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Speculation on IPL match 6 राजसमंद. शहर में 100 फीट रोड स्थित एक मकान में बुधवार देर रात मुम्बई इंडियन्स और लखनऊ सुपर जाइंट्स के बीच आईपीएल मैच के दौरान पकड़े गए सट्टेबाजी के खेल में कई खुलासे हुए हैं। बुकी प्रवीण ने पूरा कारोबार चलाने के लिए 20-20 हजार रुपए में पढ़े-लिखे स्थानीय लड़कों को रखा हुआ था। मैच शुरू होने के बाद वह खुद कार लेकर बाहर निकल जाता था और चलती कार में ही पंटरों (पैसा लगाने वाले ग्राहक) और अपने लड़कों से फोन पर लगातार संपर्क में रहता था।

पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि प्रवीण माली पुत्र भंवरलाल अपने 100 फीट पर अम्बेडकर सर्कल के पास स्थित मकान से सट्टे का कारोबार चलाता है। उसके बड़े सटोरियों से संपर्कों की भी पुलिस जांच कर रही है। बुकी प्रवीण ने अपने घर से सट्टेबाजी का धंधा चलाने का पूरा इंतजाम कर रखा था। एक कमरे में तीन लैपटॉप, एक एलईडी टीवी, इंटरनेट राउटर लगा रखा था वहीं, मौके से 16 मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए। इसके अलावा करीब डेढ़ दर्जन नई जारी की हुई सिम भी बरामद की।

पुलिस को जांच में पता चला है कि प्रवीण मैच शुरू होते ही घर से कार में बैठकर बाहर निकल जाता था। पूरे मैच के दौरान वह चलती कार से ही सटोरियों और पंटरों से मोबाइल फोन से लगातार जुड़ा रहता था, ताकि पुलिस की छापेमारी होने पर पकड़ में नहीं आ पाए।

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6 बैंक खाते फ्रिज करवाए
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के बाद रात में ही 6 बैंक खाते फ्रिज करवा दिए, जिनके जरिए सट्टे की रकम का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होता था। इन खातों में अभी भी करीब पांच से छह लाख रुपए बैलेंस होना बताया जा रहा है।

बर्बाद हुए लोग थे परेशान
सट्टेबाजी में ज्यादातर लोग पैसा गवां देते हैं। इस अवैध खेल में काफी पैसा खोकर बर्बाद हो चुके लोग या उनके परिजन ही पुलिस के मुखबीर बने और सटीक सूचना देकर इन्हें पकड़वाया। जिला विशेष शाखा और अपराध शाखा ने राजनगर पुलिस थाने की टीम के साथ मिलकर पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। बुकी प्रवीण माली को पुलिस पिछले 24 घंटे से ज्यादा समय से तलाश रही है। उसके गिरफ्त में आने के बाद कुछ और खुलासे हो सकते हैं।

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राजसमंद में पहला मामला
आईपीएल या किसी क्रिकेट मैच पर 25 करोड़ रुपए की रकम दांव पर लगा सट्टा खेलने का यह पहला मामला पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने मौके से 16 मोबाइल सिम सहित, 16 नई सिम, 3 लैपटॉप चार्जर सहित, 1 टीवी, 1 इंटरनेट राउटर, 7 मोबाइल चार्जर, एक डीटीएच, 3 रिमोट सहित कुल 5 रजिस्टर जब्त किए, जिनमें मैच पर लगाए गए पैसों का हिसाब-किताब है।

टीम में ये भी थे शामिल
राजनगर सीआई डॉ. हनवंत सिंह राजपुरोहित, जिला विशेष शाखा के एएसआई लक्ष्मण सिंह, एएसआई रतनलाल व्यास, एएसआई दशरथ सिंह, हेड कांस्टेबल नरेश पालीवाल, कैलाश पालीवाल, किशोर सिंह, कांस्टेबल लक्ष्मीलाल, महेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र, रतनलाल रेगर, साइबर थाने से हेड कांस्टेबल इन्द्रमल।
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इस अवैध कारोबार के तार कहां तक, किन-किन से जुड़े हैं, ग्राहक कौन हैं, इसकी भी जांच कर रहे हैं। मुख्य आरोपी प्रवीण माली की तलाश जारी है। उसे पकडऩे के बाद और खुलासे हो सकेंगे। जिले में सट्टेबाजी के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम करेंगे।
सुधीर जोशी, पुलिस अधीक्षक, राजसमंद

