>>: Rajasthan News : राजस्थान में यहां पेयजल के हालात विकट, प्यासी जनता मीलों चलकर पानी लाने को मजबूर

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Rajasthan News : सौ दिन में कायाकल्प का सपना और जीतते ही जमाना बदलने के दावे डंके की चोट पर करने वाले विधायक पानी की समस्या को लेकर घिर गए हैं। गर्मी आते ही जिले की सभी विधानसभाओं में पेयजल को लेकर त्राहि-त्राहि मची है और माननीय अभी भी माला-साफा पहने हुए दूल्हे की तरह इतराते हुए घूम रहे हैं। जनता उनसे पानी पर सवाल करती है तो वे बीस साल से कछुए की चाल से चल रही योजनाओं का नाम लेते हैै या फिर पिछली सरकार को कोसकर इतिश्री कर रहे हैं।

 

बालोतरा-बायतु और सिवाना में पेयजल के हालात विकट

बालोतरा-बायतु और सिवाना इन तीनों ही इलाकों में हालात विकट है। पोकरण-फलसूण्ड परियोजना से पानी आना है। मजे की बात है कि पानी की कोई कमी नहीं है। नाचना और मोहनगढ़ के डेम में पानी भरा पड़ा है। परेशानी यह है कि चार पंप चलाने के लिए जितनी बिजली चाहिए उतनी नहीं मिल रही। बिजली के लिए यह कहा जा रहा है कि ग्रिड से नहीं आ रही। सवाल यह है कि लाएगा कौन? कोई तो सिस्टम होगा? ऐसा नहीं है कि यह आज की कहानी है। बीस साल से जिला परिषद-पंचायत समिति और अन्य बैठकों में बिजली और पानी दोनों महकमे के अधिकारी यह नूराकुश्ती खेलते हुए हंगामा करते हैं।

विधायक इन्हें कलक्टर और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में सवाल करते हैं तो जलदाय महकमे के पास रटारटाया वाक्य है, योजना जिस डिजाइन से बनी है उसके लिए 16 घंटे निर्बाध बिजली चाहिए और छह घंटे से ज्यादा नहीं मिल रही। जो मिल रही है उसमेें भी ट्रिपिंग हो रही है। डिस्कॉम के कारिंदे कहते है, बिजली का तो पूरे राज्य में संकट है। फिर बहस का अंत बावड़ी का नाम गुलसफ्फा और रवानगी।

 

हर समस्या का समाधान करवाएंगे कहने वाले विधायक झाड़ रहे पल्ला

विधायक भी इसको सुनने के बाद कुछ तेजी से बोलकर इतिश्री कर देते हैं। प्रश्न यह है कि कुलजमा 100-125 दिन पहले जब वोट मांगने आए थे तब ताल ठोककर कहा था कि चिंता न करें..हर समस्या का समाधान करवाएंगे। वो ताल,रंग और चाल कहां चले गए? प्यासी जनता का गुस्सा फूट रहा है। बॉर्डर के गांवों में नर्मदा का नीर दूर पड़ा है, मीलों चलकर पानी लाना पड़ रहा है। बायतु का पानी मोहनगढ़ में पड़ा इंतजार कर रहा है कि कब तो बिजली आए और कब प्यासों तक पहुंचाएं। नाचना में जमा पड़ा बालोतरा का पानी चिढ़ा रहा है कि पानी की कमी नहीं है, व्यवस्था की कमी है।

असल में विधायकों को एकबार फिर अफसरों ने यह तस्वीर दिखा दी है कि होई वही जो व्यवस्था रुचि राखा.. विधायक सिर पटक ले या माथा। मुश्किल में अब वो सिर है जिन्होंने फिर एक बार झोली भरकर वोट दिए कि पानी की पीड़ा हरेंगे औैर अब खुद को फिर से ठगा और छला हुआ महसूस कर रहे हैैं।

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