>>: अमानक डीएपी व बीज विक्रय करने वाली फर्म के नाम हो सार्वजनिक, फसल खराबे की सर्वे रिपोर्ट से किसान संगठन नाराज

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अमानक डीएपी व बीज विक्रय करने वाली फर्म के नाम हो सार्वजनिक, फसल खराबे की सर्वे रिपोर्ट से किसान संगठन नाराज
- नरमे में हुए खराबे के लिए विशेष पैकेज की हो घोषणा
हनुमानगढ़. संयुक्त किसान मोर्चा हनुमानगढ़ ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत कलक्टे्रट के समक्ष धरना लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान मोर्चा सदस्यों ने गुलाबी सुंडी से खराब हुई नरमे की फसल के पौधे दिखाकर रोष जाहिर किया। इसके बाद मंगलवार दोपहर को एडीएम कपिल यादव से किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने वार्ता की। इसमें फसल खराबे से हुए नुकसान के मुआवजे के लिए विशेष पैकेज की घोषणा कराने की मांग की गई। साथ ही एमएसपी पर शीघ्र खरीद शुरू करने, अमानक यूरिया, डीएपी एवं बीजों के विक्रय संबंध में जिन फर्म के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, उनके नाम अखबार में प्रकाशित करवा कर सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई। साथ ही किसान आंदोलन के दौरान निहत्थे किसानों पर केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टैनी के बेटे की ओर से गाड़ी चढ़ाकर किसानों की हत्या करने के मामले में मंत्री को शीघ्र बर्खास्त करने की मांग की गई। इस मांग को लेकर मोर्चा सदस्यों ने कलक्ट्रेट के समक्ष पुतला जलाकर रोष जाहिर किया गया। इस मौके पर रामेश्वर वर्मा, रेशमसिंह मानुका, रायसिंह बंसरीवाला, ओम जांगू, रायसाहब चाहर, मनप्रीतसिंह मक्कासर, बलविंदर सिंह, संदीप कंग, गुरपयार सिंह, संजय जाखड़ आदि मौजूद रहे। रेशमसिंह मानुंका ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन श्रीगंगानगर के साथी संदीप सिंह व मंगतसिंह मान नेतृत्व में नरमे की लकडिय़ां लेकर जयपुर में सीएम हाउस पहुंचे। इसके बाद शहीद समारक पर धरना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री के ओएसडी से वार्ता के बाद धरना समाप्त किया।
कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारी करे सर्वे रिपोर्ट तैयार तो मिले सही मुआवजा
रावतसर. गुलाबी सुण्डी से नरमे की फसल को हुए नुकसान की सर्वे रिपोर्ट को लेकर मंगलवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल ने तहसील अध्यक्ष जयवीर गोदारा के नेतृत्व मेें तहसीलदार से मुलाकात की। पटवारियों की ओर से दी गई फसल खराबे की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई। भाकिसं सदस्यों ने बताया कि क्षेत्र में नरमे की फसल में लगभग 70 से 80 प्रतिशत नुकसान हुआ है। परन्तु पटवारियों ने बिना गिरदावरी किए खराबे को काफी कम दिखाया है। संगठन के जिला महामंत्री लालचन्द डूडी ने बताया कि जिला कलक्टर ने फसल खराबे की सर्वे रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी पटवारियों को सौंपी है। फसल खराबे का आकलन करने के लिए ऐसा कौनसा पैमाना है जिसके आधार पर पटवारी यह तय कर सके कि किस खेत में कितना नुकसान हुआ है। फसल खराबे का सही आकलन केवल कृषि विभाग के वैज्ञानिक या फिर कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारी ही कर सकते हैं। हाल ही क्षेत्र में कृषि विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने सर्वे किया था। इसमें अधिकारियों ने फसलों में काफी नुकसान होना बताया था। परन्तु पटवारियों की दी गई रिपोर्ट में वह खराबा काफी कम बता रहे हैं। जबकि पटवारियों ने किसी के खेतों में जाकर गिरदावरी व फसल खराबे का सर्वे ही नहीं किया है। भाकिसं सदस्यों ने फसल खराबे की विशेष रिपोर्ट तैयार करने के लिए कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की है ताकि फसल खराबे का सही आकलन हो सके व किसानों को राहत मिल सके। तहसीलदार ने किसान संघ के सदस्यों को पटवारियों से पुन: सर्वे करवाने का आश्वासन दिया तथा न्य मांगें उच्चाधिकारियों को प्रेषित करने की बात कही। इस मौके संभाग सदस्य चतरसिंह रावतोत, जिला उपाध्यक्ष रामप्रताप चोटिया, शिवकुमार पुरोहित, लालचन्द डूडी, मदन गोपाल, मक्खन सिंह, राजू स्वामी, अमरसिंह गोदारा, किरसन गोदारा, मोमनराम, महेन्द्र भाकर, नेमीचन्द, मनशाराम, रूघाराम, करणी सिंह, धनपत सिंह, किशोर सिंह, प्रभुराम सहारण आदि मौजूद रहे।
एक अगस्त से हो गिरदावरी
भाकिसं सदस्यों ने क्र ोप कटिंग की विशेष गिरदावरी एक सितंबर की बजाय एक अगस्त को करने की मांग की है। बताया कि एक सितंबर तक मूंग, मोठ व ग्वार की फसलें कट चुकी होती हैं। इसके बाद गिरदावरी करने का कोई औचित्य नहीं है। इसकी विशेष गिरदावरी एक अगस्त से की जाए।
क्लेम व्यवस्था पर नाराजगी
भाकिसं सदस्यों ने केन्द्र व राज्य सरकार की फसल बीमा क्लेम की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की। संगठन सदस्यों ने बताया कि एक तो किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं और बाद में बीमा क्लेम के लिए किसान को भटकना पड़ता है। बीमा क्लेम भी दो-दो साल बाद दिया जाता है। किसानों को जिस प्रकार तय समय सीमा में फसल बीमा कटवाने के लिए पाबंद किया जाता है, उसी प्रकार केन्द्र सरकार व राज्य सरकार भी बीमा कंपनी को तय समय सीमा में बीमा क्लेम भुगतान करने के लिए पाबंद करे।

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