pocso special court judgement राजसमंद. 16 वर्षीय नाबालिग बालिका को रात्रि में उसके घर से बहला-फुसला व धमकाकर ले जाने और उससे बलात्कार करने के आरोपी को यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय, राजसमंद के न्यायाधीश सुनील कुमार पंचोली ने 20 वर्ष का कठोर कारावास तथा 31,000 रुपए का जुर्माना सुनाया।
विशिष्ट लोक अभियोजक राहुल सनाढ्य ने बताया कि 14 जून, 2019 को पीडि़ता के पिता ने पुलिस थाना भीम में एक लिखित रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया कि एक दिन पूर्व की रात 12 से 2 बजे के बीच उसकी नाबालिग पुत्री को अभियुक्त धन्ना सिंह भगा कर ले गया। तलाश करने पर पता चला कि उसकी पुत्री व धन्ना सिंह, उसकी बहन के घर रुके हुए थे। उन्होंने वहां जाकर देखा, उससे पहले ही अभियुक्त की बहन के यहां से दोनों को भगा दिया गया।

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13 गवाह और 21 दस्तावेज पेश
प्राथमिक सूचना रिपोर्ट पर पुलिस ने प्रकरण पंजीबद्ध कर आवश्यक अनुसंधान पूरा किया तथा आरोपी धन्ना सिंह के विरुद्ध पॉक्सो न्यायालय में विभिन्न धाराओं में आरोप-पत्र पेश किया। न्यायालय में पीडि़ता व राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए विशिष्ट लोक अभियोजक सनाढ्य ने 13 गवाह कोर्ट में परीक्षित करवाए तथा 21 दस्तावेज कोर्ट में प्रदर्शित कराए। अनुसंधान अधिकारी ने पीडि़ता व अभियुक्त के अंत:वस्त्रों से लिए विभिन्न नमूनों की एफएसएल जांच भी करवाई, जिसकी परिणाम रिपोर्ट प्रकरण में अपराधा साबित करने में मददगार रही।

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बलात्कारी को यह हुई सजा
पोक्सो न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अभियुक्त धन्ना सिंह पुत्र सुल्तान सिंह निवासी लसाडिय़ा, थाना भीम को आईपीसी की धारा 363, 376 (3), 376 (2) (ढ) तथा पोक्सो एक्ट की धारा 5(1)/6 में दोष सिद्ध माना और सजा सुनाई।
आईपीसी की धारा 363 : 1 वर्ष का कठोर कारावास तथा 1000 रुपए जुर्माना
आईपीसी की धारा 376(3): 20 वर्ष का कठोर कारावास तथा 20,000 रुपए जुर्माना
आईपीसी धारा 376(2)(ढ) : 10 वर्ष का कठोर कारावास तथा 10,000 रुपए जुर्माना

राजसमंद. वन विभाग की ओर से प्रतिवर्ष की जाने वाली वन्यजीव गणना अब 4 जून को प्रस्तावित है। वन विभाग इसके लिए तैयारियों में जुटा है। वन्यजीव गणना (wildlife census) 2020 के बाद से लगातार विभिन्न कारणों के चलते प्रभावित हो रही है।
वन विभाग की ओर से प्रतिवर्ष वैशाख मास में पूर्णिमा को वन्यजीव गणना की जाती है। इसके चलते यह इस बार 4 मई को प्रस्तावित थी, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण आंधी और बारिश के चलते इसे टाल दिया गया था। इसके चलते अब 4 जून को प्रस्तावित की गई है। वन विभाग की ओर से कुंभलगढ़ रेंज और टॉडगढ़ में बने विभिन्न प्राकृतिक और कृत्रिम वाटर तैयार पर वन्यजीव गणना (wildlife census) की जाती है। वन विभाग के कर्मचारी इनमें पानी भरने का काम भी करते है। वहीं इनके आस.पास ही मचान भी बनाई जाती है। जहां वन विभाग के कर्मचारी 24 घंटे तैनात रहते है। 24 घंटे में एक बार इन वाटर हॉल पर वन्यजीव पानी पीने के लिए अवश्य आते है। जिनकी गणना की जाती है। इसके साथ ही वन विभाग की ओर से ट्रेप कैमरों के माध्यम से गणना की जाती है। वन विभाग इसकी तैयारियों में जुटा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल जिले के टॉटगढ़ और कुंभलगढ़ अभ्यारणय में वन्यजीव गणना की गई थी। इसमें 300 कर्मचारी, वॉलिटिंयर और प्राइवेट पर्सन लगाए गए थे और 212 वाटर हॉल पर गणना की गई थी।
इसलिए प्रभावित हो रही गणना
वन विभाग के जानकारों के अनुसार 2020 के बाद वन्यजीव गणना (wildlife census) प्रभावित हो रही है। वर्ष 2021 में कोरोना के कारण वन्यजीव गणना नहीं हुई थी। इसके बाद 2022 में भी ताउते तूफ ान से भी वन्यजीव गणना प्रभावित हुई थी। जो एक महीने बाद वन्यजीव गणना की गई। इस बार भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण वन्यजीव जीव गणना एक महीना देरी से होगी।

