>>: कोचिंग स्टूडेंट के मन की 'कैमिस्ट्री'

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कोटा. कोचिंग स्टूडेंट के मन में क्या उथल-पुथल चल रही है..., क्या पढ़ाई में मन नहीं लगता...। टेस्ट को लेकर तनाव में रहते हैं क्या..., ऐसे तमाम सवालों को लेकर स्टूडेंट से संवाद किया जा रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर कोचिंग संस्थानों के दो हजार स्टूडेंट से सवालों के जरिये उनके मन की कैमिस्ट्री को जानने का प्रयास किया जा रहा है। कोचिंग स्टूडेंट के लिए सवालों की एक प्रश्नावली तैयारी की गई है, जिसे शुक्रवार से भरवाना शुरू कर दिया है। यह प्रश्नावली प्रशासनिक अधिकारियों व मनोवैज्ञानिकों की टीम ने तैयार की है। विभिन्न एनजीओ के माध्यम से स्टूडेंट से क्लास में यह प्रश्नावली भरवाई जा रही है। हालांकि इससे कोचिंग स्टूडेंट नाखुश हैं। उनका कहना है कि इससे उनका समय खराब हो रहा है। इस प्रक्रिया में एक से दो घण्टे का वक्त लग रहा है। यह सवाल स्टूडेंट के दिमाग में क्या चल रहा है, इसके ईद-गिर्द हैं। सवालों में नकारात्मकता का भाव ज्यादा है।
यह टीम गठित की
राज्य सरकार ने कोचिंग स्टूडेंट के मामले में तीन सदस्य कमेटी गठित की है। इसमें राष्ट्रीय मनोचिकित्सा के स्टेड नोडल ऑफिसर डाॅ. महेन्द्र कुमार शर्मा, कोटा मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. विनोद दहिया, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डाॅ. धर्मदीपसिंह शामिल हैं। टीम स्टूडेंट के मानसिक दबाव के बारे में अध्ययन कर रिपोर्ट सरकार को देगी। उधर टीमों ने प्रमुख कोचिंग संस्थानों में स्टूडेंट से यह प्रश्नावली भरवाई।

ऐसे सवाल से पढ़ रहे स्टूडेंट का मन

- क्या आप इन दिनों जो भी काम कर रहे हैं, उसमें ध्यान केन्दि्रत कर पाते हैं?
- क्या आपको इन दिनों यह महसूस होता है कि चिंता के कारण नींद नहीं आती?

- इन दिनों महसूस करते हैं कि कायोZं के बारे में आपकी भूमिका उपयोगी रही है?
- विभिन्न निर्णय लेने में समर्थ महसूस किया है?

- इन दिनों आप लगातार तनाव महसूस करते रहे हैं?
- आप महसूस करते हैं कि कठिनाइयां दूर करने में असमर्थ हैं?

- क्या आप अपने जीवन की साधारण दिनचर्या का आनंद ले पाते हैं?
- इन दिनों अप्रसन्न एवं दुखी महसूस करते हैं?

- आपना आत्मविश्वास खोते जा रहे हैं?
- क्या आपको नींद नहीं आती है?

- मैं खुश होने के लायक नहीं हूं-मैं कष्ट सहने या सजा पाने के लायक हूं?
एक पीरियड मौज-मस्ती के नाम पर
ज्यादातर कोचिंग संस्थानों में शुक्रवार को बदला-बदला माहौल नजर आया। अंतिम पीरियड मौज मस्ती के लिए दिया गया। स्टूडेंट का कहना है कि पहली बार एक पीरियड मनोरंजन के लिए दिया गया। इसमें किसी क्लास में स्टूडेंट ने आपस में अंताक्षरी खेली तो किसी ने कविताएं व चुटकले सुनकार मनोरंजन किया। फैकल्टी ने भी क्लास में घोषणा कर दी कि वह पढ़ाई के लिए कोई दबाव नहीं डालेंगे, जिसको पढ़ना है पढ़ें और जिनको मौज मस्ती करना है वह करें।

स्टूडेंट से पत्रिका की बातचीत

सवाल : जो सवाल पूछे गए हैं, उनको आप कैसे देखते हैं?
स्टूडेंट : ज्यादातर सवाल नेगेटिव सोच वाले हैं।

सवाल : दो माह टेस्ट नहीं लेने का निर्णय लिया है, इस बारे में क्या सोचते हैं?
स्टूडेंट : टेस्ट नहीं होंगे तो कैसे पता चलेगा कि हम किस स्तर पर आ रहे हैं। खुद में सुधार के लिए टेस्ट जरूरी है।

सवाल : पढ़ाई या टेस्ट से टेंशन रहती है?
स्टूडेंट : टेस्ट होते हैं, पढ़ाई पर पूरा फोकस कर पाते हैं, हालांकि टेस्ट की टेंशन तो रहती है, लेकिन टेस्ट नहीं होंगे तो फिर हमें कैसे पता चलेगा कि किस लेवल पर चल रहे हैं।

सवाल : सप्ताह में एक दिन हाॅफ डे रहे, एक पीरियड मनोरंजन के लिए रहेगा, इसे कैसे देखते हैं?
स्टूडेंट : हॉफ डे का निर्णय सही नहीं है। हमारा कोर्स कैसे पूरा होगा, हमारे लिए यह वक्त ही सबसे महत्वपूर्ण है।

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