>>: Digest for December 24, 2023

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Table of Contents

कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस रोबोटिक्स, वर्चुअल रियलिटी, डाटा साइंस एंड एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे कोर्स भी संचालित होंगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूजीसी ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी की है। जिसमें कौशल विकास के लिए विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को स्किल डेवलपमेंट सेंटर शुरू कर 28 तरह के शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू करने को कहा गया है।

अपने स्तर पर जुटाने होंगे संसाधन
यूजीसी के मुताबिक विवि व कॉलेजों को स्किल सेंटर अपने स्तर पर ही शुरू करने होंगे। जरूरी बजट व संसाधन भी खुद ही जुटाना होगा। इसके लिए संस्थान उद्योगों से एमओयू कर सकते हैं। पर सेंटर के लिए पर्याप्त स्थान, वर्कशॉप, मशीनरी या टूल आदि के इन्सटालेशन व लैबोरेट्री आदि की व्यवस्था संस्थानों को अपने परिसर में ही करनी होगी।

30 स्टूडेंट पर एक शिक्षक
यूजीसी ने स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टीचर- स्टूडेंट का अनुपात भी तय किया है। गाइडलाइन के अनुसार सेंटर में 30 स्टूडेंट पर एक शिक्षक होगा। शिक्षण संस्थानों को इस नियम का पालन करना ही होगा। शार्ट टर्म कोर्स का अनुमोदन गवर्निंग बॉडी करेंगी।

इन 28 कोर्स पर रहेगा फोकस
यूजीसी ने स्किल डेवलपमेंट के लिए करीब 28 कोर्स संचालित किए जाने का फोकस एरिया तय किया है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, इंडस्ट्रियल आइओटी, स्मार्ट सिटीज, डाटा साइंस एंड एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी एंड एक्सटेंडेड रियलिटी, साइबर सिक्युरिटी एंड डिजिटल फॉरेंसिक्स, 5जी कनेक्टिविटी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बेसिक कोडिंग एंड कंप्यूटिंग लैंग्वेज सरीखे कोर्स शामिल हैं।

नई शिक्षा नीति में कौशल विकास पर बल
नई शिक्षा नीति में स्किल डेवलपमेंट पर विशेष बल दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा से ही कौशल विकास आधारित कोर्स इस शिक्षा नीति में शामिल किए गए हैं। ताकि शिक्षा के साथ ही स्टूडेंट बाजार की मांग व उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार हो सके। इसके तहत ही कॉलेजों व विवि में स्किल डेवलपमेंट केंद्र शुरू करने की दिशा में यूजीसी ने काम शुरू किया है।

नीमकाथाना. जिले के राजस्व अधिकारियों की मीटिंग कलक्ट्रेट सभागार में जिला कलक्टर श्रुति भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कलक्टर ने अधिकारियों से राजस्व मामलों की प्रगति रिपोर्ट ली। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों में जो लम्बित प्रकरण है, उनको मिशन मोड पर लेकर त्वरित निस्तारण करें। उन्होंने एलआर एक्ट के विचाराधीन मामलों, तथा जिले में नामांतरण, भू-रूपांतरण एवं आवंटन एवं रास्तों के वर्षों से लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण करने की बात कही। उन्होंने सार्वजनिक रास्तों के सीमांकन एवं सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने के संबंध में कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में लाभान्वितों की ईकेवाईसी के कार्य में प्रगति लाने, लोकायुक्त में लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण करने को कहा। बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर अनिल महला, एसडीएम राजवीर सिंह, खेतड़ी एसडीएम जयसिंह, उदयपुरवाटी एसडीएम कल्पित शिवरान, श्रीमाधोपुर एसडीम दिलीप सिंह, तहसीलदार सुनील कुमार मील, नायब तहसीलदार विजेंद्र सिंह राठौड, पाटन तहसीलदार मुनेश कुमार, श्रीमाधोपुर तहसीलदार लोकेंद्र मीणा, उदयपुरवाटी तहसीलदार दौलाराम ़ सहित कई अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

ई-फाइलिंग से करें पत्राचार

जिला कलक्टर ने अधिकारियों को सभी प्रकार के पत्राचार एवं फाइलों का संचालन राजकाज के ई-फा इल सिस्टम के जरिए करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि ई-फाइलिंग के माध्यम से पत्राचार करने में समय की बचत होगी एवं आमजन को जल्द राहत मिलेगी। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के उपनिदेशक मुकेश गाड़ोदिया ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से ई-फाइलिंग की जानकारी दी। कलक्टर ने उपखंड अधिकारियों को विकसित भारत संकल्प यात्रा के प्रभावी मॉनिटरिंग करने और वंचितों को सरकारी योजनाओं से जोड़ऩे के निर्देश भी दिए।

सीकर/नेछवा. कस्बे के केबी मोर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में चारदिवारी निर्माण में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। इसको लेकर स्कूल के प्रधानाचार्य ने समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयक को शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इस मामले में प्रशासन ने बुधवार को कर्मचारी भेजकर सीमा ज्ञान करवाया है।

