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त्रिकोण, चतुष्कोण के साथ जीवन के दृष्टिकोण को भी पढ़ें... Saturday 18 November 2023 06:25 AM UTC+00 जिले के मावली क्षेत्र के पलाना खुर्द में माहेश्वरी समाज की ओर से आयोजित नानी बाई रो मायरो की कथा के दूसरे दिन सैकड़ों की संख्या में भक्त उमड़े। कथा व्यास संत दिग्विजयराम महाराज ने कथा में कहा कि हम त्रिकोण, चतुष्कोण, अष्टकोण तो पढ़ते हैं, लेकिन जीवन के दृष्टिकोण को कभी नहीं पढ़ते। हमें जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए जीवन के दृष्टिकोण को भी पढ़ना चाहिए। भक्त नरसी अपने आप में नकारात्मकता में सकारात्मकता को ढूंढ़ने वाले व्यक्तित्व हैं। वे नकारात्मकता में भी सकारात्मकता ढूंढ़ लेते थे। उन्होंने जीवन का दृष्टिकोण समझाने के लिए अचार और चटनी का उदाहरण देते हुए कहा कि अचार में खट्टे, मीठे, कड़वे, कसैले, खारे, तीखे स्वाद वाले तत्वों के मिश्रण के बावजूद उसका स्वाद सभी को लुभाता है और लम्बे समय तक चलता है। लेकिन, इसके विपरीत चटनी दो दिन से ज्यादा नहीं चलती। इसलिए हमारी नकारात्मक स्मृतियों को चटनी की तरह रखना चाहिए और अच्छी सकारात्मक स्मृतियों को अचार की तरह संजोना चाहिए। कार्यक्रम के तहत गुरुवार रात को हर घर के बार रंगोली, अल्पना सजाई गई और पुष्पों से राम लिखकर दीप प्रज्वलित किए गए। इससे पूर्व, दूसरे दिन की कथा का क्रम संत वृंद के वंदन-अभिनंदन से हुआ। कथा व्यास ने कहा कि बेटियां दो कुल को संभालती हैं। उन्होंने मां को भगवान का स्वरूप बताते हुए कहा कि भगवान हर जगह उपस्थित नहीं हो सकते, लेकिन उन्होंने मां के रूप में हर व्यक्ति को भगवान का स्वरूप प्रदान किया है। मां स्वयं कष्ट उठा लेती हैं, लेकिन अपने बच्चों को हर समय कष्ट से दूर रखने का प्रयास करती है। बिना मां के परिवार सूना है, संसार सूना है।
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