मुकेश शर्मा
Bhajanlal Government Strict Action: पेपरलीक और भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में सख्त दिख रही भजनलाल सरकार अब भ्रष्ट नौकरशाहों की जांच को लेकर 45 विभागों में लंबित चल रही 469 अभियोजन स्वीकृति के मामलों में भी कठोर कदम उठा सकती है। एन्टी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी संख्या में नौकरशाहों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है। लेकिन इनके खिलाफ जांच के लिए एसीबी को अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। अब राज्य सरकार स्तर पर चर्चा है कि सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति के चलते मुख्यमंत्री जांच के लिए विभागों से अभियोजन स्वीकृति दिलवा सकते हैं। बड़ी बात यह है कि कार्मिक विभाग में भी करीब 54 मामलों में अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। अब यह विभाग भी मुख्यमंत्री के पास है।
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जनता से जुड़े विभागों में ज्यादा भ्रष्टाचार
प्रदेश में जनता से सीधे जुड़े विभागों में भ्रष्टाचार के मामले सबसे ज्यादा आए हैं। 45 विभागों के 469 अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के मामले लंबित चल रहे हैं। ये एक दशक से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। पंचायत राज और स्वायत्त शासन विभाग शहर और गांवों के हिसाब से सीधे जनता से जुडे हैं। इन दोनों विभागों में ही करीब पौने दो सौ अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच को लेकर अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। इसी प्रकार कार्मिक, राजस्व, पुलिस, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा, चिकित्सा और परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के मामले ज्यादा पकड़े गए हैं। बताया जा रहा है कि केन्द्र सरकार में भी राजस्थान के दो आईएएस व एक आईपीएस की अभियोजन स्वीकृति काफी समय से लंबित है।
विभाग और उनमें जांच के लंबित मामले
91 - पंचायतीराज
89 - स्वायत्त शासन
54 - कार्मिक
37 - राजस्व
23 - पुलिस
23 - सार्वजनिक निर्माण
15 - शिक्षा
14 - चिकित्सा
11 - परिवहन
10 - कृषि
10 - खनिज
10 - ऊर्जा
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छवि बदलने का करेगी प्रयास
राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भाजपा विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर हमलावर रही थी। इससे माना जा रहा है कि भजनलाल सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से छवि साफ रखने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए अभियोजन के मामलों में तेजी लाने का प्रयास करेगी।