मामले के अनुसार विद्यालय को आवंटित खेल मैदान की चार दिवारी के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2023 में 28 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। इस पर मैसर्स सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया। विद्यालय स्तर पर चारदिवारी निर्माण कार्य के लिए छह सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया। आरोप है कि कमेटी को भी निर्माण के बारे में संवेदक ने कोई जानकारी नहीं दी तथा मनमाने तरीके से बिना सीमाज्ञान ही चारदिवारी का निर्माण शुरू कर दिया गया। प्रधानाचार्य ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए है।

मनमर्जी से बन रही चारदिवारी

प्रधानाचार्य ने परियोजना समन्वयक को भेजे पत्र में बताया कि 14 जुलाई को कार्यादेश के बाद भी संवदेक ने काम समय पर चालू नहीं किया। उसके बाद अचानक बिना स्कूल कमेटी को जानकारी दिए काम शुरू कर दिया गया। खेल मैदान की सही सीमा पर चारदिवारी का निर्माण नहीं किया जा रहा है। प्रधानाचार्य का आरोप है कि खेल मैदान क़ी मिट्टी को दूसरी जगह डाला जा रहा है तथा कमेटी की जानकारी के बिना मिट्टी को बेचा जा रहा है।

उपखंड प्रशासन को दिया आवेदन

इधर ्स्कूल के प्रधानाचार्य ने तहसीलदार को पत्र भेजकर खेल मैदान के सीमांकन की मांग की है। इस मामले में तहसीलदार नारायण राम दैया ने बताया कि मंगलवार को राजस्व बैठक होने के कारण सीमाज्ञान नहीं हो सका था। बुधवार को कर्मचारी भेजकर सीमा ज्ञान करवा दिया गया है।

कांग्रेस के चुनावी रण का मास्टर स्ट्रोक रही कर्मचारियों की पेंशन स्कीम ओपीएस ने अब प्रदेश के सवा छह लाख से अधिक कर्मचारियों की चिन्ता बढ़ा दी है। वजह यह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने ओपीएस को लेकर अपना रूख फिलहाल स्पष्ट नहीं किया है। वहीं कर्मचारी नई सरकार से भी पेंशन की गारंटी चाहते हैं। कई कर्मचारी संगठनों की ओर से राजस्थान में ओपीएस ही लागू रखने का मुद्दा उठाया जा रहा है।
हालांकि भाजपा की चुनावी रैलियों में पार्टी नेताओं ने ओपीएस को लेकर कोई वादा नहीं किया गया। ऐसे में कर्मचारियों की चिन्ता है कि कहीं भाजपा सरकार पहले की तरह उनको एनपीएस के ही दायरे में नहीं ले आए। ऐसे में कर्मचारियों को अब फिर से भविष्य की चिन्ता सताने लगी है। वैसे भी किसी भी भाजपा शासित राज्य में अभी ओपीएस लागू नहीं है। जबकि गहलोत सरकार ने पहले चरण में ही राज्य कर्मचारियों को ओपीएस के दायरे में लिया था। इसके बाद बोर्ड, आयोग व निगम कर्मचारियों की मांग पर उनको भी ओपीएस में शामिल किया। हालांकि कर्मचारियों के एनपीएस अंशदान के 41 हजार करोड़ की राशि नहीं लौटाने से केन्द्र व राज्य में एक साल काफी टकराव रहा।

रिजर्व बैंक का तर्क
ओपीएस को लागू करने पर रिजर्व बैंक के अधिकारियों का तर्क है कि यह अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। यूपीए सरकार में रिजर्व बैंक के गर्वनर रह चुके रघुराम राजन भी कह चुके हैं कि ओपीएस लाने पर राज्य सरकारों की भविष्य में देनदारियां बढ़ेंगी।

फिलहाल इन राज्यों में ओपीएस
फिलहाल देश के हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में ओपीएस लागू है। जबकि पश्चिम बंगाल में पहले से ही ओपीएस लागू है। कांग्रेस ने वोट बैंक में सेंधमारी के लिए ओपीएस को चुनावी मुद्दा बनाया था।

केद्र ने सुधार के लिए समिति बनाई
लोकसभा में भी पिछले दिनों ओपीएस का मुद्दा उठाया गया। केन्द्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि एनपीएस की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन किया है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद इसमें सुधार किए जा सकते है। वहीं केन्द्र सरकार की लोकसभा में यह भी कहा गया कि जिन राज्यों ने ओपीएस लागू की है उनके प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए गए।

कर्मचारियों को चाहिए पेंशन की गारंटी
कर्मचारियों का कहना है कि ओपीएस में दस साल की सेवा पर आनुपातिक पेंशन की गारंटी होती है। इसमें न्यूनतम पेंशन 8,850 रुपए मासिक है। जबकि एनपीएस बाजार पर टिकी हुई है। इसमें मासिक 148 रुपए की पेंशन मिलने के भी उदाहरण सामने आ चुके है।

