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कोई दो स्वर में बजाता है सीटी, किसी का जिक्र पौराणिक कथाओं में भी, वेटलैंड राघव सागर तालाब पर 48 प्रजातियों के पक्षियों की रहती है मौजूदगी Saturday 06 April 2024 04:55 PM UTC+00 करीब डेढ़ वर्ष पूर्व वेटलैंड घोषित नगर का राघव सागर तालाब देसी-विदेशी पक्षियों की पनाहगाह है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता को ये पक्षी और अधिक निखार रहे हैं। यहां सुबह का दृश्य मनोरम होता है। चारों तरफ पक्षियों का कलरव कानों में मानों मकरंद सा घोलता रहा है।अरावली क्षेत्र के पक्षीविद् शत्रुंजय सिंह बताते हैं कि स्थानीय परिवेश में पक्षी दो तरह के होते हैं गैर प्रवासी पक्षी और प्रवासी पक्षी। ये हमारे स्थानीय परिवेश में रहते हैं और प्रवजन नहीं करते हैं, जैसे मैना, बुलबुल, टेलरबर्ड, वेबलर, बत्तख और प्रवासी पक्षी कोमन टील नॉर्दर्न सबलर, पिनटेल, गिद्ध, बार हेडेडगूज आदि। स्थाई प्रवासी पक्षी कनारी फ्लाइसकेचर जल कागली, स्नैक बर्ड, घरट इसे पेलिकन भी कहते हैं, जो गुजरात से आते हैं। लेसर विसलिंग टील रात्रि में भोजन करती है। यह झीलों व तालाबों के आसपास पाई जाती है और दो स्वर में आवाज निकालती है। शत्रुंजय बताते हैं कि हमें विरासत में मिले प्राकृतिक ज्ञान और पक्षियों की पहचान, उनके निवास, खाने-पीने के तरीकों व मौसम के अनुकूल उनकी मौजूदगी की जानकारी रखनी होगी। वह बताते हैं कि पक्षी अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जिनमें पेड़ पर रहने वाले, पानी के तीर पर रहने वाले, पानी के अंदर रहने वाले और भोजन के आधार पर भी इन्हें पहचाना जाता है। कुछ पेड़ों पर भोजन करते हैं, कुछ जमीन पर रहकर, कुछ पानी के किनारे व कुछ पानी के अंदर भोजन करते हैं। इन्हीं विशेषताओं के आधार पर हम इन्हें पहचान सकते हैं। पक्षियों की पहचान उनकी आवाज व उड़ान के आधार पर भी होती है। एक नई चिडिय़ा, जो आती है दक्षिण अफ्रीका से कालीघाटी व साथपालिया दिवेर के जंगलों में दिखाई देती है शर्मिला पक्षी गर्मियों में बनाने होंगे वॉटरहॉल |
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