>>: जयपुर के इस किले का खजाना की खोज के लिए इंदिरा गांधी ने बुलाई थी सेना, गौरवशाली है इस किले का इतिहास

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राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां के लगभग हर शहर में आपको फोर्ट, पैलेस, हवेली जैसी कई खूबसूरत ऐतिहासिक इमारत देखने को मिल जाएंगी। ये राज्य भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां आपको स्थानीय लोगों के साथ-साथ अंग्रेज भी घूमते हुए नजर आ जाएंगे। प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल में निर्मित यहां का हवा महल, जैसलमेर फोर्ट, आगरा फोर्ट, एम्बर पैलेस, आमेर फोर्ट, जोधपुर फोर्ट, उदयपुर फोर्ट आदि हजारों फोर्ट्स लोकप्रिय हैं। जयपुर में भी काफी फोर्ट हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां बेहद दिलचस्प हैं। जिसके बारे में आप दंग रह जाएंगे। आज हम आपको एक ऐसे किले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे जुड़ी कई रोचक कहानियां हैं। जी हां, यहां का जयगढ़ फोर्ट अपने आप में बेहद खास है। यहां के कई किस्सों को सुनने के बाद आपका मन भी इसे देखने को कर जाएगा।

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ये किला आमेर फोर्ट की रक्षा के रूप में खड़ा था, लेकिन उस दौरान ये फोर्ट अपनी कुछ रोचक चीजों के लिए फेमस हुआ था, जिसे कई लोग अफवाह भी मानते हैं। बता दें कि साल 1977 में आपातकाल के दौरान ये किला राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भी काफी रहा था। उस समय यह बात फैली थी कि इस किले की टंकियों और परिसर में भारी मात्रा में खजाना छिपा हुआ है। जिसको सुनने के बाद तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने यहां तलाशी अभियान शुरू करवाया था। उस दौरान गायत्री देवी जेल में थीं और इंदिरा गांधी को भी वो समय खजाना ढुंढवाने के लिए सही लगा। लेकिन ये बहस अभी भी बनी हुई है कि क्या इंदिरा गांधी को खजाना मिला था या तलाशी अभियान व्यर्थ रहा था।

 

इस किले को लेकर बहुत से इतिहासकारों का मानना यह है कि इस किले में खजाना था जिससे जयसिंह ने जयपुर शहर का विकास किया। लेकिन यह बात आपको हैरान कर देती है कि अगर सरकार को जयगढ़ किले का खजाना नहीं मिला तो वो खजाना कहां गया। जयगढ़ किला और उसके खजाने का रहस्य हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर इस किले के खजाने का रहस्य कब सुलझ पायेगा।

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15वीं से 18वीं सदी के बीच बना जयगढ़ किला पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस किले को 'विजय किले' के रूप में भी जाना जाता है, किले की संरचना और निर्माण आपको मध्यकालीन भारत की झलक देगी। उस समय किला खजाने की रक्षा करने के लिए जाना जाता था, यही नहीं आमेर फोर्ट की रक्षा प्रणाली के रूप में भी इस किले का इस्तेमाल किया जाता था। जयगढ़ फोर्ट को 1726 ईस्वी में सावन जय सिंह द्वितीय द्वारा बनाया गया था, जो समुद्र तल से कई सौ फीट ऊपर है। ये किला लगभग विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि किला जयपुर के सबसे मजबूत इमारतों में से एक है।

 

यहां है सबसे बड़ी तोप
ये दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी पहिया वाली तोप है, जिसे आप जयगढ़ किले में देख सकते हैं। किले में ही तोप का निर्माण किया गया था। लेकिन दिलचस्प और हैरत वाली बात तो ये है कि ये तोप चाहे कितनी भी बड़ी क्यों नहीं है, उस समय लड़ाई के दौरान इस तोप का कभी इस्तेमाल नहीं किया गया।

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