>>Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment! |
Video पीएमआर, टीबी एंड चेस्ट व इमरजेंसी मेडिसिन पाठ्यक्रम होंगे मर्ज ! Thursday 31 August 2023 05:26 PM UTC+00 चन्द्र प्रकाश जोशी अजमेर. नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से एमबीबीएस पाठ्यक्रम से भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर), टीबी एंड चेस्ट तथा इमरजेंसी मेडिसिन पाठ्यक्रम अन्य में मर्ज कर दिए गए हैं। अब एमबीबीएस में इन्हें अलग पाठ्यक्रम के रूप में नहीं पढ़ाया जाएगा।नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से प्रमुख तीनों विभागों को एमबीबीएस के पाठ्यक्रम से हटाने को लेकर ना केवल मेडिकल स्टूडेंट बल्कि चिकित्सकों में भी निराशा का भाव पैदा हो गया है। जबकि इन तीनों ही विभागों से गंभीर मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं बेहतरीन मिलती रही हैं। चिकित्सा क्षेत्र में एनएमसी के निर्णय को लेकर भी चिंता जताई गई है। पीएमआर विभाग को ऑर्थोपेडिक एवं टीबी एंड चेस्ट को मेडिसिन विभाग में मर्ज कर दिया गया है। यह उठ रहे हैं सवालपीएमआर विशेषज्ञों का विकलांगता या अपंगता वाले रोगियों जैसे लकवा, सेरिब्रल पाल्सी, स्ट्रोक, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी आदि की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। विकलांगता के अलावा यह ब्रांच मांसपेशियों, न्यूरोलॉजिकल और दर्द संबंधित रोगियों के इलाज में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस शाखा को पाठ्यक्रम से हटाने से कई सवाल उत्पन्न हो रहे हैं। यह पड़ेगा असर- संबंधित विषय के प्रति रुचि रखने व कॅरियर बनाने वाले छात्रों के अवसर सीमित होंगे। -विकलांगों की सेवा करने वाले छात्रों की मानसिकता पर पड़ेगा असर। - विकलांग व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में आने से यह निर्णय रोकेगा।कोविड में इन विभागों का रहा मुख्य रोल कोविड की महामारी में टीबी एंड चेस्ट एवं इमरजेंसी मेडिसिन शाखाओं के विशेषज्ञों ने जान पर खेलकर मरीजों को बचाया है। इन विभागों की मुख्य भूमिका रही है। ऐसे में इन विभागों को एमबीबीएस से हटाने का निर्णय घातक साबित होगा। इसलिए भी जरूरी पीएमआर पाठ्यक्रम देश के 2.5 प्रतिशत (2.5-3 करोड़) लोग किसी न किसी विकलांगता से ग्रसित हैं। इनके लिए भी प्रधानमंत्री ने सुलभ भारत अभियान (असेंसिबल इंडिया) जैसी योजनाएं बनाई हैं। यही नहीं सचिवालय और मिनिस्ट्री में भी विकलांग लोगों के हितार्थ अलग आयोग है। ऐसे में एक एमबीबीएस चिकित्सक का विकलांगों और उनकी विशेष समस्याओं के लिए समर्पित विभाग की सम्पूर्ण जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।- डॉ. प्रीति सोनी, सहायक आचार्य, पीएमआर विभाग, जेएलएन अस्पताल क्लिनिकल बेस्ट शिक्षा का प्रयास नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से क्लिनिकल बेस्ड शिक्षा 2023-24 के तहत पीएमआर, टीबी एंड चेस्ट, इमरजेंसी मेडिसिन को एमबीबीएस में अलग से विषय के रूप में शामिल नहीं करने का निर्णय किया गया है। एमबीबीएस में अलग से विषय नहीं होकर इन्हें अन्य प्रमुख विषयों के साथ ही पढ़ाया जाएगा, ताकि बच्चों पर अनावश्यक भार नहीं पड़े। पीजी में यह सभी अलग से विषय के रूप में होते हैं।- डॉ. अरविन्द खरे, आरएमटीसीए अध्यक्ष, अजमेर |
| You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at rajisthanews12@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription. |
