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अलवर के कलाकंद को जल्द ही जीआई टैग मिलने की उम्मीद
- कुछ सवालों के जवाब के बाद होगी आगे की कार्रवाई

अलवर. देश-विदेश में अपने स्वाद के लिए मशहूर अलवर के कलाकंद को जल्द ही ज्योग्राफिकल इंडिकेशन यानी जीआई टैग मिल सकता है। इसके लिए करीब एक साल पहले जिला प्रशासन की पहल पर हलवाई एसोसिएशन की ओर से ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद फरवरी में जोधपुर यूनीवर्सिटी में आयोजित बैठक में भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री मुख्यालय चेन्नई की टीम व जनप्रतिधियों के सवालों के जवाब के साथ ही डॉक्यूमेंट भी उपलब्ध कराए जा चुके है। बताया जा रहा है कि जीआई टैग को लेकर करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके बाद अब जून में आयोजित होने वाली बैठक के बाद अलवर के कलाकंद को लेकर अंतिम निर्णय किया जाएगा।

क्या है जीआई टैग

जीआई टैग किसी भी क्षेत्र की विशिष्ट पहचान वाली वस्तु को मिलता है, जो सालों से उस क्षेत्र की खासियत होती है। यह मुख्य रूप से कृषि, प्राकृतिक उत्पाद या एक निर्मित उत्पाद हस्तशिल्प और औद्योगिक सामान जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है। जो विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निर्मित या उत्पादित किया जा रहा है। ये 10 साल के लिए मिलता है।

4 से 5 महीने में मिल सकता है जीआई टैग

जोधपुर में आयोजित बैठक में जिला उद्योग केन्द्र अलवर व हलवाई एसोसिएशन के प्रतिनिधि की ओर से अलवर के कलाकंद को जीआई टैग दिलाने के लिए पैरवी की गई। अब जून में आयोजित होने वाली बैठक में अलवर के कलाकंद के विशिष्ट स्वाद के संबंध मेें पूछे गए कुछ सवालों का जबाव प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद आगामी 4 से 5 महीने में अलवर के कलाकंद को जीआई टैग मिल सकता है।

प्रक्रिया जारी

अलवर के कलाकंद को जीआई टैग दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी बैठक में कलाकंद के स्वाद की विशिष्टताओं के संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब के बाद जीआई टैग मिलने की उम्मीद है।

- विनोद कुमार अग्रवाल, शहर अध्यक्ष, हलवाई एसोसिएशन।

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