इनका कहना है
ओपीएस कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा है। सरकार ने एक अप्रेल 2004 से एनपीएस योजना शुरू की थी। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा सवालों के घेरे में है। गहलोत सरकार ने कर्मचारियों की भावना को समझते हुए अप्रेल 2022 में दुबारा ओपीएस की शुरूआत की थी। केंद्र सरकार के मंत्रियों के बयानों से अब राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के साथ ही ओपीएस की जगह एनपीएस शुरू होने की आशंका है। यदि सरकार ने फैसला बदला तो प्रदेश के कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ ( शेखावत)

फैक्ट फाइल
ओपीएस के दायरे में राज्य कर्मचारी: लगभग 5 लाख
बोर्ड, निगम व आयोग कर्मचारी: 1.25 लाख
राजस्थान में दुबारा ओपीएस लागू हुआ : 2022
ओपीएस को हटाकर एनपीएस लागू: 2004 से 2022

rajasthan old pension scheme update: कांग्रेस के चुनावी रण का मास्टर स्ट्रोक रही कर्मचारियों की पेंशन स्कीम ओपीएस (old pension scheme) ने अब प्रदेश के सवा छह लाख से अधिक कर्मचारियों की चिन्ता बढ़ा दी है। वजह यह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने ओपीएस को लेकर अपना रूख फिलहाल स्पष्ट नहीं किया है। वहीं कर्मचारी नई सरकार से भी पेंशन की गारंटी चाहते हैं। कई कर्मचारी संगठनों की ओर से राजस्थान में ओपीएस ही लागू रखने का मुद्दा उठाया जा रहा है। हालांकि भाजपा की चुनावी रैलियों में पार्टी नेताओं ने ओपीएस को लेकर कोई वादा नहीं किया गया। ऐसे में कर्मचारियों की चिन्ता है कि कहीं भाजपा सरकार पहले की तरह उनको एनपीएस (new pension scheme)के ही दायरे में नहीं ले आए। ऐसे में कर्मचारियों को अब फिर से भविष्य की चिन्ता सताने लगी है। वैसे भी किसी भी भाजपा शासित राज्य में अभी ओपीएस लागू नहीं है। जबकि गहलोत सरकार ने पहले चरण में ही राज्य कर्मचारियों को ओपीएस के दायरे में लिया था। इसके बाद बोर्ड, आयोग व निगम कर्मचारियों की मांग पर उनको भी ओपीएस में शामिल किया। हालांकि कर्मचारियों के एनपीएस अंशदान के 41 हजार करोड़ की राशि नहीं लौटाने से केन्द्र व राज्य में एक साल काफी टकराव रहा।

रिजर्व बैंक का तर्क

ओपीएस को लागू करने पर रिजर्व बैंक के अधिकारियों का तर्क है कि यह अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। यूपीए सरकार में रिजर्व बैंक के गर्वनर रह चुके रघुराम राजन भी कह चुके हैं कि ओपीएस लाने पर राज्य सरकारों की भविष्य में देनदारियां बढ़ेंगी।

फिलहाल इन राज्यों में ओपीएस (OPS in indian States)

फिलहाल देश के हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में ओपीएस लागू है। जबकि पश्चिम बंगाल में पहले से ही ओपीएस लागू है। कांग्रेस ने वोट बैंक में सेंधमारी के लिए ओपीएस को चुनावी मुद्दा बनाया था।

केद्र ने सुधार के लिए समिति बनाई
लोकसभा में भी पिछले दिनों ओपीएस का मुद्दा उठाया गया। केन्द्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि एनपीएस की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन किया है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद इसमें सुधार किए जा सकते है। वहीं केन्द्र सरकार की लोकसभा में यह भी कहा गया कि जिन राज्यों ने ओपीएस लागू की है उनके प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए गए।

फैक्ट फाइल
ओपीएस के दायरे में राज्य कर्मचारी: लगभग 5 लाख
बोर्ड, निगम व आयोग कर्मचारी: 1.25 लाख
राजस्थान में दुबारा ओपीएस लागू हुआ : 2022
ओपीएस को हटाकर एनपीएस लागू: 2004 से 2022

कर्मचारियों को चाहिए पेंशन की गारंटी
कर्मचारियों का कहना है कि ओपीएस में दस साल की सेवा पर आनुपातिक पेंशन की गारंटी होती है। इसमें न्यूनतम पेंशन 8,850 रुपए मासिक है। जबकि एनपीएस बाजार पर टिकी हुई है। इसमें मासिक 148 रुपए की पेंशन मिलने के भी उदाहरण सामने आ चुके है।

इनका कहना है
ओपीएस कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा है। सरकार ने एक अप्रेल 2004 से एनपीएस योजना शुरू की थी। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा सवालों के घेरे में है। गहलोत सरकार ने कर्मचारियों की भावना को समझते हुए अप्रेल 2022 में दुबारा ओपीएस की शुरूआत की थी। केंद्र सरकार के मंत्रियों के बयानों से अब राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के साथ ही ओपीएस की जगह एनपीएस शुरू होने की आशंका है। यदि सरकार ने फैसला बदला तो प्रदेश के कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ ( शेखावत)

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