>>: हमारी सुनो सरकार, कहां है खेल मैदान

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बानसूर. कस्बे में खेल मैदान नहीं होने के कारण खिलाड़ी वर्ग परेशान हैं। साथ ही क्षेत्र की प्रतिभाएं भी नहीं निखर रही है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा तैयारी कर भारतीय सेना सहित खेलों में अपना दम दिखाने को आतुर तो हैं, लेकिन लेकिन शारीरिक रूप से खुद को मजबूत एवं दौड़ करने सहित व्यायाम के लिए खेल मैदान का अभाव है।
इसे लेकर सरकार एवं जिम्मेदार स्थानीय प्रतिनिधि इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। क्षेत्र में खेल मैदान नहीं होने से खेलों एवं सेना में भाग लेने वाली प्रतिभाएं मुख्य सडक़ों एवं खाली पड़े खेतों में दौड़ते और अभ्यास करने को मजबूर है। युवा खेलों में भाग लेने के लिए अपने स्तर पर ही अपने को शारीरिक रूप से मजबूत कर प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। प्रतिभाओं को अभ्यास का सही मौका मिले तो वह राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम रोशन कर सकती हैं, लेकिन प्रदर्शन ओर अभ्यास सही नहीं होने से मायूस हैं।
अतिक्रमण हटाने को लिखा पत्र: आरटीआई कार्यकर्ता रामगोपाल यादव ने खेल मैदान के लिए आवंटित भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए कलक्टर सहित स्थानीय अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा। जिसमें बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज खेल मैदान पर गोशाला संचालित है। प्रशासन गोशाला को अन्यत्र स्थानांतरित कर खेल मैदान तैयार किया जाना आवश्यक है। जिससे युवाओं को खेलों में जाने का मौका मिल सके।
घूमने को नहीं जगह : सरकार ने बानसूर कस्बे को नगरपालिका तो घोषित कर दिया, लेकिन कस्बेवासियों के लिए सुबह भ्रमण के लिए जगह नहीं है। कस्बेवासी सुबह टहलने के लिए मुख्य सडक़ों पर ही घूमते हैं। बड़ी संख्या में तैयारी करने वाले युवा मुख्य सडक़ों पर दौड़ लगाकर सेना में जाने की तैयारी करते हैं। ऐसे में कभी भी दुर्घटनाएं घटित हो सकती है। मुख्य सडक़ों पर सरपट तेज गति से वाहन दौडऩे के कारण दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।
बजट भी आवंटित : राज्य सरकार ने दो पहले बजट घोषणा में बानसूर में खेल मैदान के लिए 1 करोड़ स्वीकृत किए थे। इसके बावजूद खेल मैदान अटका हुआ है। जिम्मेदार ध्यान दे तो खेल मैदान तैयार हो सकता है। जिले की कई तहसीलों में भामाशाह एवं उद्योगपतियों से सहयोग से खेल मैदान तैयार कराए हैं। पूर्व मंत्री डॉ. रोहिताश शर्मा ने बताया कि खेल मैदान बनना आवश्यक है। इससे युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मौका मिल सके। खेल मैदान बनाने के प्रयास करने चाहिए।

खेल मैदान के लिए जमीन भी आवंटित
कई सालों से एसडीएम कार्यालय के सामने स्थित गिरधारीदास मंदिर के पीछे खेल स्टेडियम के लिए जमीन भी आवंटित की हुई है। जमीन राजस्व रिकॉर्ड में खेल मैदान के नाम से दर्ज भी है, लेकिन वर्तमान में इस खेल मैदान पर गोशाला संचालित है। गोशाला को राज्य सरकार से अनुदान भी प्राप्त हो रहा है। ऐसे में युवाओं के लिए बनने वाले खेल मैदान पर तलवार लटकी हुई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से खेल मैदान के लिए कोई ठोस प्रयास भी नहीं किए जा रहे। युवाओं का कहना है कि मौका मिले तो युवा अपना प्रदर्शन खेलों में कर क्षेत्र का नाम रोशन करे।

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