>>: उधार पर मोटा ब्याज वसूल रहे सूदखोर, पीडि़त की रिपोर्ट पर पुलिस नहीं करती गौर

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सूत्रों के अनुसार बैंक ही नहीं फाइनेंस कम्पनी लोन देने को बेकरार हैं। होम लोन से लेकर गाड़ी समेत अन्य का फाइनेंस भी चंद मिनट में किया जा रहा है। मामूली दस्तावेज के बाद घर बैठे लोन/कर्ज देने वाले है। इस जमाने में अब भी निजी साहूकारों का ना दबदबा कम हुआ ना ही कर्जदारों का आना। बिना किसी लाइसेंस के इस तरह के फाइनेंसर पंद्रह-पंद्रह रुपए सैकड़े की दर से ब्याज वसूल रहे हैं। इन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। कहते भी यही हैं कि हम जबरन उधार थोड़ी देते हैं, किसी की जरुरत होती है तो वो पैसा लेने हमारे पास आता है।
सूत्र बताते हैं कि नागौर जिले में गरीब व जरुरतमंद इन साहूकारों के चंगुल में फंस जाते हैं। फाइनेंस कम्पनी व बैंक के नियम-कायदे के साथ दस्तावेजों के झंझट में भी पडऩा नहीं चाहते। जानकारों के जरिए वो ऐसे साहूकारों के पास पहुंचते हैं जो मांगी हुई रकम, मामूली कागजों पर साइन कर पकड़ा देते हैं। रखने को ये सोना-चांदी ही नहीं गाड़ी अथवा मकान के कागजात तक ले लेते हैं। फिर शुरू होता है वसूली का सिलसिला। मोटा ब्याज चुका पाना जरुरतमंद के लिए मुश्किल हो जाता है। फिर ऐसे में वो इनके जुर्म का शिकार होते हैं। कुछ अपनी जमीन आदि इनके हवाले कर देते हैं तो कुछ इनके आतंक से परेशान होकर पुलिस की मदद लेते हैं । पुलिस भी इनको कोई खासी राहत नहीं दे पाती।
असल में उधारी का यह खेल कोई नया नहीं है। नागौर में कई सूदखोर गिरोह की तरह काम कर रहे हैं। जुआ व सट्टा खेलने वाले हों या छोटा-मोटा धंधा करने वाले, ये छोटी रकम इनसे उधार लेते हैं पर समय पर चुका नहीं पाते और ब्याज इतना बढ़ जाता है कि इन पर जुर्म शुरू हो जाता है। इससे बचने के लिए कई घर तक छोड़ देते हैं।

आए दिन
थानों में रपट
कुछ दिन पहले नकाश गेट से गायब व्यवसायी के परिजनों ने भी रिपोर्ट में यही हवाला दिया। एक सादा कागज मिला, जिस पर लिखा था कि उनके ऊपर कर्ज है, साहूकार परेशान कर रहे हैं। इसी तरह एक अन्य दुकानदार के भी कर्जे की वजह से गायब होने की सूचना पुलिस को मिली है। इससे पहले नगर परिषद कार्मिक महबूब समेत कई दो-तीन महीने तक लापता हुए, उनमें भी कर्जे की बात सामने आई। एक अनुमान के मुताबिक जुआ/सट्टे सहित अन्य कई कारोबारियों के घर से लापता होने की मुख्य वजह ही यही सामने आती है। ऐसे लोगों की हर दस गुमशुदगी में से आठ में यही कारण गिनाए जाते हैं। थानों में उधारी वसूलने अथवा सूदखोरों के आतंक के मामले आए दिन आते रहते हैं।

हर प्रोफेशन
के सूदखोर
ऐसा नहीं है कि इन सूदखोरों का मूल यही काम है। कई प्रापर्टी डीलर तो कई अन्य प्रोफेशन से जुड़े लोग भी मोटी ब्याज पर कर्जा दे रहे हैं। यह भी जानकारी मिली है कि ये भी ब्याज देते समय व्यक्ति/परिवार का पूरा ब्योरा लेते हैं। राजकाज में सु²ढ़ व्यक्ति को ये कर्जा कम देते हैं। इनका निशाना अक्सर वे ही बनते हैं जो कम-पढ़े लिखे होते हैं और उनका कोई मजबूत सहारा नहीं होता।

यहां उधार लेने वाले ही सूदखोर पर भारी
मेड़ता में इससे विपरीत मामला सामने आया। सेनेटरी के एक व्यवसायी ने जरुरतमंद/ जानकारों को उधार दिए। अब चुकाना तो दूर उसके खिलाफ ही ये लोग थानों में झूठी रिपोर्ट दर्ज करा रहे हैं। यहां साहूकार खुद परेशान है, धमकी मिलते ही पुलिस के पास पहुंचता है पर उसकी मदद नहीं हो रही।

रिकवरी ऐसी
कि बस...
इन सूदखोरों से कोई खास अलग प्राइवेट फाइनेंस कम्पनी भी नहीं है। बाइक/कार लोन की किस्त समय पर नहीं मिलती है तो इसके बाउंसर रिकवरी के लिए पहुंच जाते हैं। आए दिन मारपीट के साथी गाड़ी छीनना इनके लिए भी सामान्य बात हो गई है।

संबंधित थाने तक रिपोर्ट करनी चाहिए
&समय-समय पर प्रताडि़त करने वाले सूदखारों की रिपोर्ट मिलने पर पुलिस कार्रवाई करती है। नियम-कायदे से रुपए का लेन-देन हो तो ठीक है पर जोर-जबरदस्ती से ये नहीं चलेगा। ऐसी कोई बात हो तो संबंधित थाने तक रिपोर्ट करनी चाहिए।
नारायण टोगस, पुलिस अधीक्षक, नागौर

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