>>: मेजा नहर, भीलवाड़ा में ना बन ना जाए आफत

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वस्त्रनगरी की जीवनरेखा मेजा बांध की नहरों के रखरखाव व मरम्मत के दावे जलसंसाधन विभाग के सरकारी फाइलों से सतही तौर पर बाहर नहीं निकल पाए हैं। शहर के मध्य से गुजर रही मेजा बांध की नहरें कई हिस्सों में कीचड़, कचरे व मलबे के ढेर से पटी हुई है।

22 नवम्बर को खोलेंगे नहर
आधी अधूरी तैयारी के बीच जलसंसाधन विभाग ने तय कार्यक्रम के अनुसार बायी मुख्य नहर मांडल को 20 नवम्बर व दांयी नहर पांसल को 22 नवम्बर को खोल दिया तो लाखों लीटर पानी व्यर्थ में बह जाएगा। बापूनगर क्षेत्र में नहरे के आसपास के घरों में पानी घुस आएगा। इससे आबादी क्षेत्र का जन जीवन प्रभावित होगा। ऐसे हालात अकसर नहरें खोले जाने के दौरान सामने आते रहे हैं।

बम्बूल का जंगल
भीलवाड़ा शहर में मेजा बांध की नहर का एक बड़ा हिस्सा बापूनगर, आजाद नगर व चन्द्रशेखर आजाद नगर क्षेत्र से गुजरता है। क्षेत्र के लोगों को अब इस बात की चिंता है कि मेजा का पानी कहीं उनके घरों में ना घुस आए। उन्होंने बताया कि नहरों की साफ सफाई केवल कागजी रूप से हुई है। नहरों में कंटीले झाडि़यों व बम्बूल का जंगल पसरा हुआ है। नहर कई स्थानों पर टूटी हुई है। यहां मलबा व गंदगी का ढेर है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग को मेजा बांध से पानी छोड़ने से पहले नहरों की सुध लेनी चाहिए।

सात फीट पानी छोड़ेंगे
जल संसाधन विभाग ने रबी की बुवाई के लिए किसानों को पानी देने के लिए जल कमेटी वितरण की बैठक मंगलवार को आयोजित की। इसमें यह निर्णय हुआ कि किसानों को दो सौ एमसीएफसीटी पानी किसानों के लिए मेजा बांध की नहरों से छोड़ा जाएगा। मेजा बांध का जलस्तर अभी 16.10 फीट है। इसमें से किसानों के लिए सात फीट पानी छोड़ा जाएगा। यह नहरें बीस से अधिक दिन तक चलेगी।

पहले घरों में घुस चुका पानी
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि पहले भी कई बार मेजा बांध से छोड़ा गया पानी घरों में घुस गया था। रसोई घर के साथ ही कमरों में रखे बर्तन व घरेलू सामान पानी में तैरने लगे। छतों पर रात तक बितानी पड़ी थी। अधिकारियों की लापरवाही से लाखों लीटर पानी की तो बर्बादी हुई और जीवन भी संकट में पड़ गया था। इधर, विभागीय अधिकारियों ने दावे किए है कि मेजा बांध की नहरों की जांच-परख कर ली गई है। नहर के आसपास के घरों को कोई खतरा नहीं है।

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