राजसमंद. नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस संसद भवन का वीडियो जारी किया जा चुका है. इसमें लोकतंत्र का मंदिर यानी संसद भवन काफी खूबसूरत दिखाई दे रहा है। संसद भवन के द्वार पर बड़े-बड़े अक्षरों में सत्यमेव जयते लिखा हुआ है। आइए आज जानते हैं इस नए संसद भवन की क्यों पड़ी जरूत और क्या है इसकी खासियत?

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दीया कुमारी ने किया ट्ववीट

राजसमंद से सांसद और सवाई माधोपुर से पूर्व विधायक दीया कुमारी ने ट्ववीट के माध्यम से नए संसद भवन की तारीफ की है। उन्होंने लिखा , शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के बारे में भावुक। इस अद्भुत इमारत के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक - अशोक स्तम्भ है। इसमें 4 शेरों को दर्शाया गया है, जो शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और गर्व का प्रतीक है। नीचे का वृष और अश्व 'सत्यमेव जयते' के आदर्श वाक्य में शामिल कड़ी मेहनत, वफादारी और गति के प्रतिक है।

आपको बता दें कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नए संसद भवन का निर्माण किया गया है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने हैं। दरअसल, सेंट्रल विस्टा राजपथ के क़रीब दोनों तरफ़ के इलाक़े को कहते हैं जिसमें राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के करीब प्रिंसेस पार्क का इलाक़ा भी शामिल है।
सेंट्रल विस्टा के तहत राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, उपराष्ट्रपति का घर भी आता है।

पुराना संसद भवन करीब 100 साल पुराना है। केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा संसद भवन में सांसदों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।

नए संसद भवन में क्‍या है खास

नए संसद भवन की बात करें तो लोकसभा में 888 सीटें हैं और विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोगों के बैठने का इंतजाम है। नई राज्‍यसभा में 384 सीटें हैं और विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्‍यादा लोगों के बैठने की क्षमता है।

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पुरानी संसद का आकार गोल है, जबकि नए संसद भवन को तिकोने आकार में डिजाइन किया गया है. अभी लोकसभा में 590 और राज्‍यसभा में 280 लोगों की सिटिंग कैपेसिटी है , जबकि नए संसद भवन की बात करें तो लोकसभा में 888 सीटें हैं और विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्यादा लोगों के बैठने का इंतजाम है। नई राज्‍यसभा में 384 सीटें हैं और विजिटर्स गैलरी में 336 से ज्‍यादा लोगों के बैठने की क्षमता है। दोनों सदनों के जॉइंट सेशन के वक्त लोकसभा में ही 1272 से ज्यादा सांसद साथ बैठ सकते हैं।

नए संसद भवन में अहम कामकाज के लिए अलग ऑफिस बनाए गए हैं, जो हाईटेक सुविधाओं से लैस हैं। कैफे, डाइनिंग एरिया, कमेटी मीटिंग के तमाम कमरों में भी हाईटेक इक्विपमेंट लगाए गए हैं। कॉमन रूम्स, महिलाओं के लिए लाउंज और VIP लाउंज की भी व्यवस्था की गई है।

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जानिए कहा से आई निर्माण सामग्री

नए संसद भवन के निर्माण के लिए बलुआ पत्थर राजस्थान के सरमथुरा से, सागौन (टिक वुड) की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से मंगाई गई है। कार्पेट उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से मंगवाए गए हैं। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से बांस की लकड़ी की फ्लोरिंग मंगवाई गई है। स्टोन जाली वर्क्स राजस्थान के राजनगर और उत्तर प्रदेश के नोएडा से लिए गए हैं। अशोक प्रतीक को महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से मंगवाया गया है। अशोक चक्र को मध्य प्रदेश के इंदौर से लिया गया है। लाल लाख राजस्थान के जैसलमेर से मंगवा गया है। इसी राज्य के अंबाजी से सफेद संगमरमर पत्थर खरीदे गए हैं। केसरिया ग्रीन स्टोन उदयपुर से मंगवाया गया है। एम-सैंड को हरियाणा के चकरी दादरी, फ्लाई ऐश ब्रिक्स को एनसीआर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से खरीदा गया था। ब्रास वर्क और प्री-कास्ट ट्रेंच गुजरात के अहमदाबाद से लिए गए। एलएस/आरएस फाल्स सीलिंग स्टील संरचना दमन और दीव से ली गई।

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