>>: Rajasthan Election 2023 : इस बार मजबूती से हक मांग रही महिलाएं, नारी शक्ति को ‘वंदन’ का इंतजार

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महिला आरक्षण बिल पारित होने के बाद नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व इसी चुनाव से बढ़ाने की मांग जोरों पर है। इस बार पिछले चुनावों की अपेक्षा ज्यादा महिलाएं चुनावी रण में मजबूती से ताल ठोक रही है। अब भाजपा व कांग्रेस की सूचियों का इंतजार है। पाली जिले के मारवाड़-गोडवाड़ की 14 सीटों पर वर्तमान में महज एक महिला विधायक है। जैतारण, बाली, मारवाड़ जंक्शन, रेवदर, भीनमाल, रानीवाड़ा और सांचौर विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां से विधायिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कभी नहीं रहा। मजे की बात यह है कि इन सीटों पर इस बार महिलाओं ने मजबूती से हक मांगा है। महिलाएं भाजपा और कांग्रेस से टिकट की दावेदार है। राजनीतिक दलों पर दबाव भी बनाया है।

यहां नहीं मिला अवसर
जैतारण, बाली, मारवाड़ जंक्शन, रेवदर, भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर

कहां कब रहीं महिला विधायक
भाजपा
सोजत : शोभा चौहान -2018
सोजत : संजना आगरी-2008, 2013
पाली : पुष्पा जैन-1985, 1990
सिरोही : तारा भंडारी-1990, 1993
जालोर : अमृता मेघवाल-2013

कांग्रेस
सुमेरपुर: बीना काक-1985, 1993, 1998, 2008
आहोर : समुन्द्रकंवर-1972, 1980
पिण्डवाड़ा : गंगाबेन-2008

38 साल से महिला उम्मीदवार
मारवाड़-गोडवाड़ में सुमेरपुर एक मात्र ऐसी सीट हैं जहां कांग्रेस ने पिछले 38 सालों से महिला को उम्मीदवारी सौंप रखी हैं। कांग्रेस नेत्री बीना काक यहां से 4 बार विधायक चुनीं गईं, जबकि दो बार उन्हें हार का भी सामना करना पड़ा। पिछले चुनावों में बीना काक का टिकट काटकर रंजू रामावत को प्रत्याशी बनाया गया था। दूसरी तरफ, इस सीट पर भाजपा ने महिला उम्मीदवार कभी नहीं उतारा। हालांकि, इससे परे संभाग की बात की जाए तो अन्य क्षेत्रों में महिलाओं को आशानुरूप तरजीह नहीं मिली।

दो चुनावों से महिलाओं का दबदबा
सोजत सीट पिछले दो चुनावों से महिलाओं के कब्जे में रही हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही अपना उम्मीदवार महिला को बनाया। हालांकि, यहां भाजपा एक कदम आगे हैं। संजना आगरी दो बार विधायक रह चुकीं। शोभा चौहान वर्तमान विधायक है। वहीं, मारवाड़-गोडवाड़ में पहली महिला विधायक आहोर से समुन्द्रकंवर चुनीं गईं। वे दो बार आहोर से विधायक रहीं। ये बात और है कि उनके बाद आहोर विधानसभा से महिला को कभी दोबारा मौका नहीं दिया गया।


टॉपिक एक्सपर्ट
महिलाओं की दावेदारी वाजिब है। वे सिद्दत से जुटी हुई है। अब महिलाएं पैराशूट की तरह राजनीति में नहीं आ रही, बल्कि जनता के बीच रहती है। आरक्षण लागू करने से भी उनका मनोबल बढ़ा है। उनके आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है। महिलाओं को समुचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
रश्मिसिंह, जिला प्रमुख, पाली

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