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सर्दी और तनाव से सिकुड़ने लगी दिमाग की नसें Saturday 18 November 2023 06:08 AM UTC+00 केस एक: पश्चिम बंगाल के रहने वाले 44 साल के शफीउल्लाह खेत में सिंचाई करते समय अचानक बेहोश हो गए। परिजन उन्हें लेकर कल्याण अस्पताल पहुंचे। जहां आईसीयू में तीन दिन भर्ती रहे लेकिन ब्रेन स्ट्रोक और कार्डिएक अरेस्ट के कारण दम तोड़ दिया। केस- दो - मूलत उत्तर प्रदेश के उस्मानबाद के 40 साल के समर सिंह निजी कंपनी में काम करते थे। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलित होने पर आईसीयू में भर्ती हुए। जहां ब्रेन स्ट्रोक के कारण शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया। शारीरिक रूप से लाचार होने के कारण नौकरी छूट गई और गांव चले गए। सर्दी की दस्तक के साथ दिमाग की नसें सिकुड़ने से ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आने लगे हैं। पहले 55 साल की उम्र वालों को ब्रेन स्ट्रोक की समस्या हो रही थी, लेकिन अब 30-40 की उम्र वाले इस जानलेवा समस्या की चपेट में आ रहे हैं। चिंताजनक बात है कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में करीब 40 फीसदी संख्या युवा और अधेडावस्था के लोगों की है। मेडिकल कॉलेज के अधीन कल्याण अस्पताल में न्यूरो चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को मजबूरी में रेफर करना पड़ता है। इस कारण बढ़े मरीज चिकित्सकों के अनुसार जंकफूड और फैट कोलेस्ट्रॉल से भरपूर आहार खाने से स्ट्रोक और हृदय रोगों से मृत्यु का खतरा बढ़ा है। इसके अलावा खाने में बहुत अधिक नमक (सोडियम) के कारण भी ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ता जा रहा है। वहीं शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहने वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा है। फौरन उपचार जरूरी रोजमर्रा के दौरान शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण मोटापा बढ़ जाता है और शरीर के ऑर्गन ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। जिससे ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ब्रेन स्ट्रोक के 85 फीसदी मामलों में ब्लॉकेज के कारण नसें फट जाती है। ऐसे में मरीज को फौरन इलाज की जरूरत होती है। स्ट्रोक के कारण रक्त की आपूर्ति कम या बाधित होने के कारण दिमाग के सैल्स मरने लगते हैं। जिससे संबंधित भाग में खून की सप्लाई बाधित हो जाती है और संबंधित भाग में लकवा मार जाता है। वहीं डायबिटीज, हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं हैं तो उन्हें ब्रेन स्ट्रोक होने का ज्यादा रिस्क होता है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया कल्याण मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनो एक न्यूरो चिकित्सक ने ड्यूटी ज्वाइन की थी, लेकिन उसके नौकरी छोड़ने के बाद से अस्पताल में न्यूरो का कोई चिकित्सक नहीं है। चिकित्सक नहीं होेने के कारण मरीजों को गंभीर अवस्था में कई बार रेफर करना पड़ता है। हालांकि विभाग के उच्चाधिकारियों को इस बारे में अवगत करवाया जा चुका है। डॉ. महेन्द्र कुमार, अधीक्षक कल्याण अस्पताल |
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