>>: दिलों को जोड़ने की अमर औषधि है क्षमा

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अजमेर. साध्वी मनोहर श्रीजी ने कहा कि क्षमायाचना जैनियों का आभूषण है। क्षमा मांगने वाला क्षमा देने वाले से भी बड़ा होता है। एक दूसरे से जाने-अनजानेे में हुई भूल, अपराध, गलती के लिए क्षमा मांगना व्यक्ति का कर्तव्य है। दो टूटे हुए दिलों को जोड़ने की अमर औषधि क्षमा ही है। क्षमा देने व लेने से कषायों की शांति होती है। मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होने के लिए क्षमा याचना एक साधन है। साध्वी मनोहरश्री ने गुरुवार को जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छाचार्य श्री जिनदत्तसूरि दादाबाड़ी में आयोजित धर्मसभा में संबोधित कर रही थीं।

रिखब सुराना ने बताया कि साध्वी मनोहर श्रीजी, मुक्तिप्रभा श्रीजी, निरन्जना श्रीजी, काव्यप्रभा श्रीजी और साध्वी डॉ. स्मितप्रज्ञा श्रीजी के सानिध्य में सुशील वेद, नरेन्द्र लालन, सतीश बुरड़, जबरमल बच्छावत ने मन, वचन और काया के अन्तःकरण से साध्वी मंडल और खरतरगच्छ संघ के सभी परिवारों से सामूहिक रूप से क्षमायाचना की। साध्वी डॉ. स्मितप्रज्ञा श्रीजी ने कहा कि गलतियां होने का मूल कारण अहंकार और क्रोध है। खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष विक्रम पारख ने बताया कि दादाबाड़ी में गुरुवार को दादा गुरुदेव की बड़ी पूजा संगीतकार सुनील गोयल एण्ड पार्टी ने पढ़ाया। श्रद्धालुओं ने पूजा का लाभ उठाया।विशिष्ट सेवाओं के लिए किया सम्मानित

विशिष्ट सेवाओं के लिए रिखब सुराना, वयोवृद्ध प्रेमचन्द लूणिया, भगवानदास बुरड़, विधि कोठारी और विशिष्ट तपस्या करने वाले रमेश पीपाड़ा, मन्जू पीपाड़ा, प्रेमबाई, ललिता जैन, मधु जैन, विकास बुरड़़, अश्विनी बुरड़, मनीषा बुरड़, लतादेवी श्रीश्रीमाल, आशीष वेद, वन्दना पारख, मन्जू सुराना, सरोज सिपाणी को सम्मानित किया गया। पदमचन्द सुराणा परिवार की ओर से एक वर्ष में सबसे ज्यादा दादा गुरुदेव की माला का जाप करने वालों में प्रथम पुरस्कार मोतीलाल, द्वितीय पुरस्कार रश्मि जैन और तृतीय पुरस्कार सीमा सुराना को दिया गया। नवकार मंत्र की माला फेरने वालों को 11 हजार रुपए का पुरस्कार दिया गया।

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