाण पत्र बन गया है। अफसरों ने जो कागज मांगे, हमने पेश किए। लेकिन अब जब मैं खुद जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए गया हो अफसरों ने मना कर दिया। स्कॉलरशिप तथा अन्य प्रमाण पत्रों पर दो राजपत्रित अफसरों के साइन की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अफसर बिना जान-पहचान के साइन नहीं करते। ऐसे में योजनाओं का लाभ लेने में गरीब लोगों को दिक्कत आती है।

गलियों में फब्तियां कसते युवक, बेटियों का बाहर निकलना मुश्किल
गौतम बुद्ध पब्लिक स्कूल के व्यवस्थापक अमरजीत शाक्य ने बताया कि सुरेशिया क्षेत्र में ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। वह शिक्षा का महत्व नहीं समझते हंैं। बहुत से लोग अपने बच्च्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। ऐसे बच्चों को चिन्ह्ति करके उन्हें स्कूल से जोडऩे की जरूरत है। इस कार्य में शिक्षा विभाग का सहयोग लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जब तक अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को साक्षर व शिक्षित नहीं किया जाएगा, साक्षर भारत अभियान पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सुरेशिया में कुछ स्कूलों के आगे आवारा युवक घूमते हैं। छुट्टी होते ही युवक बेटियों पर फब्तियां कसते हैं। इसलिए बेटियों को स्कूल का सफर करने में दिक्कत आती है। पुलिस अधिकारियों से आग्रह किया कि छुट्टी के टाइम में कम से कम पुलिस स्कूलों के आसपास गश्त करे। जिससे आवारा युवकों को कुछ सबक मिल सके।

40 हजार से अधिक आबादी, बारहवीं तक का स्कूल नहीं
नागरिकों ने बताया कि सुरेशिया में आठ वार्ड आते हैं। करीब 40 हजार की आबादी है। लेकिन सुरेशिया में अभी तक एक भी बारहवीं तक का सरकारी स्कूल नहीं है। ऐसे में खास तौ पर बेटियां शिक्षा से वंचित हो रही हैं। मजदूर तबके लोग बेटियों को दूर स्कूल भी नहीं भेजते। यदि सरकार बारहवीं तक का सरकारी स्कूल सुरेशिया में बना दे तो इससे काफी विद्यार्थी स्कूल से जुड़ सकेंगे। इस संबंध में हमने सरकार को कई बार अवगत करवाया। लेकिन अब तक मांग अधूरी है।

पत्रिका को सराहा
पत्रिका के 'स्पीक आऊट' कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान पत्रिका हमेशा से कमजोर वर्ग की आवाज को बुलंद करता रहा है। पार्षद सुनील अमलानी ने कहा कि राजस्थान पत्रिका में छपी खबरों का असर भी होता है। कच्ची बस्तियों में जाकर लोगों की आवाज को सुनने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे आमजन के जीवन में बदलाव आएगा। पार्षद राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पत्रिका आमजन के मुद्दों को हमेशा उठाता रहा है। इसका दबाव भी प्रशासन पर पड़ता है।

.....लोगों की यह प्रमुख मांगें आई सामने....
- सुरेशिया में बारहवीं तक का सरकारी विद्यालय बनाया जाए।
-बरसाती पानी की निकासी के लिए नालियों का समुचित निर्माण हो।
-वार्ड में निराश्रित पशुओं की समस्या विकराल है। हर गली में पशु लड़ते रहते हैं। लोगों को घायल कर रहे हैं। पशुपालकों के परिवार को शहर से दूर शिफ्ट किया जाए।
-बिजली लाइन में फाल्ट आने की स्थिति में इसे ठीक करने के लिए शहर स्तर पर कंट्रोल रूम का नंबर जारी हो। ताकि पब्लिक सीधे वहां शिकायत दर्ज करवाए।
-सुरेशिया में एक गली में बंदर का आतंक है। पुजारी को घायल कर चुका है। वार्ड 54 में घूम रहे खुंखार बंदर को पकडऩे की मांग भी लोगों ने रखी।
-सुरेशिया के प्लानिंग क्षेत्र में लोगों को नहीं बसाया जाए। पार्षदों ने टाउन व जंक्शन से कुछ परिवारों को प्लानिंग क्षेत्र में बसाने पर एतराज किया। उनका कहना था कि ऐसे लोग पट्टे के लिए भटक रहे हैं। भविष्य में वह कहीं के नहीं रहेंगे।
-सुरेशिया के सैंकड़ों परिवारों ने पट्टे व पीएम आवास योजना में आवेदन कर रखा है। इनके पट्टे जारी कर इनका चयन पीएम आवास में किया जाए।
-गलियों में कचरा उठाने वाली ट्राली रोज आए। जिससे सफाई हो सके।
-सुरेशिया में सरकार अधिकृत ईमित्र खोला जाए। जिससे गरीब लोगों से लूट बंद हो सके।

You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at rajisthanews12@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription.