>>: मनरेगा के मजदूर कहां हो गए गायब

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मनरेगा में काम कर रहे मजदूरों की संख्या में एक माह में कमी आई है। पिछले माह की अपेक्षा करीब 5 हजार मजदूरों ने कच्चे काम से किनारा किया है। माना जा रहा है कि चुनावी सीजन में इन मजदूरों को तमाम कार्य मिल गए हैं। मजदूरी भी उन्हें यहां ज्यादा मिल रही है। ऐसे में वह मूल काम की ओर नहीं लौट रहे।

जनवरी व फरवरी माह में 21 हजार मजदूर कार्य कर रहे थे। ये कच्चे कार्यों के अलावा बांधों की मरम्मत आदि में लगाए गए थे। इस माह का आंकड़ा घटकर 16 हजार आ गया है। बताया जा रहा है कि अप्रेल में करीब 3 से 4 हजार लेबर और कम हो सकती है। ऐसे में ये आंकड़ा 11 हजार तक पहुंच सकता है। जिला परिषद के एक अधिकारी का कहना है कि फसलों की कटाई के सीजन में मनरेगा के मजदूरों की संख्या कम हो जाती है। साथ ही चुनावी सीजन में भी कमी आती है। इस समय लेबर कम होने का ये भी एक कारण माना जा रहा है। कुछ लोग दूसरे राज्यों में भी नौकरी की तलाश में चले जाते हैं।

बानसूर में सबसे ज्यादा मजदूर कर रहे काम...सबसे कम गोविंदगढ़ में
मनरेगा के तहत बानसूर पंचायत समिति में सर्वाधिक मजदूर 2334 काम कर रहे हैं। वहीं सबसे कम गोविंदगढ़ पंचायत समिति में 408 हैं। इसी तरह बहरोड़ में 719, कठूमर में 1148, किशनगढ़बास में 955, कोटकासिम में 608, लक्ष्मणगढ़ में 513, मालाखेड़ा में 579, मुंडावर में 845, थानागाजी में 2294 लेबर कार्य कर रही है। तिजारा, उमरैण, राजगढ़ के आंकड़े एक हजार से कम हैं। यानी यहां भी िस्थति अच्छी नहीं है।

कोरोना काल में बढ़ गए थे मजदूर
जिले में जॉबकार्ड धारकों की संख्या 1.50 लाख है। कोरोना काल में सर्वाधिक लोगों को यहां काम दिया गया। करीब 80 हजार लोगों को काम आवंटित किए गए थे। उसके बाद से कभी 20 तो कभी 25 हजार तक ही मजदूरों को ही काम मिल पा रहा है। अब चुनावी सीजन में आंकड़ा कम हुआ है।

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