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मकर संक्रांति पर होता है दड़ा महोत्सव, 70 किलो कि फुटबॉल से खेलेंगे तीन हजार खिलाड़ी Thursday 11 January 2024 02:31 PM UTC+00 कस्बे में हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर मनाएं जाने वाले दड़ा महोत्सव की तैयारियां इन दिनों जोरों पर है। ग्रामीणों ने दड़ा बनाने का काम किया जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध दड़ा महोत्सव का आयोजन करवाने वाले राज परिवार से ताल्लुक रखने वाले कुंवर कार्तिकेय ङ्क्षसह ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी दड़ा महोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया जाएगा। ऐसे होता है तैयार लकड़ी के बुरादे बजरी और टाट से बना यह फुटबॉल (दड़ा) तकरीबन 70 किलो वजन का होता है। जिसे 15 दिनों की कड़ी मेहनत कर कारीगर बनाते हैं। वर्तमान में आवां में ग्रामीण इसको बनाने में जुटे हैं। युवा व बुजुर्गों में इसको लेकर खासा उत्साह बना हुआ है। दड़ा करता है भविष्यवाणी 20 गांवों के लगभग तीन हजार लोग इस खेल में भागीदारी निभाते हैं। करीब दस हजार दर्शकों मकानों की छतों व गोपाल चौक में जमा होते हैं। वाले इस खेल से हजारों किसानों की आशा बंधी रहती है। ऐसी मान्यता है कि दड़ा यदि दूनी दरवाजे की तरफ जाता है तो आने वाले साल में बरसात अच्छी होती है और वह सुकाल का साल होता है, लेकिन यदि दड़ा अखनियां दरवाजे की तरफ जाता है तो आने वाला साल अकाल का साल माना जाता है। फुटबॉल से मिलता-जुलता है गौरतलब है कि रियासत काल से आवां कस्बे में दड़ा महोत्सव का आयोजन तत्कालीन राज परिवार की ओर से किया जाता रहा है। परंपरागत रूप से खेले जाने वाला दड़ा का खेल मौजूदा समय के फुटबॉल के खेल से मिलता जुलता है। खेलने वाले खिलाडिय़ों की तादाद हजारों में होती है। गांव के बीचोंबीच स्थित गोपाल चौक में खेले जाने वाले इस खेल में दो गोल पोस्ट अखनियां दरवाजा और दूनी दरवाजा होते हैं। इनकी दूरी लगभग एक किलोमीटर होती है। सैनिकों की भर्ती को लेकर हुई थी शुरुआत आवां के युवा सरपंच दिव्यांश महेंद्र भारद्वाज ने बताया कि राजस्थानी संस्कृति के प्रतीक इस अद्भुत खेल की शुरुआत एक शताब्दी पहले राव राजा सरदार ङ्क्षसह ने सेना में वीर योद्धाओं की भर्ती करने के लिए की थी, जो समय के साथ एक परम्परा के रूप में विकसित हो गई। एक नजर में दड़ा 70 किलो वजन , 15 दिन पहले तैयारी, गांवों की होती |
एसडीएम कोर्ट में परिवाद दर्ज, अवैध कॉलोनियां काटने वालों पर गिरेगी गाज Thursday 11 January 2024 02:52 PM UTC+00 कृषि भूमि और बहाव क्षेत्र में धड़ल्ले से एक दर्जन से अधिक अवैध कॉलोनियां काटने वाले भू- माफियाओं पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। अब अवैध कॉलोनियों के संबंध में प्रशासन सख्त रवैया अख्तियार करने लगा है। इस मामले में राजस्व विभाग के तहसीलदार ने उपखण्ड अधिकारी को तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट पेश करके प्रकरण दर्ज करवाया है। साथ ही अवैध कॉलोनियां काटने वालों को अब नोटिस देने की बात कही जा रही है। इसकी भनक लगते ही कोलोनाइजरों में हडक़ंप मचा हुआ है। अवैध कॉलोनियों की सूची का खुले राज गत दिनों तहसीलदार के निर्देश पर पटवारी ने 14 अवैध कॉलोनियों की सूची बनाई थी।इन अवैध कॉलोनियों के नाम और जगह का राज खुलना बेहद जरूरी है। इन अवैध कॉलोनियों में भूखण्ड एवं दुकाने खरीदने से लोग बचेंगे। इससे लोगों के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लग सकती है। साथ ही भू-माफिया के हौसले कमजोर होंगे। हालांकि राजस्व विभाग ने अभी तक अवैध कॉलोनियों की सूची सार्वजनिक नहीं की है। इसके कारण लोगों को वैध और अवैध कॉलोनियों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। पटवारियों की अनदेखी सामने आई सूत्रों ने बताया कि अवैध कॉलोनियां यूं ही विकसित नहीं हुई है। यहां पर अवैध कॉलोनियां विकसित होने में भू-कारोबारियों से पटवारियों की मिलीभगत रही है। इसकी तस्वीर उस वक्त साफ हुई। जब राजस्व विभाग की जांच में एक दर्जन से अधिक अवैध कॉलोनियों का पर्दाफाश हुआ। इससे पहले इन अवैध कॉलोनियों पर से पटवारियों ने अपनी नजर फेर रखी थी। इसके कारण ही भू-माफियाओं ने अवैध कॉलोनियां बसाने के साथ धड़ल्ले से पक्के निर्माण कर दिए है। पत्रिका ने मामला किया था उजागर उल्लेखनीय है कि कस्बे सहित आस-पास के क्षेत्र में भू-कारोबारियों ने अवैध कॉलोनियां काट दी थी। इस पूरे मामले को लेकर राजस्थान पत्रिका ने समय-समय पर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए है। इसके बाद राजस्व विभाग ने अवैध कॉलोनियों की जांच करके रिपोर्ट एसडीएम को भेजी है। अब भू- माफियाओं में हडक़ंप मच गया है। साथ ही अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करने को लेकर प्रशासन में हलचल शुरू हुई है। तहसीलदार ने धारा 177 के तहत करीब 14 अवैध कॉलोनियों की जांच रिपोर्ट भेजी है। न्यायालय में प्रकरण दर्ज कर लिया है। नोटिस जारी करके संबन्धित पक्षों से जवाब मांगा जाएगा। नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। |
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